पिछले पांच सालों में ऑर्गन ट्रांसप्लांट के इंतज़ार में लगभग 3,000 भारतीयों की मौत हो चुकी है, जिनमें से करीब आधी मौतें देश की राजधानी दिल्ली में हुई हैं.
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा बुधवार बीते (10 दिसंबर) को संसद में दिए गए आंकड़ों से पता चलता है कि 2020 और 2024 के बीच अंगों के इंतज़ार में 2,805 लोगों की मौत हुई. इनमें से 1,425 मरीज़ दिल्ली से थे, इसके बाद 297 महाराष्ट्र से और 233 तमिलनाडु से थे.
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, देश में सबसे ज़्यादा ट्रांसप्लांट दिल्ली में होते हैं, लेकिन ज़्यादातर में ज़िंदा रिश्तेदारों के दान किए गए अंग शामिल होते हैं, न कि मरे हुए डोनर के. यह ट्रेंड महाराष्ट्र, गुजरात और तमिलनाडु जैसे राज्यों में लंबी वेटिंग लिस्ट में साफ दिखता है, जहां रिश्तेदारों से अंग पाने वाले मरीज़ों के ट्रांसप्लांट जल्दी होने की संभावना ज़्यादा होती है.
वेबसाइट पर करना होता है रजिस्टर
ऑर्गन ट्रांसप्लांट की ज़रूरत वाले हर व्यक्ति को सेंट्रल वेबसाइट पर रजिस्टर करना होता है और अगर उन्हें किसी रिश्तेदार से अंग मिल जाता है तो उन्हें वेटिंग लिस्ट से हटा दिया जाता है.
अभी देश भर में 82,285 मरीज़ ऑर्गन ट्रांसप्लांट का इंतज़ार कर रहे हैं. इसमें 60,590 मरीज़ किडनी ट्रांसप्लांट, 18,724 मरीज़ लिवर ट्रांसप्लांट, 1,695 मरीज़ हार्ट ट्रांसप्लांट, 970 मरीज़ लंग ट्रांसप्लांट और 306 मरीज़ पैंक्रियास ट्रांसप्लांट का इंतज़ार कर रहे हैं.
क्या कहते हैं आंकड़े
आंकड़ों के मुताबिक, दिसंबर 2025 तक महाराष्ट्र में 20,553 मरीज़ ट्रांसप्लांट का इंतज़ार कर रहे हैं. इनमें से 13,045 को किडनी की ज़रूरत है. गुजरात में 9,592 मरीज़ वेटिंग लिस्ट में हैं, जिनमें से 7,405 को किडनी ट्रांसप्लांट और 2,019 को लिवर की ज़रूरत है.
तमिलनाडु तीसरे नंबर पर है, जहां 9,166 मरीज़ ट्रांसप्लांट का इंतज़ार कर रहे हैं, जिनमें से 6,448 को किडनी और 2,020 को लिवर की ज़रूरत है.
दिल्ली में वेटिंग लिस्ट
केंद्र सरकार की ओर से संसद में पेश किए गए आंकड़ों के मुताबिक, दिसंबर 2025 तक दिल्ली में 8,853 मरीज़ वेटिंग लिस्ट में हैं. इनमें से 5,894 को किडनी और 2,835 को लिवर ट्रांसप्लांट की ज़रूरत है.
किसी व्यक्ति को मरे हुए डोनर से ऑर्गन मिलने में कुछ महीने से लेकर कुछ साल तक लग सकते हैं, यह उसकी सेहत, कॉम्प्लीकेशंस शुरू होने से पहले का समय और उसके ब्लड ग्रुप, बॉडी साइज़ जैसे फैक्टर्स पर निर्भर करता है.




