वायु गुणवत्ता सूचकांक के उच्च स्तर को फेफड़ों की बीमारियों से जोड़ने वाला कोई पक्का आंकड़ा उपलब्ध नहीं: केंद्र

(फोटो साभार: यूट्यूब वीडियोग्रैब)

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केंद्र सरकार ने संसद को बताया है कि खराब वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) और फेफड़ों की बीमारियों के बीच सीधा संबंध साबित करने वाला कोई पक्का आंकड़ा उपलब्ध नहीं है.

बीते गुरुवार (18 दिसंबर) को राज्यसभा में एक लिखित जवाब में केंद्रीय पर्यावरण राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने माना कि वायु प्रदूषण सांस की बीमारियों और उनसे संबंधित अन्य बीमारियों बढ़ाने वाला कारक (Triggering Factor) है.

मीडिया में आई खबरों के अनुसार, कीर्ति वर्धन सिंह भाजपा सांसद लक्ष्मीकांत बाजपेयी के एक सवाल का जवाब दे रहे थे, जिन्होंने पूछा था कि क्या सरकार को पता है कि अध्ययन और मेडिकल टेस्ट से यह कन्फर्म हुआ है कि दिल्ली-एनसीआर में खतरनाक AQI स्तर के लंबे समय तक संपर्क में रहने से लंग फाइब्रोसिस हो रहा है, जिससे फेफड़ों की क्षमता में ऐसी कमी आ रही है, जिसे ठीक नहीं किया जा सकता.

फेफड़ों की बीमारियां

बाजपेयी ने यह भी जानना चाहा कि क्या दिल्ली-एनसीआर के नागरिकों में फेफड़ों की इलास्टिसिटी (लचीलापन) उन शहरों में रहने वाले लोगों की तुलना में लगभग 50 प्रतिशत तक कम हो गई है, जहां AQI लेवल अच्छा है.

भाजपा सांसद ने आगे पूछा कि क्या सरकार के पास ‘दिल्ली/एनसीआर के लाखों निवासियों को पल्मोनरी फाइब्रोसिस, COPD (क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज), एम्फीसेमा, फेफड़ों के काम में कमी और लगातार कम हो रही फेफड़ों की इलास्टिसिटी जैसी जानलेवा बीमारियों से बचाने के लिए कोई समाधान है’.

सरकार ने क्या कहा

अपने जवाब में केंद्रीय पर्यावरण राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने कहा कि प्रोग्राम मैनेजर्स, मेडिकल अधिकारी और नर्स, नोडल अधिकारी, सेंटिनल साइट्स (एक खास जगह जिसका इस्तेमाल लंबे समय तक गहन निगरानी और आंकड़ा इकट्ठा करने के लिए किया जाता है), फ्रंटलाइन वर्कर्स जैसे आशा, महिलाओं और बच्चों सहित कमजोर समूह, ट्रैफिक पुलिस और नगर निगम कर्मचारियों तथा काम के दौरान वायु प्रदूषण के सीधे संपर्क में आने वाले समूह के लिए वायु प्रदूषण को लेकर खास ट्रेनिंग मॉड्यूल बनाए गए हैं.

बीमारी से संबंधित सूचना सामग्री

उन्होंने कहा कि वायु प्रदूषण से जुड़ीं बीमारियों को लक्षित करने वाली सूचना, शिक्षा और संचार (IEC) सामग्री अंग्रेजी, हिंदी और क्षेत्रीय भाषाओं में बनाई गई हैं. सिंह ने कहा कि नेशनल प्रोग्राम ऑन क्लाइमेट चेंज एंड ह्यूमन हेल्थ (NPCCHH) ने भी अलग-अलग कमजोर समूहों के लिए कस्टमाइज्ड IEC सामग्री बनाई हैं.

उन्होंने आगे कहा कि वायु प्रदूषण के लिए शुरुआती चेतावनी तंत्र और अलर्ट, साथ ही हवा की गुणवत्ता के पूर्वानुमान भारत मौसम विज्ञान विभाग द्वारा राज्यों और शहरों को भेजे जाते हैं, ताकि स्वास्थ्य क्षेत्र और कमजोर आबादी सहित समुदायों को तैयारी करने में मदद मिल सके.

स्वच्छ हवा मिशन का हिस्सा

मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना का मकसद लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस के रूप में साफ खाना पकाने का ईंधन देकर महिलाओं और बच्चों की सेहत की रक्षा करना है. उन्होंने यह भी कहा कि सरकार का स्वच्छ भारत मिशन शहरों, कस्बों और गांवों में सड़कों और बुनियादी ढांचों को साफ करना चाहता है. साथ ही कहा कि ‘स्वच्छ हवा’ इस मिशन का एक ज़रूरी हिस्सा है.

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