महाराष्ट्र CM राहत कोष में जमा 106 करोड़ में से सिर्फ 75,000 रुपये बाढ़ प्रभावित किसानों को मिले: RTI

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और RTI से मिले जवाब की कॉपी. (फोटो साभार: फेसबुक/X)

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अक्टूबर 2025 में महाराष्ट्र मुख्यमंत्री राहत कोष में 1,06,57,96,331 रुपये (एक अरब से ज़्यादा) मिले. नागरिकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और नेताओं ने ये योगदान सितंबर 2025 में मराठवाड़ा बाढ़ से प्रभावित किसानों की मदद के लिए दिया था.

महाराष्ट्र के एक सामाजिक कार्यकर्ता वैभव कोकट द्वारा दायर एक सूचना के अधिकार (RTI) में पता चला है कि इसमें से सिर्फ 75,000 रुपये किसानों को दिए गए हैं.

मराठवाड़ा में आई थी बाढ़

इस साल सितंबर में महाराष्ट्र में भारी बारिश के कारण विनाशकारी बाढ़ आई, जिससे मराठवाड़ा के किसान तबाह और लाचार हो गए. विपक्ष और किसान संगठनों ने बाढ़ से प्रभावित लोगों के लिए कर्ज माफी की मांग की है, वहीं मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अब तक कोई घोषणा नहीं की है.

बीते 11 दिसंबर को समाचार वेबसाइट आउटलुक में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, सभी सामाजिक-आर्थिक वर्गों के नागरिकों ने महाराष्ट्र मुख्यमंत्री राहत कोष के लिए सरकार द्वारा शुरू किए गए विशेष दान अभियान में योगदान दिया.

वेतन कटाकर दिया योगदान

राज्य के सरकारी कर्मचारियों की एक दिन का वेतन कटाकर इस कोष में दान दिया. विधायकों ने अपनी एक महीने की तनख्वाह का योगदान दिया. मुख्यमंत्री ने एक आधिकारिक सर्कुलर के ज़रिये चीनी मिलों को निर्देश दिया था कि वे मुख्यमंत्री राहत कोष में प्रति टन गन्ने पर 10 रुपये का योगदान दें.

वैभव कोकट ने एक RTI दायर कर यह जानकारी मांगी कि अक्टूबर 2025 में राहत कोष में कितना पैसा आया और उस रकम में से असल में कितने पैसे परेशान किसानों को दिए गए.

लोगों के भरोसे को झटका

कोकट की RTI के जवाब में मुख्यमंत्री राहत कोष की अधिकारी मनीषा सावंत ने कहा, ‘बाढ़ प्रभावित किसानों की मदद के लिए मुख्यमंत्री राहत कोष में जो भी योगदान आता है, उसे मुख्यमंत्री के आदेश/निर्देश के अनुसार किसानों को बांटा जाता है. अक्टूबर 2025 में बाढ़ प्रभावित किसानों को 75,000 रुपये बांटे गए.’

कोकट ने X पर यह भी पोस्ट किया, ‘RTI के खुलासों से लोगों के भरोसे को गहरा झटका लगा है. जिन नागरिकों ने अच्छे इरादे से दान दिया, अपने खर्चों में कटौती की और पेंशन के पैसों से भी योगदान दिया, उन्हें तुरंत पारदर्शिता के साथ जवाब दिया जाना चाहिए. अगर सरकार यह नहीं बता सकती कि पैसा कहां गया, तो कोई भी दोबारा दान क्यों देगा और क्या अब इस संबंध में सरकार की ओर से दी गई कोई भी सफाई बाढ़ के बाद भी संघर्ष कर रहे किसानों के लिए सच में कोई फर्क लाएगी?’

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