Jobs in Informal Manufacturing Sector: के विशाल अनौपचारिक विनिर्माण क्षेत्र में पिछले लगभग एक दशक से रोज़गार का स्तर स्थिर बना हुआ है, जबकि औपचारिक विनिर्माण क्षेत्र में वृद्धि देखी गई है; यह इन दोनों क्षेत्रों की विकास यात्रा में एक स्पष्ट अंतर को दर्शाता है.
टाइम्स ऑफ इंडिया में हाल ही में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, पिछले महीने जारी किए गए नवीनतम ‘असंगठित उद्यम सर्वेक्षण’ के विश्लेषण से पता चला है कि 2025 में अनौपचारिक विनिर्माण क्षेत्र में 3.5 करोड़ लोगों को रोज़गार मिला था, जबकि 2015-16 में यह संख्या 3.6 करोड़ थी; वहीं उद्यमों की संख्या 2 करोड़ से बढ़कर 2.1 करोड़ हो गई.
संगठित क्षेत्र को फायदा
इसके विपरीत उद्योगों के नवीनतम वार्षिक सर्वेक्षण (ASI) – जो औपचारिक विनिर्माण क्षेत्र (Formal Manufacturing Sector) पर नज़र रखता है – के आंकड़ों से पता चला है कि 2023-24 में 2 करोड़ से कुछ कम लोगों को रोज़गार मिला था, जो 2015-16 की तुलना में 37% अधिक है. (ग्राफिक देखें)
ब्रिटेन के यूनिवर्सिटी ऑफ बाथ में विज़िटिंग प्रोफेसर संतोष मेहरोत्रा ने कहा कि पिछले कुछ सालों में संगठित क्षेत्र को असंगठित क्षेत्र की कीमत पर फायदा हुआ है, लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि इसका मतलब अर्थव्यवस्था का औपचारिकरण नहीं है.

उत्पादकता और विकास
उन्होंने आगे कहा, ‘इसके बजाय यह अर्थव्यवस्था में बढ़ते स्तरीकरण (Stratification of the Economy) को दिखाता है, जिसमें एक अपेक्षाकृत छोटा औपचारिक क्षेत्र उत्पादकता और विकास में तेज़ी देख रहा है और विशाल अनौपचारिक क्षेत्र – जो बड़ी आबादी का मुख्य आधार है – ठहराव का सामना कर रहा है.’
दोनों क्षेत्रों के बीच का अंतर श्रमिकों की कमाई में भी दिखाई देता है. 2015-16 से 2025 के बीच वास्तविक रूप में अनौपचारिक विनिर्माण उद्यमों में प्रति नियुक्त कर्मचारी को मिलने वाला पारिश्रमिक 2.1% की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) से बढ़कर 59,806 रुपये से 72,172 रुपये हो गया.
इसके विपरीत औपचारिक विनिर्माण क्षेत्र में कर्मचारियों को दिया जाने वाला कुल पारिश्रमिक, वास्तविक रूप में 2015-16 से 2023-24 के बीच 4.5% चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर से बढ़ा. वहीं, इस अवधि के दौरान औपचारिक विनिर्माण क्षेत्र में शुद्ध लाभ 4.4% चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर से बढ़ा.



