जम्मू कश्मीर में बेरोज़गारी दर 6.7% पर पहुंची, राष्ट्रीय औसत से दोगुना है आंकड़ा

जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला. (फोटो साभार: फेसबुक)

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Jammu Kashmir Unemployment Rate: जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रीय औसत के मुकाबले बेरोज़गार लोगों की संख्या लगभग दोगुनी है. राज्य सरकार ने विधानसभा में ये जानकारी दी है. बीते सोमवार (9 फरवरी) को नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायक मुबारक गुल के एक सवाल के जवाब में उमर अब्दुल्ला (Omar Abdullah) के नेतृत्व वाली सरकार ने जम्मू कश्मीर विधानसभा को बताया कि केंद्र शासित प्रदेश की कुल बेरोज़गारी दर 6.7 प्रतिशत है, ‘जो राष्ट्रीय औसत 3.5 प्रतिशत से काफी ज़्यादा है.’

सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (PLFS) का हवाला देते हुए विधानसभा में साझा किए गए आंकड़ों से पता चला कि साल 2019-20 में 15 साल और उससे ज़्यादा उम्र के लोगों में बेरोज़गारी दर 6.7 प्रतिशत थी.

बेरोजगारी दर में गिरावट

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, 2020-21 से इसमें गिरावट देखी गई. साल 2020-21 में बेरोजगारी दर 5.9 प्रतिशत, 2021-22 में 5.2 प्रतिशत और 2022-23 में 4.4 प्रतिशत, 2023-24 में 6.1 प्रतिशत और 2024-25 में 6.7 प्रतिशत थी. तुलना के तौर पर देखा जाए तो 2019-20 में राष्ट्रीय औसत 4.8 प्रतिशत था और तब से इसमें लगातार गिरावट देखा गया है.

आंकड़ों में यह भी कहा गया है कि जम्मू कश्मीर रोजगार विभाग ने पिछले साल जनवरी में Mission YUVA के तहत जिला प्रशासन के साथ मिलकर पूरे केंद्रशासित प्रदेश में एक बड़ा सर्वे किया था.

बेरोजगारी दूर करना प्राथमिकता

सरकार ने कहा कि बेरोज़गारी को दूर करना – खासकर युवाओं में – उसकी प्राथमिकता है और उसकी रणनीति सिर्फ़ शॉर्ट-टर्म नौकरियों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि उद्यमशीलता, कौशल विकास और ढांचागत सुधारों के ज़रिये टिकाऊ रोज़गार बनाने पर केंद्रित है ‘ताकि युवा नौकरी ढूंढने वाले न बनें, बल्कि नौकरी देने वाले बनें’.

इसमें कहा गया है, ‘इस संदर्भ में Mission YUVA बदलाव लाने वाली एक पहल के रूप में उभरा है, जिसमें पूरे केंद्रशासित प्रदेश के युवाओं का अभूतपूर्व उत्साह और भागीदारी देखी गई है.’

48.88 करोड़ रुपये कमाए

पुलवामा विधायक वहीद उर रहमान पारा के एक सवाल के जवाब में सामान्य प्रशासन विभाग ने कहा कि उसके भर्ती बोर्ड – जम्मू और कश्मीर लोक सेवा आयोग (JKPSC) और जम्मू कश्मीर सेवा चयन बोर्ड (JKSSB) – ने मिलकर 2023 और 2025 के बीच पूरे केंद्रशासित प्रदेश में अभ्यर्थियों से आवेदन फीस के तौर पर 48.88 करोड़ रुपये इकट्ठा किए हैं.

विभाग ने कहा कि इसमें से JKPSC ने 17.90 करोड़ रुपये और JKSSB ने 30.98 करोड़ रुपये कमाए हैं.

बेरोजगार युवाओं का शोषण

इसके बाद हुई बहस के दौरान पारा ने कहा कि यह सब ‘सरकार के स्पष्ट वादे के बावजूद हुआ है, जिसमें कहा गया था कि सभी आवेदन पत्र मुफ्त भरे जाएंगे’. उन्होंने आरोप लगाया कि बेरोजगार युवाओं से अत्यधिक शुल्क वसूलना न केवल सरकार की घोषित नीति का खंडन करता है, बल्कि ‘बेरोजगार युवाओं का स्पष्ट शोषण भी है, जो पहले से ही गंभीर आर्थिक संकट में हैं.’

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