सड़क पर नमाज़ से जाम लगने संबंधी फ़र्ज़ी ख़बर चलाने के कारण Zee News पर 1 लाख रुपये का जुर्माना

(प्रतीकात्मक फोटो साभार: फेसबुक)

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Zee News Fined Rs 1 Lakh: समाचार प्रसारण और डिजिटल मानक प्राधिकरण (NBDSA) ने सोशल मीडिया से ली गई सामग्री का इस्तेमाल करने वाले प्रसारकों और डिजिटल समाचार प्रकाशकों के लिए नए दिशानिर्देश जारी किए हैं, जिसमें कठोर सत्यापन और सटीकता की आवश्यकता पर जोर दिया गया है.

ये मानक बीते मंगलवार (17 फरवरी) को एक आदेश का हिस्सा हैं, जिसमें एक असत्यापित वायरल वीडियो (Unverified Viral Video) पर आधारित भ्रामक रिपोर्ट (Misleading Report) प्रसारित करने के लिए ज़ी न्यूज़ (Zee News) पर 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है.

NBDSA सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस एके सीकरी की अध्यक्षता वाली एक स्वतंत्र स्व-नियामक संस्था है. यह उन समाचार संगठनों के खिलाफ शिकायतों पर फैसला करती है, जो न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एंड डिजिटल एसोसिएशन (NBDA) के सदस्य हैं, जो निजी टीवी और डिजिटल समाचार और समसामयिक मामलों के प्रसारकों का संघ है.

सत्यापित किया जाना चाहिए

द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, नए दिशानिर्देशों में कहा गया है कि सोशल मीडिया से एकत्र की गई सभी जानकारी, तस्वीरों और वीडियो को प्रसारित करने से पहले सत्यापित किया जाना चाहिए. प्रसारकों को ऑन-ग्राउंड रिपोर्टिंग या अन्य विश्वसनीय स्रोतों, जैसे प्रत्यक्षदर्शी साक्ष्य और आधिकारिक सरकारी सोशल मीडिया एकाउंट के माध्यम से ऐसी सामग्री की पुष्टि करने की जरूरत होती है.

संपादित और छेड़छाड़ की गई मीडिया सामग्री को लेकर बढ़ती चिंता पर NBDSA ने कहा कि तस्वीरों और वीडियो की प्रामाणिकता को, जहां तक ​​​​संभव हो, जांचा जाना चाहिए. निर्देश के अनुसार, मीडिया सामग्री को संदर्भ से बाहर प्रस्तुत नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि प्रामाणिक दृश्य भी गलत तरीके से तैयार किए जाने पर ‘गलत सूचना का कारण बन सकते हैं.’

सटीकता की कसौटी

दिशानिर्देश यह भी निर्धारित करते हैं कि संवेदनशील मुद्दों – जैसे सैन्य अभियान, सांप्रदायिक हिंसा, सशस्त्र संघर्ष और सार्वजनिक अव्यवस्था – से संबंधित सोशल मीडिया सामग्री को ‘सार्वजनिक हित और सटीकता की कसौटी पर परखा जाना चाहिए’.

NBDSA ने यह भी चेतावनी दी है कि केवल एक अस्वीकरण जोड़ देने से कि सामग्री सोशल मीडिया पर वायरल है और असत्यापित है, NBDSA की आचार संहिता के तहत एक प्रसारक अपनी जिम्मेदारी से मुक्त नहीं हो जाता है.

NBDSA की आचार संहिता यह अनिवार्य करती है कि प्रसारक अपनी रिपोर्टिंग में निष्पक्षता, तटस्थता और सटीकता सुनिश्चित करें.

फर्जी निकला था वीडियो

ये निर्देश 3 मार्च 2025 को ज़ी न्यूज़ के प्रसारण के जवाब में जारी किए गए थे, जिसमें दावा किया गया था कि एक ट्रक चालक द्वारा राजमार्ग पर नमाज पढ़ने के कारण जम्मू कश्मीर हाईवे पर ट्रैफिक जाम होने के साथ भूस्खलन हुआ था.

बाद में समाचार चैनल ने स्वीकार किया कि वीडियो फर्जी था और इसे हटा दिया गया, जहां NBDSA ने वीडियो हटाए जाने को स्वीकार किया, वहीं, उसने सत्यापन में ‘स्पष्ट चूक’ और NBDSA के आचार संहिता में सटीकता सिद्धांत के उल्लंघन का हवाला देते हुए ज़ी न्यूज़ जुर्माना लगाया.

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