सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (CREA) द्वारा विश्लेषण किए गए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के अनुसार, पिछली सर्दियों के दौरान, 238 भारतीय शहरों में से 204 में औसत PM2.5 (एक मुख्य प्रदूषक) का स्तर भारतीय मानक 40 ग्राम/घन मीटर से अधिक दर्ज किया गया था.
फिनलैंड स्थित स्वतंत्र अनुसंधान समूह CREA के अनुसार, उत्तर प्रदेश का गाजियाबाद शहर सबसे प्रदूषित शहर था, जहां औसत PM2.5 सांद्रता 172 ग्राम/घन मीटर दर्ज की गई. इसके बाद नोएडा (166 ग्राम/घन मीटर) और दिल्ली (163 ग्राम/घन मीटर) रहे.
अन्य प्रदूषित शहर
विश्लेषण के अनुसार, ग्रेटर नोएडा चौथा सबसे प्रदूषित था. इसके बाद बहादुरगढ़ (हरियाणा), धारूहेड़ा (हरियाणा), गुरुग्राम, भिवाड़ी (राजस्थान), चरखी दादरी (हरियाणा) और बागपत (उत्तर प्रदेश) थे.
द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, शीर्ष 10 सबसे प्रदूषित शहरों में उत्तर प्रदेश और हरियाणा के चार-चार शहर शामिल हैं, साथ ही दिल्ली और राजस्थान के एक-एक शहर है.
सांस संबंधी बीमारियां
PM2.5 (पार्टिकुलेट मैटर 2.5) सांस लेने योग्य महीन प्रदूषण कण होते हैं, जो फेफड़ों और खून में प्रवेश कर सकते हैं और विभिन्न सांस संबंधी और अन्य बीमारियों को जन्म दे सकते हैं.
यह विश्लेषण 1 अक्टूबर 2025 और 28 फरवरी 2026 के बीच केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सतत परिवेश वायु गुणवत्ता निगरानी स्टेशनों (CAAQMS) के आंकड़ों पर आधारित है. विश्लेषण के अनुसार, कोई भी शहर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के 5 ग्राम/घन मीटर के PM2.5 मानक को पूरा नहीं करता है.
चामराजनगर सबसे साफ
CREA ने एक बयान में कहा, ‘भारत के बड़े शहरों में दिल्ली (163 ग्राम/घन मीटर), कोलकाता (78 ग्राम/घन मीटर), मुंबई (48 ग्राम/घन मीटर) और चेन्नई (44 ग्राम/घन मीटर) में शीतकालीन 2025-26 औसत PM2.5 सांद्रता राष्ट्रीय मानक से ऊपर दर्ज की गई. बेंगलुरु में औसत PM2.5 सांद्रता 39 ग्राम/घन मीटर दर्ज की गई, जो NAAQS (राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता मानक) सीमा से थोड़ा कम है.’
बीती सर्दियों के दौरान कर्नाटक का चामराजनगर भारत का सबसे स्वच्छ शहर था, जहां औसत PM2.5 सांद्रता 19 ग्राम/घन मीटर थी. विश्लेषण के अनुसार, 10 सबसे स्वच्छ शहरों में कर्नाटक के 8 शहर और मध्य प्रदेश और मेघालय का एक-एक शहर शामिल है.
राज्य स्तर पर हाल
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य स्तर पर हरियाणा में सबसे ज़्यादा शहर ऐसे थे, जहां सभी निगरानी की गईं जगहों पर PM2.5 मानक से ज्यादा था. आंध्र प्रदेश (9 शहर), पंजाब (8), पश्चिम बंगाल (7) और गुजरात (6) में भी सभी निगरानी किए गए शहरों में ज़्यादा प्रदूषण दर्ज किया गया.
राजस्थान (34 में से 33 शहर), महाराष्ट्र (31 में से 30 शहर), बिहार (24 में से 23 शहर), उत्तर प्रदेश (20 में से 17 शहर), ओडिशा (14 में से 13 शहर) और मध्य प्रदेश (13 में से 11 शहर) में भी प्रदूषण राष्ट्रीय मानक से कहीं ज़्यादा दर्ज किया गया.




