पिछले 5 वर्षों में हर दिन विदेश में 20 से अधिक भारतीय श्रमिकों की मौत हुई, अधिकांश खाड़ी देशों में मारे गए

(प्रतीकात्मक फोटो साभार: Pixabay)

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Indian Workers Death in Abroad: विदेशों में भारतीय मज़दूरों की हालत के बारे में परेशान करने वाले आंकड़े बताते हैं कि पिछले पांच सालों में हर दिन 20 से ज़्यादा लोगों की मौत विदेशी धरती पर हुई है और इनमें से ज़्यादातर मौतें खाड़ी देशों में हुई हैं.

विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह द्वारा 29 जनवरी को राज्यसभा में दिए गए एक लिखित जवाब के अनुसार, 2021 से 2025 के बीच विदेशों में मरने वाले भारतीय मज़दूरों की कुल संख्या 37,740 तक पहुंच गई. हालांकि इन मौतों के कारणों का ब्योरा नहीं दिया गया था.

UAE में हुईं सबसे अधिक मौतें

आंकड़ों से पता चला कि सबसे ज़्यादा मौतें साल 2021 में हुईं, जब 8,234 भारतीय कामगारों ने विदेशों में अपनी जान गंवाई. 2022 में मौतों की संख्या घटकर 6,614 होने के बाद हर साल यह संख्या लगातार बढ़ती गई. जैसे साल 2023 में 7,291, 2024 में 7,747 और 2025 में 7,854 तक पहुंच गई.

समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, इन मौतों में से 86% से ज़्यादा मौतें खाड़ी देशों में हुईं. संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और सऊदी अरब में सबसे ज़्यादा मौतें दर्ज की गईं; पांच साल की इस अवधि में यहां क्रमशः 12,380 और 11,757 मौतें हुईं. इसके बाद कुवैत (3,890), ओमान (2,821), मलेशिया (1,915) और कतर (1,760) का नंबर आता है.

भारतीय नागरिकों का शोषण और दुर्व्यवहार

इस दौरान विदेशों में मौजूद भारतीय दूतावासों को भारतीय नागरिकों से दुर्व्यवहार, शोषण और काम की जगह से जुड़ी शिकायतों के 80,985 मामले मिले.

इन शिकायतों में सबसे ज़्यादा मामले UAE से आए; 2021 से 2025 के बीच यहां 16,965 शिकायतें दर्ज की गईं. इसके बाद कुवैत (15,234), ओमान (13,295) और सऊदी अरब (12,988) का नंबर आता है.

हर दिन 10 भारतीयों की मौत

2018 की एक PTI रिपोर्ट, जो कॉमनवेल्थ ह्यूमन राइट्स इनिशिएटिव (CHRI) द्वारा उजागर किए गए सूचना का अधिकार (RTI) के जवाबों और संसदीय रिकॉर्डों के विश्लेषण पर आधारित थी, ने यह दिखाया कि 2012 से 2018 के मध्य तक खाड़ी क्षेत्र में लगभग हर दिन 10 भारतीय श्रमिकों की मौत हुई.

CHRI के विश्लेषण में बताया गया है कि उस 6.5 साल की अवधि के दौरान 6 खाड़ी देशों – बहरीन, ओमान, कतर, कुवैत, सऊदी अरब और UAE – में कम से कम 24,570 भारतीय कामगारों की मौत हुई.


32,608 भारतीय कामगारों की मौत

इसकी तुलना में सरकार के ताज़ा आंकड़ों से पता चलता है कि 2021 और 2025 के बीच खाड़ी देशों में (बहरीन को छोड़कर, जिसके आंकड़े जवाब में नहीं दिए गए थे) 32,608 भारतीय कामगारों की मौत हुई. इसका मतलब है कि पिछले पांच सालों में अकेले खाड़ी क्षेत्र में हर दिन औसतन लगभग 18 कामगारों की मौत हुई.

खाड़ी क्षेत्र के बाहर, मलेशिया और मालदीव में भी मज़दूरों से जुड़ी काफी समस्याएं सामने आईं; यहां क्रमश: 8,333 और 2,981 शिकायतें दर्ज की गईं.

वहीं दूसरी ओर, दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों से भी बड़ी संख्या में शिकायतें मिलीं, भले ही वहां हताहतों की संख्या कम रही हो; 2024 और 2025 में इन शिकायतों में अचानक तेज़ी देखने को मिली.


म्यांमार से आने वाली शिकायतों में बढ़ोतरी

म्यांमार में पिछले पांच सालों में कामगारों की मौत का कोई मामला सामने नहीं आया, लेकिन 2,548 शिकायतें दर्ज की गईं; इनमें से अकेले 2025 में ही शिकायतों की संख्या में भारी बढ़ोतरी हुई और यह आंकड़ा 1,863 तक पहुंच गया.

कंबोडिया में 2,531 शिकायतों के मुकाबले 31 मौतें दर्ज की गईं, जबकि लाओस में 11 मौतें और 2,416 शिकायतें सामने आईं.

पिछले पांच सालों में मज़दूरों से जुड़ी समस्याओं की रिपोर्टों में लगातार बढ़ोतरी हुई है. 2025 में ये शिकायतें अपने चरम पर पहुंच गईं और इनकी संख्या 22,479 हो गई; यह आंकड़ा 2024 की 16,263 शिकायतों से ज़्यादा है और 2021 में दर्ज की गई 11,632 शिकायतों का लगभग दोगुना है.

पासपोर्ट बिना अनुमति रख लेना

मंत्रालय के जवाब के अनुसार, विदेशों में भारतीय मज़दूरों को जिन सबसे आम मुश्किलों का सामना करना पड़ता है, उनमें वेतन और सेवा-समाप्ति लाभों के भुगतान में देरी या भुगतान न होना शामिल है.

अन्य आम शिकायतों में मालिकों द्वारा पासपोर्ट को बिना अनुमति अपने पास रख लेना, छुट्टी न देना, बिना ओवरटाइम भुगतान के लंबे समय तक काम करवाना और कंपनियों के अचानक बंद हो जाने के कारण बेरोज़गारी शामिल हैं.

मंत्रालय ने दुर्व्यवहार, मज़दूरों के वैध अधिकारों से वंचित किए जाने और मालिकों द्वारा Exit Visas (बाहर निकलने का वीज़ा) देने से इनकार करने के मामलों का भी ज़िक्र किया है; यह वीज़ा मज़दूरों को अनुबंध पूरा होने पर भारत लौटने की अनुमति देता है.

सरकार की प्राथमिकता

इस समस्या को हल करने के लिए उठाए गए कदमों के बारे में विस्तार से बताते हुए विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने कहा कि विदेशों में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और भलाई हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है.

मंत्री ने कहा कि किसी भारतीय नागरिक के संकट में होने की जानकारी मिलते ही, हमारे मिशन और पोस्ट तुरंत संबंधित देश के विदेश मंत्रालय, श्रम विभाग और कानून प्रवर्तन एजेंसियों से संपर्क करते हैं. कांसुलर सहायता और कानूनी मदद देने के अलावा भारत सरकार ने भारतीय श्रमिकों के विशेष हितों की रक्षा के लिए कई देशों के साथ श्रम और जनशक्ति सहयोग पर व्यापक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं.

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