केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने एक बार फिर यह बयान देकर भाजपा नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को अजीब स्थिति में डाल दिया है कि सभी सांसद और विधायक अपने निर्वाचन क्षेत्र की विकास निधि से कमीशन लेते हैं.
हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (सेक्युलर) के नेता मांझी ने आगे दावा किया कि उन्होंने कई बार पार्टी को अपना कमीशन दिया है और पार्टी नेताओं को उस पैसे का इस्तेमाल कार खरीदने के लिए करने की सलाह दी है. मांझी ने बीते 21 दिसंबर को पार्टी के एक कार्यक्रम में यह टिप्पणी की.
द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने विधायकों से कहा कि अगर उन्हें 10 फीसदी कमीशन नहीं मिल पा रहा है तो कम से कम 5 फीसदी तो लेना ही चाहिए. उन्होंने आगे कहा, ‘हर सांसद और विधायक कमीशन लेता है’ और ‘एक रुपये में से लिया गया 10 पैसा भी’ एक महत्वपूर्ण राशि है.
कमीशन का पैसा पार्टी को दिया
गया लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले मांझी ने कहा, ‘मैंने व्यक्तिगत रूप से अपने कमीशन का पैसा कई बार पार्टी फंड में दिया है. एक सांसद को 5 करोड़ रुपये मिलते हैं और अगर उसे 10% कमीशन मिलता है, तो यह 40 लाख रुपये होगा.’
उन्होंने अपने बेटे और पार्टी अध्यक्ष संतोष कुमार सुमन, जो राज्य में कैबिनेट मंत्री हैं, से भी कमीशन लेने के लिए कहा, क्योंकि यह ‘कोई रहस्य नहीं और सभी ने ऐसा किया है’. अपने बेटे की ओर देखकर मांझी ने कहा, ‘अगर ये लोग (पार्टी नेता) ऐसा करने में असमर्थ हैं, तो यह पार्टी अध्यक्ष की गलती है.’
भाजपा ने गलती की
उन्होंने घोषणा की कि अगले विधानसभा चुनाव में हम (एस) को 100 सीटों पर चुनाव लड़ना चाहिए और अगर मांगें पूरी नहीं हुईं तो पार्टी अकेले चुनाव लड़ेगी. मांझी ने अपने बेटे से लक्ष्य हासिल करने के लिए एक कार्य योजना तैयार करने को कहा. उन्होंने कहा कि उनकी जाति के लोग इसका समर्थन करेंगे, हालांकि हम (एस) को कुछ और जातियों के समर्थन की जरूरत होगी.
उन्होंने यह भी कहा कि एनडीए सहयोगी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने उन्हें कम आंककर गलती की है.
मांझी ने कहा, ‘पूर्णिया, मगध और मुंगेर प्रमंडल में हम कोई साधारण पार्टी नहीं हैं. पश्चिम चंपारण में भी हमारे समर्थक हैं. हमारी पार्टी हर जगह मजबूत है, लेकिन भाजपा ने हमें हर चुनाव में कमतर आंका है. अब तक जो हुआ वह ठीक है. अगर अगले चुनाव में हमें महत्व नहीं दिया गया तो हम अपनी राह अपना लेंगे.’
तो गठबंधन से बाहर चले जाएंगे
कुछ दिन पहले मांझी के भाषण का एक कथित वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसमें उन्हें यह कहते हुए सुना गया था कि 2020 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने गया के तत्कालीन जिला मजिस्ट्रेट के समर्थन से अपने टिकारी उम्मीदवार, जो 2,700 वोटों से पीछे चल रहे थे, को जीतने में मदद की थी.
उनकी इस टिप्पणी से भी हलचल मच गई थी कि अगर राज्यसभा सीट की उनकी मांग पूरी नहीं हुई तो वह गठबंधन से बाहर चले जाएंगे.
एनडीए में सबकुछ ठीक नहीं
उन्होंने कहा था, ‘मैंने समाचारों में देखा है कि जदयू को दो राज्यसभा सीटें दी जा रही हैं, भाजपा को दो और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) को एक. हमारी पार्टी कहां खड़ी है? 2024 के चुनाव में हमसे दो लोकसभा सीट और एक राज्यसभा सीट का वादा किया गया था. उस समय हमें एक लोकसभा सीट दी गई थी, जिसे मैंने जीता था और मुझे मंत्री बनाने के लिए मैं प्रधानमंत्री को धन्यवाद देता हूं, लेकिन हम अभी भी राज्यसभा सीट का इंतजार कर रहे हैं.’
मंत्री और भाजपा नेता दिलीप कुमार जायसवाल ने रविवार को मांझी की टिप्पणी को उनकी ‘व्यक्तिगत राय’ करार दिया. विपक्षी राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव ने कहा कि विधानसभा चुनाव में 202 सीटें जीतने के बाद भी एनडीए में सब कुछ ठीक नहीं है.




