Banke Bihari Temple, Vrindavan: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (15 दिसंबर) को उस प्रथा पर सवाल उठाया, जिसमें कुछ मंदिर प्रशासक रीति-रिवाजों का उल्लंघन करते हुए अमीर और प्रभावशाली लोगों को देवता के आराम के समय निजी पूजा करने की गैर-कानूनी इजाजत देते हैं.
भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत ने तीन न्यायाधीशों की पीठ की अध्यक्षता करते हुए उत्तर प्रदेश के वृंदावन स्थित बांके बिहारी मंदिर से जुड़ी एक याचिका की सुनवाई के दौरान यह चिंता जताई.
सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के वृंदावन में बांके बिहारी मंदिर में दर्शन के समय और दूसरी धार्मिक प्रथाओं में बदलाव को लेकर दायर एक याचिका पर नोटिस जारी किया.
मंदिर प्रबंधन समिति
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश श्री बांके बिहारी जी मंदिर ट्रस्ट अध्यादेश 2025 पर रोक लगाते हुए, जिसके तहत मंदिर का प्रशासन एक ट्रस्ट के हवाले किया गया था, पूर्व इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज जस्टिस अशोक कुमार की अध्यक्षता में 14 सदस्यों की एक मंदिर प्रबंधन समिति भी बनाई थी.
इस समिति का काम तब तक मंदिर के अंदर और बाहर रोज़ाना के कामकाज की देखरेख और निगरानी करना था, जब तक हाईकोर्ट अध्यादेश की संवैधानिक वैधता पर कोई फैसला नहीं ले लेता.
जनवरी 2026 में होगी सुनवाई
कुछ मंदिर सेवकों द्वारा दायर नई याचिका में दर्शन के समय में बाद में किए गए बदलाव और मंदिर में कुछ पूजाओं को रोकने पर सवाल उठाए गए हैं. सीजेआई की अध्यक्षता वाली जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की पीठ ने प्रशासनिक समिति को नोटिस जारी किया और याचिका पर सुनवाई के लिए जनवरी 2026 के पहले हफ्ते की तारीख तय की है.
याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश हुए सीनियर एडवोकेट श्याम दीवान ने दर्शन के लिए तय समय के महत्व पर ज़ोर दिया. उन्होंने कहा, ‘दर्शन का समय परंपरा और रीति-रिवाजों का हिस्सा है. जिस समय मंदिर आम लोगों के लिए खुला रहता है, वह एक लंबी परंपरा का हिस्सा है.’
सुप्रीम कोर्ट की तल्ख़ टिप्पणी
दीवान ने कहा कि समय में बदलाव से ‘मंदिर के अंदर के रीति-रिवाजों में बदलाव आया है, जिसमें सुबह देवता के जागने और रात को सोने का समय भी शामिल है’.
इसके बाद CJI ने टिप्पणी की, ‘वे लोग क्या करते हैं, दोपहर 12 बजे मंदिर बंद करने के बाद… वे देवता को एक पल के लिए भी आराम नहीं करने देते… वे देवता का बहुत ज़्यादा शोषण करते हैं. तथाकथित अमीर लोग, जो मोटी रकम दे सकते हैं, उन्हें विशेष पूजा करने की इजाजत दी जाती है.’
इस पर वरिष्ठ वकील दीवान ने कहा कि ‘ऐसा नहीं है’. उन्होंने कहा कि कोर्ट को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि ऐसी प्रथाओं को खत्म किया जाए.
प्रथाओं पर प्रतिबंध लगाया जाए
उन्होंने कहा, ‘सुप्रीम कोर्ट यह पक्का कर सकता हैं कि ऐसी प्रथाओं को प्रतिबंधित किया जाए. यह देवता के लिए आराम का बहुत ज़रूरी समय है. यह ज़रूरी है. अदालत एक बहुत ही ज़रूरी बात उठा रहा है. समय पवित्र है और उन्हें बनाए रखा जाना चाहिए.’
हालांकि, CJI ने दोहराया, ‘यह वह समय है जब वे इस तरह की सभी तरह की हरकतें करते हैं, वे ऐसे लोगों को बुलाते हैं, जो पैसे दे सकते हैं और खास पूजाएं की जाती हैं.’
दीवान ने कहा कि बांके बिहारी मंदिर में ऐसी बातों की किसी ने शिकायत नहीं की है, ‘लेकिन आशंका… सही है और इसे अलग से देखा जा सकता है.’




