India-US Trade Deal: भारतीय किसान यूनियन (BKU) ने भारत-अमेरिका द्विपक्षीय समझौते के खिलाफ सभी गांवों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पुतले जलाने सहित कई विरोध प्रदर्शनों की घोषणा की है.
BKU नेता राकेश टिकैत ने बीते मंगलवार (10 फरवरी) को नई दिल्ली में संवाददाताओं से कहा कि केंद्र सरकार ने किसानों का विश्वास खो दिया है और अमेरिका (America) और यूरोपीय संघ (European Union) के साथ व्यापार समझौतों का किसानों पर दूरगामी प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा.
टिकैत ने कहा कि बीज विधेयक और बिजली (संशोधन) विधेयक जैसी हालिया नीतिगत घोषणाओं की एक श्रृंखला किसानों के खिलाफ लक्षित थी. किसान 12 फरवरी को केंद्रीय ट्रेड यूनियनों द्वारा बुलाई गई आम हड़ताल में श्रमिकों का समर्थन करेंगे.
समझौते से पीछे हटे भारत
टिकैत ने कहा कि अमेरिका और यूरोपीय संघ के साथ व्यापार समझौतों के वास्तविक दस्तावेज अभी भी सार्वजनिक नहीं किए गए हैं. उनका विवरण ‘गोपनीयता के पर्दे’ के पीछे छिपा हुआ है. उन्होंने मांग की कि भारत को अमेरिका और यूरोपीय संघ के साथ समझौतों से पूरी तरह हट जाना चाहिए, या कम से कम कृषि संबंधी सभी प्रावधानों को हटा देना चाहिए.
उन्होंने कहा, ‘यूरोपीय संघ और अमेरिका अपने किसानों को बड़े पैमाने पर सब्सिडी प्रदान करते हैं और उनके पास भारी कृषि अधिशेष है, जिसे उन्होंने लगातार भारत जैसे देशों में डंप करने का प्रयास किया है. दुर्भाग्य से भारत सरकार ने किसान संगठनों के साथ परामर्श किए बिना और कृषि और किसानों की आजीविका पर उनके प्रभाव का आकलन किए बिना इन समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं.’
पशु आहार
राकेश टिकैट (Rakesh Tikait) ने आगे कहा कि बातचीत से संबंधित दस्तावेज़ों का खुलासा न करना यह दर्शाता है कि सरकार राष्ट्रव्यापी किसान विरोध को रोकने के लिए इन समझौतों का विवरण छिपाना चाहती है.
टिकैत ने कहा कि पशु आहार के रूप में उपयोग किए जाने वाले जैव ईंधन उत्पादन के उप-उत्पाद डीडीजीएस (DDGs) के आयात से भारत में पशु आहार और चारे के लिए उपयोग की जाने वाली फसलों जैसे मक्का, ज्वार और सोयाबीन की घरेलू कीमतें गंभीर रूप से कम हो जाएंगी.
क्या है डीडीजीएस
डीडीजीएस (Dried Distillers Grains with Solubles) एक उच्च-प्रोटीन, ऊर्जा-समृद्ध और लागत प्रभावी पशुधन घटक है, जो मुख्य रूप से मकई से इथेनॉल उत्पादन के दौरान प्राप्त होता है. इसमें किण्वित अनाज के अवशेष होते हैं, जिन्हें दीर्घकालिक भंडारण और परिवहन के लिए लगभग 10-12% नमी तक सुखाया जाता है. डीडीजीएस का व्यापक रूप से मवेशियों, मुर्गी पालन और जलीय कृषि के लिए उपयोग किया जाता है, जो उनके पारंपरिक भोजन के लिए एक पौष्टिक विकल्प प्रदान करता है.
गंभीर संकट का सामना
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान टिकैट ने आगे कहा, ‘अमेरिका से सोयाबीन तेल के आयात से सोयाबीन की फार्म-गेट कीमतों पर विनाशकारी प्रभाव पड़ेगा, जो पहले से ही 5,328 रुपये के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से काफी नीचे हैं. मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, तेलंगाना और राजस्थान में सोयाबीन किसान पहले से ही गंभीर मूल्य संकट का सामना कर रहे हैं और यह समझौता उनकी स्थिति को और खराब कर देगा.’
Bhartiya Kisan Union नेता ने बीज विधेयक के मसौदे को बेहद विनाशकारी बताया. उन्होंने कहा, ‘यह बीज की कीमतें बढ़ाता है, कॉरपोरेट नियंत्रण और शोषणकारी मूल्य निर्धारण को मजबूत करता है और पौधों की विविधता और किसान अधिकार संरक्षण अधिनियम, 2001 के तहत किसानों को दी गई वैधानिक सुरक्षा को कमजोर करता है.’
निजीकरण का मार्ग प्रशस्त
कीटनाशक प्रबंधन विधेयक पर उन्होंने कहा कि यह किसानों के बजाय कीटनाशक उद्योग के हितों की रक्षा करता है. उन्होंने कहा, ‘यह राज्यों को पर्याप्त विनियामक या निषेधात्मक शक्तियां प्रदान नहीं करता है, न ही यह मूल्य नियंत्रण, प्रभावी शिकायत निवारण या जवाबदेही तंत्र प्रदान करता है.’
बिजली (संशोधन) विधेयक के मसौदे पर टिकैत ने कहा कि प्रस्तावित कानून ने बिजली क्षेत्र के निजीकरण और व्यावसायीकरण का मार्ग प्रशस्त किया है, जिससे राज्य केवल औपचारिक संस्थाएं बनकर रह गए हैं.




