AIIMS Study on Heart Diseases: ऑल इंडिया इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (AIIMS) के एक नए अध्ययन में पाया गया है कि 45 साल से कम उम्र के वयस्कों में अचानक होने वाली मौतों का मुख्य कारण दिल की बीमारी है. अध्ययन में इनका कोविड-19 वैक्सीन से कोई संबंध नहीं मिला है.
इंडियन जर्नल ऑफ मेडिकल रिसर्च में प्रकाशित ये नतीजे ऐसे समय आए हैं, जब युवा, जो देखने में स्वस्थ लगते हैं, उनमें बिना किसी वजह के होने वाली मौतों को लेकर लोगों में चिंता बनी हुई है.
ऑटोप्सी-आधारित विश्लेषण
यह शोध भारत में युवा वयस्कों में अचानक होने वाली मौतों का सबसे विस्तृत ऑटोप्सी-आधारित विश्लेषण पेश करती है.
बिजनेस स्टैंडर्ड में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, ‘युवा वयस्कों में अचानक मौत का बोझ: भारत में एक टर्शियरी केयर सेंटर में एक साल की ऑब्ज़र्वेशनल स्टडी’ नाम के इस शोध में मई 2023 से अप्रैल 2024 तक एक साल की अवधि में एम्स में पोस्टमॉर्टम जांच के लिए लाए गए 18 से 45 साल के वयस्कों में अचानक और अप्रत्याशित मौतों का विश्लेषण किया गया है.
आंकड़ों से क्या पता चला
कार्डियोवैस्कुलर कारण: 42.6 प्रतिशत अचानक होने वाली मौतें दिल से जुड़ी बीमारियों, जैसे कोरोनरी आर्टरी डिजीज और एरिथमिया की वजह से हुईं.
सांस से जुड़े कारण: 21.3 प्रतिशत अचानक होने वाली मौतें फेफड़ों की गंभीर समस्याओं से जुड़ी थीं.
अचानक बिना वजह मौतें: 21.3 प्रतिशत मामलों में विस्तृत ऑटोप्सी के बाद भी मौत की कोई वजह पता नहीं चली.
अन्य कारण: बाकी मामलों में गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल, सेंट्रल नर्वस सिस्टम और जेनिटोरिनरी बीमारियां शामिल थीं.
शोध में क्या पता चला
शोध के नतीजों के अनुसार, 18 से 45 साल की उम्र के लोगों में अचानक होने वाली मौतों में सबसे बड़ा हिस्सा कार्डियोवैस्कुलर बीमारियों का था. इस समूह में हार्ट अटैक सबसे बड़ा कारण बनकर सामने आया, जो दिल से जुड़ीं सभी मौतों में से लगभग 85 प्रतिशत के लिए ज़िम्मेदार था.
दिल की बनावट में गड़बड़ी और जन्मजात बीमारियों के कारण लगभग 5 प्रतिशत मौतें हुईं, जबकि दिल में सूजन के कारण भी 5 प्रतिशत मौतें हुईं.
मौत के कारणों की पहचान
रिपोर्ट के अनुसार, शोधकर्ताओं ने बताया कि इनमें से कई मौतों को गलती से ‘अज्ञात’ मान लिया गया था, क्योंकि ये लोग बाहर से स्वस्थ दिखते थे और उन्हें पहले से कोई दिल की बीमारी नहीं थी.
शोधकर्ताओं ने मौत के अंतर्निहित कारणों की पहचान करने और कोविड-19 वैक्सीनेशन के साथ किसी भी संभावित संबंध का आकलन करने के लिए मेडिकल हिस्ट्री, वैक्सीनेशन की स्थिति, क्लीनिकल निष्कर्ष और ऑटोप्सी के नतीजों की समीक्षा की.
सांस से जुड़ी बीमारियां
21.3 प्रतिशत मौतों का कारण सांस से जुड़ीं बीमारियां पाई गईं. इनमें, उल्टी, खाना या दूसरे लिक्विड से दम घुटना सबसे बड़ा कारण था, जो सांस से जुड़ीं मौतों में से लगभग आधे मामलों के लिए ज़िम्मेदार था. निमोनिया लगभग 30 प्रतिशत मौतों के लिए ज़िम्मेदार था, जबकि ट्यूबरकुलोसिस बाकी 20 प्रतिशत मौतों का कारण था.
कोरोनरी आर्टरी डिजीज
यह पैटर्न 46 से 65 साल के बड़े लोगों में और भी ज़्यादा साफ था, जहां कोरोनरी आर्टरी डिजीज (CAD) अचानक मौत का सबसे आम कारण बनकर सामने आया, जो इस आयु वर्ग में 72.1 प्रतिशत मौतों के लिए ज़िम्मेदार था.
अचानक बिना किसी वजह के होने वाली मौतें 14.1 प्रतिशत थीं, जबकि पेट की बीमारियों के कारण 7.4 प्रतिशत मौतें हुईं. फेफड़ों से जुड़ीं बीमारियों का हिस्सा कम था, जो 4.4 प्रतिशत था.
मौतों का कोविड-19 वैक्सीन से संबंध नहीं
रिपोर्ट के अनुसार, सबसे ज़रूरी बात यह है कि अध्ययन में कोविड-19 वैक्सीनेशन और युवा वयस्कों में अचानक होने वाली मौतों के बीच कोई वैज्ञानिक सबूत नहीं मिला.
हालांकि अध्ययन में शामिल कई लोगों को कोविड-19 वैक्सीन की एक या ज़्यादा डोज़ लगी थीं, लेकिन शोधकर्ताओं ने वैक्सीनेशन की स्थिति और मौत के कारण के बीच कोई संबंध नहीं पाया.
एम्स में पैथोलॉजी के प्रोफेसर डॉ. सुधीर अरावा ने इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में कहा, हमने एक साल में युवाओं में अचानक हुईं लगभग 100 मौतों का अध्ययन किया. हमने पाया कि इन मौतों और कोविड-19 वैक्सीनेशन के बीच कोई संबंध नहीं है. हमें वैक्सीन से जुड़ी जटिलताओं का भी कोई खास सबूत नहीं मिला – मायोकार्डिटिस या दिल की मांसपेशियों में सूजन का सिर्फ एक मामला था.
युवाओं में रिस्क फैक्टर
शोधकर्ताओं ने इस बात पर ज़ोर दिया कि ये नतीजे कोविड-19 वैक्सीन की स्थापित सुरक्षा प्रोफाइल का समर्थन करते हैं और सोशल मीडिया पर फैल रहे बिना वेरिफाई किए गए दावों का मुकाबला करने में मदद करेंगे.
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यह अध्ययन शुरुआती कार्डियक स्क्रीनिंग की बढ़ती ज़रूरत को दिखाती है, यहां तक कि युवा वयस्कों में भी, खासकर उनमें जिनमें मोटापे, धूम्रपान, सुस्त जीवनशैली या दिल की बीमारी की फैमिली हिस्ट्री जैसे रिस्क फैक्टर हैं. साथ ही ये नतीजे इस बात का भरोसा दिलाते हैं कि कोविड-19 वैक्सीन अचानक होने वाली मौतों के लिए ज़िम्मेदार नहीं हैं.




