गोरखपुर: मोतियाबिंद के ऑपरेशन के बाद 14 लोगों की आंख की रोशनी गई, जांच के बाद अस्पताल सील

(प्रतीकात्मक फोटो साभार: Pixabay)

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उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में मोतियाबिंद के ऑपरेशन (Cataract Surgeries) के बाद 14 लोगों की आंख की रोशनी चली जाने का मामला सामने आया है. घटना जिले के सिकरीगंज के जद्दूपट्टी स्थित न्यू राजेश हाईटेक हॉस्पिटल (New Rajesh Hitech Hospital, Sikriganj) की है.

इस अस्पताल में बीते 1 फरवरी को मोतियाबिंद के ऑपरेशन के बाद लगभग 22 लोगों की आंखों में संक्रमण फैल गया था. पुलिस का कहना है कि अब तक इस संबंध में किसी भी मरीज ने कोई शिकायत नहीं की है, शिकायत मिलती है तो एफआईआर दर्ज कराई जाएगी.

लाइसेंस निरस्त किया जाएगा

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, ऑपरेशन के दौरान संक्रमण और लापरवाही का मामला सामने आने पर अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) सहदेव मिश्र ने जिलाधिकारी (DM) को रिपोर्ट भेजकर अस्पताल का लाइसेंस निरस्त करने की संस्तुति की है. DM दीपक मीणा ने कहा है कि अस्पताल का लाइसेंस निरस्त किया जाएगा.

बीते 12 फरवरी को DM ने इस मामले में अपर जिलाधिकारी सहदेव मिश्र की अध्यक्षता में मजिस्ट्रियल जांच कमेटी बनाई थी. कमेटी ने जांच पूरी कर बीते 19 फरवरी को रिपोर्ट DM को सौंप दी थी. रिपोर्ट में ऑपरेशन में इस्तेमाल होने वाली मशीन के बटन में स्ट्रेप्टोकोकस बैक्टीरिया मिलने की बात सामने आई.

दिल्ली-लखनऊ में हो रहा इलाज

समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि मोतियाबिंद के ऑपरेशन के 24 घंटे के अंदर कई मरीज़ों ने ऑपरेशन वाली आंख से तेज़ दर्द और आंख से कोई द्रव निकलने की शिकायत करना शुरू कर दिया. इसके बाद कम से कम 18 लोगों को संक्रमण हो गया और उनकी हालत बिगड़ने पर उन्हें दिल्ली, लखनऊ और वाराणसी के अस्पतालों में रिफर कर दिया गया.

DM दीपक मीणा ने कहा कि अस्पताल को सील कर दिया गया है और मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दे दिए गए हैं. उन्होंने कहा, ‘अगर कोई दोषी पाया जाता है, तो उसका रजिस्ट्रेशन कैंसिल कर दिया जाएगा.’

गंभीर चूक

मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. राजेश झा ने इसे ‘गंभीर चूक’ बताया और कहा कि जांच रिपोर्ट के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी.

कई ऑपरेशन आयुष्मान भारत योजना के तहत किए गए थे. मरीज़ों ने आरोप लगाया कि ऑपरेशन के कुछ ही घंटों बाद उन्हें छुट्टी दे दी गई और अगले दिन उन्हें दिक्कतें होने लगीं. सबसे ज़्यादा प्रभावित मरीज़ों का इलाज AIIMS दिल्ली और वाराणसी और लखनऊ के अस्पतालों में चल रहा है.

अधिकारियों ने बताया कि कई मामलों में संक्रमण को और फैलने से रोकने के लिए डॉक्टरों को प्रभावित आंख निकालनी पड़ी.

मरीजों ने क्या कहा

परदेशी नाम के एक मरीज़ ने कहा कि 17 फरवरी को AIIMS दिल्ली के डॉक्टरों ने उन्हें बताया कि ऑपरेशन वाली आंख की रोशनी चली गई है. गोरखपुर जिले के गोला बाज़ार के सहवान अली ने कहा कि सर्जरी के एक दिन बाद उनकी हालत और खराब हो गई.

उन्होंने कहा, ‘अगले दिन आंख से खून बहने लगा. हमें तुरंत दिल्ली ले जाया गया. डॉक्टरों ने एक आंख निकाल दी. अब मैं देख नहीं सकती.’

शंकरवती, जिनकी आंख वाराणसी के एक हॉस्पिटल में निकाल दी गई थी, ने कहा कि अब उन्हें दूसरी आंख की रोशनी जाने का डर है.

उन्होंने कहा, ‘मुझे अभी भी दर्द है और धुंधला दिखाई देता है. मुझे डर है कि संक्रमण फैल सकता है.’ वहीं, उनके बेटे ने चेतावनी दी कि अगर उनकी बाकी आंख पर भी असर पड़ा तो कानूनी कार्रवाई की जाएगी.

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