केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन ने भारत के 90% Cough Syrup बनाने वालों की जांच में कमियां पाईं: औषधि महानियंत्रक

(प्रतीकात्मक फोटो साभार: Pixabay)

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केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने देश के लगभग 90% कफ सिरप बनाने वालों की जांच करने के बाद नियमों में कमियां पाई हैं. इसके प्रमुख ने बीते सोमवार (23 फरवरी) को यह जानकारी दी. यह जानकारी देश और विदेश में बच्चों की मौतों से भारत में बने कफ सिरप के जुड़े होने के बाद बढ़ी जांच के बीच सामने आई है.

यह जांच एक ऐसे कफ सिरप ब्रांड के मिलने के बाद हुई है, जिसमें डाइएथिलीन ग्लाइकॉल (Diethylene Glycol) मिला हुआ था, जिसका संबंध पिछले साल अक्टूबर में 24 बच्चों की मौत से था. कोल्ड्रिफ (Coldrif) नाम के इस सिरप को तमिलनाडु की श्रीसन फार्मास्युटिकल कंपनी ने बनाया था.

सड़ांध दूर होगी

समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय औषधि महानियंत्रक (DCGI) राजीव रघुवंशी ने मुंबई में इंडियन फार्मास्यूटिकल अलायंस (IPA) के 11वें ग्लोबल फार्मास्यूटिकल क्वालिटी समिट में कहा, ‘हमने नियमों का पालन न करने के मामलों पर गंभीर कार्रवाई की है और हमारा मानना ​​है कि कफ सिरप बनाने में व्याप्त सड़ांध दूर हो जाएगी.’

उन्होंने कहा कि दवा नियायक CDSCO कफ सिरप उत्पादों से जुड़ी दिक्कतों को ठीक करने की कोशिश कर रहा है. हालांकि ऐसा कब तक हो सकेगा भारतीय औषधि महानियंत्रक ने इसकी कोई समयसीमा नहीं बताई.

साख को नुकसान

CDSCO पर 42 अरब डॉलर की फार्मा उद्योग पर नज़र रखने का दबाव है, जिसमें छोटे दवा निर्माताओं का दबदबा है, क्योंकि 2022 से अफ्रीका और मध्य एशिया में 140 से ज़्यादा बच्चों की मौत के लिए भारत में बने कफ सिरप को ज़िम्मेदार ठहराया गया है, जिससे ‘दुनिया की फार्मेसी’ के तौर पर इसकी साख को नुकसान पहुंचा है.

रघुवंशी ने कहा कि लगभग 90% कफ सिरप बनाने वाली कंपनियों, यानी लगभग 1,100 कंपनियों की जांच की गई थी. इसमें मानक निर्माण तरीकों के उल्लंघन, आने वाले कच्चे माल के परीक्षण में नाकामी और गलत तरीकों या प्रक्रिया के इस्तेमाल की ओर इशारा किया गया है. हालांकि उन्होंने उन कंपनियों के नाम नहीं बताए, जो नियमों का पालन नहीं कर रही थीं.

अनुपालन से जुड़ी दिक्कतें

उन्होंने कहा कि हमने जोखिम का मूल्यांकन करने के लिए 1,250 अन्य दवा बनाने वाली इकाइयों का भी निरीक्षण किया है. इसकी शुरुआत 2022 में शुरू हुई थी. हालांकि उन्होंने यह बताने से मना कर दिया कि कितनी दवा निर्माता कंपनियों में नियमों के अनुपालन से जुड़ी दिक्कतें थीं या उन्हें कुछ समय के लिए अपना काम रोकना पड़ा.

रघुवंशी ने कहा कि भारत के केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) का लक्ष्य कर्मचारियों की कमी को दूर करके, मंज़ूरी में तेज़ी लाकर और संसाधन बढ़ाकर अपने कामकाज को अमेरिकी खाद्य और औषधि प्रशासन के बराबर लाना है.

समय और संसाधन

CDSCO 1,500 पद बनाने की योजना बना रही है, जिनमें से लगभग 40% फ्लेक्सिबल कॉन्ट्रैक्ट आधारित पद होंगे और सलाहकार के तौर पर वैश्विक उद्योग विशेषज्ञ को भी ला सकती है. रघुवंशी के मुताबिक, आवेदनों की समीक्षा के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस्तेमाल का भी पायलट परीक्षण किया जा रहा है.

इसके अलावा CDSCO ने अमेरिका, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया, जापान, यूनाइटेड किंगडम और कनाडा को भेजी जाने वाली दवाओं के लिए कथित गैर-आपत्ति प्रमाण पत्र की ज़रूरत को हटाकर निर्यात मंजूरी को आसान बना दिया है, उन्होंने कहा कि इस कदम से समय और संसाधन बचेंगे.

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