Tronglaobi Incident: मणिपुर के बिष्णुपुर ज़िले में एक विस्फोट में दो बच्चों की मौत के बाद लगभग दो हफ्तों से तनाव बरकरार है. इस घटना के बाद से जातीय हिंसा से प्रभावित इस राज्य में विरोध प्रदर्शन और रात का कर्फ्यू जारी है. सुरक्षा बलों के साथ छिटपुट झड़प की खबरें आती रहती हैं और सामानों की आवाजाही पर भी रोक देखने का मिल रहा है.
7 अप्रैल को बिष्णुपुर के ट्रोंगलाओबी गांव में हुए हमले मारे गए दोनों बच्चों के बाद राजधानी इम्फाल (Imphal) में बीती दो रातों तक रात के कर्फ्यू का उल्लंघन करते हुए सैकड़ों प्रदर्शनकारियों ने मशालें लेकर विशाल रैलियां निकालीं.
दोनों बच्चों (पांच साल के एक लड़के और पांच महीने की एक बच्ची) की हत्याओं ने राज्य की मेइतेई-बहुल घाटी में इतना ज़बरदस्त आक्रोश पैदा कर दिया, जैसा पिछले एक साल से भी ज़्यादा समय में देखने को नहीं मिला था.
इंटरनेट से प्रतिबंध हटा
जहां एक ओर यह तनाव अभी भी जारी है, वहीं राज्य के गृह विभाग ने बीते शनिवार (18 अप्रैल) को मोबाइल इंटरनेट सेवाओं पर लगा प्रतिबंध हटा दिया. यह प्रतिबंध घाटी के पांच जिलों – बिष्णुपुर, इंफाल ईस्ट, इंफाल वेस्ट, थौबल और काकचिंग – में 7 अप्रैल से लागू था.
#WATCH | Manipur: As protests continue in Imphal against the Tronglaobi incident, a protest rally was taken out in the city this evening.
Two children were killed, and their mother was injured when a bomb was hurled by suspected militants at a house in the Tronglaobi Awang… pic.twitter.com/D5VWBWxU4M
— ANI (@ANI) April 19, 2026
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, बीते 17 अप्रैल की रात सैकड़ों प्रदर्शनकारियों ने इम्फाल ईस्ट के चिंगारेल से एक रैली निकाली. रैली में ज़्यादातर महिलाएं शामिल थीं, जिनके हाथों में मशालें थीं. इस दौरान उन्होंने ‘दोनों नाबालिगों को इंसाफ दो’, ‘दोषियों को सज़ा दो’ और ‘मणिपुर से केंद्रीय सुरक्षा बलों को हटाओ’ जैसे नारे लगाए. जब प्रदर्शनकारियों ने लामलोंग बाज़ार में लगाए गए सुरक्षा बैरिकेड्स को ज़बरदस्ती तोड़ने की कोशिश की, तो इस रैली पर आंसू गैस के गोले छोड़े गए.
धरना-प्रदर्शनों का दौर जारी
इससे पहले 16 अप्रैल की रात सुरक्षा बलों ने इम्फाल वेस्ट के सिंगजामेई क्रॉसिंग पर इसी तरह की एक रैली को रोक दिया था. यह जगह मुख्यमंत्री युमनम खेमचंद सिंह के निजी आवास से महज़ 600 मीटर की दूरी पर है.
इस दौरान जब कुछ प्रदर्शनकारियों ने नारे लगाते हुए आगे बढ़ने की कोशिश की, तो उनके और सुरक्षा बलों के बीच झड़प हो गई. प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए सुरक्षा बलों ने आंसू गैस के कई गोले और ‘मॉक बम’ दागे, जिसके जवाब में प्रदर्शनकारियों ने उन पर पत्थर बरसाए. आधी रात तक चली इस झड़प में कम से कम पांच लोग घायल हो गए.
इन रैलियों के साथ-साथ 7 अप्रैल की घटना के बाद से ही अलग-अलग जगहों पर नियमित रूप से धरने-प्रदर्शन भी हो रहे हैं.
केंद्रीय बलों को वापस बुलाने की मांग
इन विरोध-प्रदर्शनों की अगुवाई करने वाले नागरिक संगठनों में से एक AMUCO (ऑल मणिपुर यूनाइटेड क्लब्स ऑर्गनाइज़ेशन) के अध्यक्ष संजॉय सोरोखैबम ने कहा कि उनकी मुख्य मांग राज्य से केंद्रीय सुरक्षा बलों को वापस बुलाना है.
उन्होंने कहा, ‘केंद्रीय बलों की आंखों के सामने इतनी हिंसा हुई है, लेकिन केंद्र सरकार और सुरक्षा बल इस पर कार्रवाई करने में पूरी तरह नाकाम रहे हैं. इसके बजाय. वे आम नागरिकों पर हमला करते हैं.’
उन्होंने यह बात ट्रोंगलाओबी हमले के तुरंत बाद हुई उस घटना का ज़िक्र करते हुए कही, जब एक उग्र भीड़ ने पास की CRPF चौकी पर धावा बोलने की कोशिश की थी और वहां तैनात जवानों के गोली चलाने से तीन लोगों की मौत हो गई थी.
#WATCH | Imphal, Manipur: Women’s Social Welfare Association in Wangkhei Angom Leikai stage a sit-in protest, demanding justice for the recent Tronglaobi incident. pic.twitter.com/Z6NvKc3NJy
— ANI (@ANI) April 18, 2026
सामानों की आवाजाही प्रभावित
राज्य के एक सुरक्षा अधिकारी ने बताया कि वाहनों और सामान की आवाजाही में दिक्कत आ रही है, क्योंकि महिला प्रदर्शनकारियों ने बिष्णुपुर (Bishnupur) से कुकी-ज़ोमी-बहुल चुराचांदपुर (Churachandpur) ज़िले तक जाने वाली सड़क पर ‘चेक पोस्ट’ बना लिए हैं, जो मौजूदा संघर्ष के शुरुआती दिनों में पूरे राज्य में हर जगह दिखाई देते थे.
उन्होंने कहा, ‘जिस दिन ट्रोंगलाओबी की घटना हुई थी, उसी दिन से प्रदर्शनकारी वाहनों और सुरक्षा बलों की आवाजाही को रोक रहे हैं और उनकी जांच कर रहे हैं; इसका एक नतीजा यह हुआ है कि इम्फाल से सामान और आपूर्ति ले जाने वाले वाहन चुराचांदपुर तक नहीं पहुंच पा रहे हैं.’
ट्रोंगलाओबी हमले की जांच NIA कर रही है और गृह मंत्री गोविंदास कोंथौजम ने कहा है कि जांच के सिलसिले में यूनाइटेड कुकी नेशनल आर्मी के पांच संदिग्ध सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है.
संवेदनशील इलाका
इसके पहले इंडियन एक्सप्रेस ने रिपोर्ट किया है कि जांचकर्ता इस हमले में ‘स्थानीय तत्वों’ की संलिप्तता की भी जांच कर रहे हैं, क्योंकि बम का लॉन्चर पीड़ितों के घर से सिर्फ 100 मीटर की दूरी पर ही बरामद हुआ था.
अधिकारियों ने इस हमले को एक साल के राष्ट्रपति शासन के बाद इस साल फरवरी में युमनाम खेमचंद सिंह (Yumnam Khemchand Singh) के नेतृत्व में बनी नई राज्य सरकार (Manipur Govt) को ‘अस्थिर’ करने की कोशिश से भी जोड़ा है.
एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रोंगलाओबी गांव बिष्णुपुर ज़िले के बाहरी इलाके में स्थित है, जो चुराचांदपुर ज़िले के ऊंचे पहाड़ी क्षेत्रों के करीब पड़ता है. इस इलाके को लंबे समय से संवेदनशील माना जाता रहा है, क्योंकि यह उन पहाड़ी ठिकानों के बेहद करीब है, जिन पर कथित तौर पर सशस्त्र कुकी समूहों का कब्ज़ा है.
Dear World,
This is Manipur Now at 11 pm IST. No Justice, No Rest. 😢🙏#HappeningNow pic.twitter.com/nijbLYmOCY— Licypriya Kangujam (@LicypriyaK) April 16, 2026
7 अप्रैल को क्या हुआ था
फ्रंटलाइन मैगजीन के अनुसार, 7 अप्रैल की सुबह एक घर में धमाका हुआ, जिससे पांच साल के टॉमथिन ओइनम (Tomthin Oinam) की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि पांच महीने की उनकी बहन ओइनम लीसाना (Oinam Leisana) और उसकी मां 35 वर्षीय ओइनम बिनीता (Oinam Binita) गंभीर रूप से घायल हो गईं.
बिनीता और लीसाना को तुरंत बिष्णुपुर ज़िला अस्पताल ले जाया गया और उसके बाद इम्फाल स्थित राज मेडिसिटी, लेकिन लीसाना को बचाया नहीं जा सका.
अधिकारियों ने बताया कि ट्रोंगलाओबी गांव स्थित उनके घर में कुछ संदिग्ध चरमपंथियों ने उनके घर पर बम फेंक दिया था. मेईतेई समुदाय की आबादी वाला यह निचला इलाका, कुकी-ज़ो बहुल ज़िले चुराचांदपुर की पहाड़ियों के करीब स्थित है.
2023 में शुरू हुई थी जातीय हिंसा
बच्चों की मौत की खबर फैलते ही कुछ ही घंटों में इम्फाल घाटी पूरी तरह से ठप हो गई. पहाड़ी ज़िले चुराचांदपुर की ओर जा रहे तेल के टैंकरों और ट्रकों में आग लगा दी गई. दुकानें और बाज़ार बंद हो गए. घाटी के अलग-अलग इलाकों से आए स्त्री-पुरुषों ने सभी मुख्य सड़कों पर नाकेबंदी कर दी. छात्र समूहों की सुरक्षा बलों के साथ झड़पें हुईं.
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, मई 2023 से मणिपुर में शुरू हुई जातीय हिंसा (Manipur Ethnic Violence) में कम से कम 260 लोगों की जान चली गई है और लगभग 60,000 लोग बेघर हो गए हैं. इस हिंसा में मेईतेई (Meitei Community) और कुकी समुदाय (Kuki Community) आमने-सामने हैं. मैतेई समुदाय मुख्य रूप से इंफाल घाटी के मैदानी इलाकों में, जबकि कुकी लोग पहाड़ी इलाकों में रहते हैं.




