पिछले 5 सालों में अमेरिका ने नहीं, बल्कि इस देश ने सबसे ज़्यादा भारतीयों को निकाला

(प्रतीकात्मक फोटो साभार: फेसबुक/Indian Air Force)

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Deportations of Indian Nationals: डोनाल्ड ट्रंप के सत्ता में आने के बाद से अमेरिका में बड़े पैमाने पर लोगों को देश से निकाले जाने के बावजूद अमेरिका वह देश नहीं है, जिसने इस साल या पिछले पांच सालों में सबसे ज़्यादा भारतीयों को देश से निकाला हो.

केंद्रीय विदेश मंत्रालय द्वारा राज्यसभा में पेश किए गए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, यह सऊदी अरब है, जिसने 2025 में 7,000 से ज़्यादा भारतीयों को देश से निकाला और सबसे ज़्यादा भारतीयों को देश से निकालने का रिकॉर्ड बनाया.

सरकार ने क्या बताया

बीते 18 दिसंबर को राज्यसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने कहा कि गिरफ्तारी, हिरासत और देश से निकाले जाने के बारे में जानकारी आमतौर पर भारतीय मिशनों के साथ साझा नहीं की जाती है, सिवाय उन मामलों के जहां राष्ट्रीयता की पुष्टि और देश से निकाले गए व्यक्ति को इमरजेंसी सर्टिफिकेट (EC) जारी करने की ज़रूरत होती है.

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, सरकार की ओर से बताया गया कि पिछले पांच सालों में सऊदी अरब ने अमेरिका से ज़्यादा भारतीयों को देश से बाहर निकाला.

आंकड़े क्या कहते हैं

रियाद में भारतीय दूतावास द्वारा दिए गए आंकड़ों के अनुसार, 2025 में कुल 7,019 भारतीयों को सऊदी अरब से देश से निकाला. खास बात यह है कि इन आंकड़ों में जेद्दा में भारतीय वाणिज्य दूतावास के आंकड़े भी शामिल हैं, जिनसे पता चलता है कि 3,865 भारतीयों को देश से निकाला गया.

साल-दर-साल सऊदी अरब से निकाले गए भारतीयों की संख्या.

अमेरिका से निकाले गए भारतीय

सऊदी अरब की तुलना में इमिग्रेशन पर कार्रवाई के दौरान अमेरिका से निकाले गए भारतीयों की संख्या कम थी. वॉशिंगटन डीसी में भारतीय दूतावास द्वारा दिए गए विदेश मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 2025 में कुल 3,414 भारतीयों को अमेरिका से निकाला गया.

साल-दर-साल अमेरिका से निकाले गए भारतीयों की संख्या.

इसकी तुलना में अमेरिका में दूसरे इंडियन मिशन, जैसे कि सैन फ्रांसिस्को, न्यूयॉर्क, अटलांटा, ह्यूस्टन और शिकागो द्वारा निकाले गए भारतीयों की संख्या आम तौर पर दहाई या कुछ 100 में रहती, जो खाड़ी देशों में देखे गए स्तर से काफी कम है. अमेरिका में ज़्यादातर भारतीयों को वॉशिंगटन DC (3,414) और ह्यूस्टन (234) से निकाला गया.

दूसरे देशों का आंकड़ा

जिन दूसरे देशों ने बड़ी संख्या में भारतीयों को निकाला गया है, उनमें म्यांमार (1,591), UAE (1,469), बहरीन (764), मलेशिया (1,485), थाईलैंड (481), और कंबोडिया (305) शामिल हैं.

बयान में कहा गया है कि सरकार विदेशों में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा, हिफाज़त और भलाई को सबसे ज़्यादा प्राथमिकता देती है और भारतीय मिशन मेज़बान देश के साथ मिलकर भारतीय नागरिकों को बचाने और वापस लाने का मुद्दा सक्रिय रूप से उठाते हैं.

भारतीयों को निकाले जाने के कारण

राज्य मंत्री के लिखित जवाब के अनुसार, विदेश में भारतीयों को हिरासत में लेने और देश से निकालने के कई कारण थे. इनमें तय वीज़ा या रहने की अवधि से ज़्यादा समय तक रुकना, बिना वैध वर्क परमिट के काम करना, श्रम कानूनों का उल्लंघन करना, बिना नोटिस दिए नौकरी छोड़ना, और सिविल या आपराधिक मामलों में नाम होना, शामिल हैं.

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