VB-G RAM G बिल लाने से एक महीने पहले मनरेगा से 16.3 लाख से ज़्यादा मज़दूर के नाम हटाए गए: रिपोर्ट

(फाइल फोटो साभार: फेसबुक/मनरेगा मजदूर)

SHARE:

समाचार सुनो

केंद्र सरकार द्वारा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी योजना (MGNREGA) की जगह लेने के लिए लोकसभा में विकसित भारत-रोज़गार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) (VB-G RAM G) बिल, 2025 पेश करने से लगभग एक महीने पहले आधिकारिक आंकड़ों से पता चला है कि पिछले 36 दिनों में 16.3 लाख से ज़्यादा मज़दूरों को इस योजना से हटा दिया गया.

यह जानकारी ग्रामीण मज़दूरों और विशेषज्ञों के बीच काम के अधिकार की गारंटी देने वाले कानून से बाहर किए जाने को लेकर चिंता पैदा करती है.

द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, ग्रामीण विकास राज्य मंत्री कमलेश पासवान ने समाजवादी पार्टी के सांसदों लालजी वर्मा और आनंद भदौरिया द्वारा पूछे गए सवालों के लिखित जवाब में लोकसभा में ये तथ्य बताए. मंत्री ने जवाब में यह भी कहा कि जॉब कार्ड हटाना राज्य सरकारों द्वारा मनरेगा नियमों के तहत की जाने वाली एक सामान्य प्रक्रिया है.

मनरेगा से नाम हटाने की वजह

उन्होंने आगे कहा कि नाम हटाने की वजह नकली या डुप्लीकेट कार्ड, मज़दूरों का स्थायी रूप से पलायन, पंचायतों का शहरी क्षेत्र में वर्गीकरण और मौतें थीं. उनके जवाबों में साफ तौर पर कहा गया कि डिजिटल वेरिफिकेशन की ज़रूरतें, जैसे कि इलेक्ट्रॉनिक नो-योर-कस्टमर (e-KYC) प्रक्रिया नाम हटाने की वजह नहीं थीं.

किस राज्य से कितने नाम हटे

रिपोर्ट के अनुसार, 10 अक्टूबर से 14 नवंबर 2025 सबसे अधिक आंध्र प्रदेश से 11,07,339 नाम हटाए गए. इसके बाद तेलंगाना से 95,084, ओडिशा से 80,896, जम्मू कश्मीर से 79,070, छत्तीसगढ़ से 65,619 और तमिलनाडु से 33,090 नाम हटाए है.

इसके बाद कर्नाटक से 27,004, केरल से 20,124, उत्तर प्रदेश से 17,236, पंजाब से 16,898, महाराष्ट्र से 15,061 और राजस्थान से 13,701 नाम हटाए गए हैं.

विपक्ष का आरोप

विपक्ष का कहना है कि नाम हटाने की मौजूदा लहर इस साल की शुरुआत में शुरू हुए आधार आधारित e-KYC सत्यापन प्रक्रिया के शुरू होने के साथ हुई है. वे उन खबरों की ओर इशारा करते हैं, जिनमें अनुमान लगाया गया है कि उसी दौरान बहुत बड़ी संख्या में मज़दूरों के नाम (लगभग 27 लाख) हटाए गए थे, जो e-KYC नियमों को सख्त करने के साथ हुआ था.

पासवान के जवाबों में यह भी कहा गया है कि नवंबर तक 56 प्रतिशत से ज़्यादा स​क्रिय मजदूरों ने e-KYC प्रक्रिया पूरी कर ली हैं और लगभग 99.7 प्रतिशत सक्रिय रिकॉर्ड आधार सीडिंग के ज़रिेये पहले ही सत्यापित हो चुके हैं.

e-KYC प्रक्रिया का मकसद

अधिकारियों का कहना है कि e-KYC प्रक्रिया का मकसद सत्यापन को आसान बनाना और धोखाधड़ी को रोकना है, न कि असली कामगार को काम या मेहनताना देने से रोकना है.

रिपोर्ट के अनुसार, मनरेगा से हटाए गए नामों के आंकड़े एक लंबे चलन का हिस्सा हैं. 2019-20 से देश भर में लाखों मजदूरों के नाम नियमित रूप से हटाए और जोड़े गए हैं, जिसमें अकेले 2024-25 में 38 लाख 50 हजार से ज़्यादा जॉब कार्ड हटाए गए और इसी अवधि में लाखों जोड़े गए.

सरकार ने नामों को हटाने और फिर से शामिल करने के लिए एक स्टैंडर्ड प्रक्रिया जारी की है. इसमें योग्य मजदूरों की सुरक्षा के लिए ड्राफ्ट लिस्ट, ग्राम सभा सत्यापन, अपील के अधिकार और शिकायत निवारण तंत्र शामिल हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *