Living Conditions in Odisha Prisons: नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की एक रिपोर्ट में ओडिशा की जेलों में रहने की भयावह स्थिति की जानकारी सामने आई है. रिपोर्ट में कहा गया है कि राज्य की जेलों में भीड़भाड़, कैदियों के रहने और स्नान करने की जगह अपर्याप्त है. इसके अलावा रिपोर्ट में जेलों में सुरक्षाकर्मियों और जरूरी सुरक्षा उपकरणों की कमी को भी उजागर किया गया है.
बीते 31 मार्च को ओडिशा विधानसभा में पेश की गई इस ऑडिट रिपोर्ट में कहा गया है कि राज्य की 87 जेलों में से 31 में क्षमता से अधिक कैदी हैं. रिपोर्ट में कहा गया है, ‘प्रति कैदी कम जगह की उपलब्धता के कारण कैदियों के लिए रहने की स्थिति भीड़भाड़ वाली थी. ऐसे कैदियों को सोने के लिए मानक अपेक्षित जगह और मानदंडों के अनुसार बुनियादी रहने की स्थिति (Basic Living Conditions) से वंचित किया गया था.’
महिला कैदी खुले में स्नान को मजबूर
इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, ओडिशा मॉडल जेल मैनुअल में हर 10 कैदियों के लिए एक की दर से स्नान घर (Covered Cubicles for Bathing) और निजता सुनिश्चित करने के लिए उचित व्यवस्था का आदेश दिया गया है, इसके बावजूद CAG के निष्कर्षों से पता चला है कि 2,203 स्नान घरों की जरूरत के मुकाबले वास्तव में केवल 916 उपलब्ध थे. यही नहीं कुछ जेलों में महिला कैदी स्नान करने के लिए खुली पिंडी या चबूतरे का उपयोग कर रही थीं.
CAG की रिपोर्ट में कहा गया है कि जेलों में स्नान करने की अपर्याप्त जगह/अपर्याप्त शौचालय के कारण कैदी स्वच्छतापूर्ण रहने की स्थिति की बुनियादी जरूरतों से वंचित हो जाते हैं और महिला कैदियों के लिए खुली जगह पर स्नान की घटनाओं ने उनकी निजता के बारे में चिंताएं बढ़ा दी हैं.
सुरक्षाकर्मियों की कमी
जेलों की सुरक्षा (Prison Security) के लिए एक पाली में 3,515 कर्मचारियों की जरूरत है, हालांकि CAG रिपोर्ट में कहा गया है कि ओडिशा सरकार ने सिर्फ 1,680 पदों को मंजूरी दी, जिसके मुकाबले केवल 1,282 सुरक्षा कर्मचारी तैनात थे. इस तरह से 2,233 कर्मचारियों की कमी रही.
ऑडिट में CAG ने यह भी पाया कि सुरक्षित जेल प्रबंधन के लिए जरूरी सुरक्षा उपकरण या तो उपलब्ध नहीं थे या चालू नहीं थे. CAG ने 15 जेलों में सुरक्षा अनिवार्यताओं का सत्यापन किया, उसने कहा कि चार जेलों में डोर फ्रेम मेटल डिटेक्टर अनुपस्थित थे.
इसी प्रकार, परीक्षण की गईं 15 जेलों में उपलब्ध सात सामान चेक करने वाले स्कैनर (Baggage Scanners) में से केवल एक स्कैनर चालू था. साथ ही कुछ जेलों में उपलब्ध मोबाइल जैमर (Mobile Jammer) भी चालू हालत में नहीं थे.
जेलों में मिले प्रतिबंधित सामान
ऑडिट रिपोर्ट में कहा गया है कि सुरक्षा उपकरणों की कमी के कारण जेलों में प्रवेश के दौरान कैदियों की निगरानी नहीं की जा सकी, खासकर प्रतिबंधित सामनों का पता लगाने के लिए.
रिपोर्ट में बताया गया कि भुवनेश्वर की विशेष जेल में 2020-23 में किए गए 46 तलाशी अभियानों के दौरान अधिकारियों ने 74 मोबाइल फोन, 56 सिम कार्ड, एक पेन ड्राइव, 26 खाली शराब की बोतलें और 1.76 किलोग्राम गांजा जब्त किया था.
कैदियों के भागने की घटना
रिपोर्ट में कहा गया है कि पर्याप्त सुरक्षा कर्मचारियों और जरूरी सुरक्षा उपकरणों की कमी के कारण भी कैदी जेलों से भाग गए. रिपोर्ट में बताया गया कि 2020-23 की ऑडिट अवधि के दौरान ऐसी 29 घटनाएं हुईं. 29 में से 17 को दोबारा पकड़ लिया गया, लेकिन 12 का अभी तक पता नहीं चल पाया है.
ऑडिट रिपोर्ट में कहा गया है कि कैदियों के हिरासत से भागने के बावजूद विभाग द्वारा ऐसी घटनाओं से बचाव के लिए जरूरी सुरक्षा कर्मचारियों की तैनाती और कर्मचारियों को जरूरी उपकरण प्रदान करने जैसे कोई पर्याप्त कदम नहीं उठाए गए.
CAG ऑडिट में कैदियों के लिए स्वास्थ्य सुविधाएं भी अपर्याप्त पाई गईं, जिनमें बिस्तरों और नैदानिक सुविधाओं (Clinical Facilities) की कमी भी शामिल है. रिपोर्ट के अनुसार, मनोरोग संबंधी कैदियों को मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों या सुरक्षित हिरासत के अन्य स्थानों के बजाय अन्य कैदियों के साथ रखा जाता था.




