पुणे: कैंसर का पता चलने के बाद आईटी कंपनी ने मैनेजर को नौकरी से निकाला

पुणे में आईटी कंपनी के दफ्तर के बाहर प्रदर्शन के दौरान संतोष पटोले.

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पीड़ित संतोष पटोले ने मल्टीनेशनल आईटी कंपनी SLB में आठ साल काम किया है. नौकरी से निकाले जाने के बाद उन्होंने कंपनी के पुणे दफ्तर के बाहर भूख हड़ताल शुरू कर दी है.

महाराष्ट्र के पुणे शहर में एक फैसिलिटी मैनेजर को उसकी कंपनी ने इस वजह से निकाल दिया, क्योंकि उन्हें कैंसर हो गया था. इसके विरोध में पीड़ित व्यक्ति ने कंपनी के येदवडा ऑफिस के बाहर भूख हड़ताल शुरू कर दी.

संतोष पटोले ने मल्टीनेशनल आईटी कंपनी SLB में आठ साल काम किया है. उन्होंने बताया कि बीते अप्रैल माह में कंपनी के सालाना हेल्थ चेकअप के दौरान उन्हें थायराइड इस्थमस कैंसर का पता चला था.

नौकरी से निकालने की वजह

उन्होंने सर्जरी और इलाज के लिए मई और जून में मेडिकल लीव ली थी. उन्होंने बताया कि जून तक उनका खर्च कंपनी उठा रही थी. इसके बाद डॉक्टरों ने उन्हें फिटनेस सर्टिफिकेट दिया, जिससे वे जुलाई से काम पर लौट सकते थे.

पुणे मिरर की रिपोर्ट के अनुसार, पटोले ने बताया कि वह अपनी ड्यूटी फिर से शुरू करने के लिए तैयार थे कि 23 जुलाई को उन्हें एक टर्मिनेशन लेटर मिला, जिसमें उनके एक फैसले से जुड़े 2.5-3 करोड़ रुपये के संभावित नुकसान का ज़िक्र था.

मानसिक और आर्थिक तनाव

उनका कहना है कि यह दावा बेबुनियाद था, क्योंकि जिस प्रोजेक्ट की बात हो रही थी, वह ‘अभी तक लागू भी नहीं हुआ था’ और कंपनी ने उनकी बात सुनने से मना कर दिया.

इस तरह नौकरी से अचानक निकाले जाने के कारण उनका मेडिकल कवरेज बंद हो गया, जिससे उनके कैंसर के इलाज में आर्थिक दिक्कतें आने लगीं. पटोले ने कहा कि इंश्योरेंस सपोर्ट न मिलने से उनका मानसिक और आर्थिक तनाव और बढ़ गया है.

भेदभावपूर्ण फैसला

पटोले ने अब कंपनी के पुणे ऑफिस के बाहर भूख हड़ताल शुरू कर दी है, जिसमें उन्होंने अपने मेडिकल कवरेज को फिर से शुरू करने और नौकरी से निकाले जाने के फैसले पर दोबारा विचार करने की मांग की है. इंडस्ट्री में 20 साल से ज़्यादा के अनुभव के साथ उन्हें पूरा यकीन है कि उनके खिलाफ जो कार्रवाई की गई है, वह गलत और भेदभावपूर्ण है.

भूख हड़ताल से हटाया

बीते 13 दिसंबर को अपने फेसबुक एकाउंट पर एक पोस्ट में संतोष ने कहा, ‘पुलिस और मेडिकल दखल के बाद अपनी भूख हड़ताल के दौरान मुझे जुपिटर हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है. डॉक्टर मेरी हालत पर नज़र रख रहे हैं और इलाज शुरू हो गया है. मेरी हालत स्थिर है और मैं मेडिकल टीम का शुक्रगुजार हूं. हालांकि इस मेडिकल दखल की वजह से भूख हड़ताल रोकनी पड़ी, लेकिन न्याय के लिए मेरी लड़ाई कानूनी और संस्थागत तरीकों से जारी रहेगी, जिसमें हाईकोर्ट, NHRC और Nasdaq Ethics शामिल हैं.’

उन्होंने लिखा, ‘इस सफर ने एक बड़े मकसद को मज़बूत किया है: भारत को कार्यस्थलों पर मेडिकल भेदभाव से निपटने के लिए POSH जैसा एक स्वतंत्र सिस्टम चाहिए, ताकि किसी भी कर्मचारी को स्वास्थ्य और रोज़ी-रोटी में से किसी एक को चुनने के लिए मजबूर न होना पड़े. मेरे साथ खड़े रहने और मेरा साथ देने वाले सभी लोगों को धन्यवाद. अब मैं ठीक होने पर ध्यान दूंगा और नई ताकत के साथ इस लड़ाई को जारी रखूंगा.’

सोशल मीडिया पर आलोचना

संतोष की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही है. इसमें वह कंपनी के पुणे ऑफिस के बाहर एक टेंट के अंदर बैठे दिख रहे हैं. तस्वीर में कई बैनर दिख रहे हैं, जिनमें से एक पर लिखा है, ‘#WhySLBWhy? कैंसर मरीज़ को US MNC ने नौकरी से निकाला, भूख हड़ताल शुरू. कर्मचारी इंसान हैं, नंबर नहीं.’

यह घटना सामने आने के बाद कंपनी को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म काफी आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है. इस घटना को लेकर लोग सोशल मीडिया पर अपना गुस्सा प्रकट कर रहे हैं. कई लोग जॉब सिक्योरिटी और कॉर्पोरेट ज़िम्मेदारी के बारे में चिंता जता रहे हैं.

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