3 महीने का छात्र आंदोलन और छुट्टी पर भेजे गए कुलपति; असम के तेजपुर विश्वविद्यालय में आखिर हुआ क्या?

(फोटो साभार: फेसबुक/Tezpur University)

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Tezpur University Student Protest: सितंबर 2025 से ही विवाद का केंद्र में रहे असम के तेजपुर विश्वविद्यालय के कुलपति शंभू नाथ सिंह (VC Shambhu Nath Singh) को आखिरकार छुट्टी पर भेज दिया. उनके खिलाफ लगे आरोपों की जांच के लिए केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने तीन सदस्यों की एक जांच समिति बना दी है.

इसके अलावा मंत्रालय ने इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT) गुवाहाटी के प्रोफेसर अमरेंद्र कुमार दास को विश्वविद्यालय का उप-कुलपति भी नियुक्त किया है.

यह कदम इस केंद्रीय विश्वविद्यालय में छात्रों और फैकल्टी सदस्यों द्वारा सितंबर 2025 के बीच में सिंह के कार्यकाल के दौरान कैंपस में पेड़ों की कटाई और पारिस्थितिक नुकसान, कथित प्रशासनिक तथा वित्तीय अनियमितताओं (Financial Irregularities) को लेकर शुरू किए गए आंदोलन के लगभग तीन महीने बाद आया है.


सितंबर 2025 से बिगड़ा माहौल

द प्रिंट की रिपोर्ट के अनुसार, असम के दो केंद्रीय विश्वविद्यालयों (Central University) में से एक, तेजपुर विश्वविद्यालय में सितंबर 2025 से ही उथल-पुथल का दौर जारी है, जब वित्तीय गड़बड़ियों, प्रशासनिक तंत्र खराब होने, अकादमिक स्तर गिरने और नियमों के बार-बार उल्लंघन के आरोपों को लेकर कुलपति को हटाने के लिए विरोध प्रदर्शन शुरू हुआ था.

वित्तीय और प्रशासनिक कुप्रबंधन के अलावा प्रदर्शनकारियों ने सिंह पर लंबे समय तक कैंपस से गायब रहने का आरोप लगाया है. उनका यह भी आरोप है कि गायक ज़ुबीन गर्ग (Zubeen Garg) की मौत के बाद कैंपस चुनाव टालने की छात्रों की अपील पर उन्होंने असंवेदनशील टिप्पणियां की थीं. छात्रों ने कुलपति और विश्वविद्यालय प्रशासन पर आम शोक के समय कल्चरल आइकन ज़ुबीन गर्ग का अपमान करने का आरोप भी लगाया था.

शंभु नाथ सिं​ह को साल 2023 में पांच साल के कार्यकाल के लिए तेजपुर विश्वविद्यालय का कुलपति नियुक्त किया गया था.


फैकल्टी सदस्यों का इस्तीफा

22 सितंबर 2025 को विश्वविद्यालय में माहौल गरमा गया था. कुलपति और छात्रों के बीच कहा-सुनी के बाद वह कैंपस से दूर रहे. कहा-सुनी के दौरान ऐसी स्थिति बन गई कि कुलपति सिंह को मौके से लगभग भागना पड़ा था. सितंबर 2025 में विरोध प्रदर्शन शुरू होने के बाद से कम से कम 11 फैकल्टी सदस्यों और वरिष्ठ अधिकारियों ने इस्तीफा दे दिया है.

छात्रों और शिक्षकों का कहना है कि अशांति के कारण नवंबर 2025 से विश्वविद्यालय में अकादमिक गतिविधियों पर रोक लगा दी गई थी.

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, विरोध प्रदर्शनों के बीच 29 दिसंबर 2025 को प्रदर्शनकारियों ने 24 घंटे की भूख हड़ताल करके आंदोलन के 100 दिन पूरे किए और कुलपति को हटाने और केंद्र सरकार से तुरंत दखल देने की मांग की थी.

जांच समिति गठित

मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि तीन सदस्यीय जांच समिति की अध्यक्षता मणिपुर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एन. लोकेंद्र सिंह करेंगे. इसमें नगालैंड विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जगदीश कुमार पटनायक और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के सचिव प्रो. मनीष आर. जोशी शामिल होंगे.

यह समिति विश्वविद्यालय में चल रही स्थिति से जुड़े सभी मामलों की जांच करेगी, जिसमें कुलपति पर लगे आरोप भी शामिल हैं.

शिक्षा मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा, ‘तेजपुर विश्वविद्यालय के कुलपति सभी कामों से खुद को अलग कर लेंगे और तुरंत छुट्टी पर चले जाएंगे तथा जांच पूरी होने तक छुट्टी पर ही रहेंगे.’

उच्च शिक्षा सचिव का दौरा

मंत्रालय द्वारा 31 दिसंबर 2025 को जारी एक ऑफिस मेमोरेंडम में कहा गया था कि तीन-सदस्यीय समिति को असम के राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य द्वारा 8 अक्टूबर 2025 को गठित फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी की रिपोर्ट के निष्कर्षों और सिफारिशों की विस्तृत, व्यापक जांच करने का काम सौंपा गया है.

इस फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी ने अक्टूबर 2025 के मध्य में कैंपस का दौरा किया था. इसकी रिपोर्ट अभी तक सार्वजनिक नहीं की गई है. इसके अलावा उच्च शिक्षा सचिव विनीत जोशी के नेतृत्व में शिक्षा मंत्रालय के अधिकारियों ने दिसंबर 2025 में विश्वविद्यालय का दौरा किया था और विरोध कर रहे स्टाफ और छात्र प्रतिनिधियों से मुलाकात की थी.

समिति क्या करेगी

फिलहाल शिक्षा मंत्रालय द्वारा बनाई गई तीन-सदस्यीय समिति को उन परिस्थितियों की जांच करने का भी काम सौंपा गया है, जिनके कारण मौजूदा संकट पैदा हुआ, जिसमें दिए गए इस्तीफे और विभिन्न विश्वविद्यालय अधिकारियों द्वारा पदभार ग्रहण करना शामिल है.

इसके अलावा समिति कैंपस का दौरा करेगी, सभी पक्षों से बातचीत करेगी और ज़रूरत के हिसाब से संबंधित दस्तावेज़ों, कम्युनिकेशन और रिकॉर्ड की समीक्षा करेगी. समिति को कहा गया है कि वह अपनी रिपोर्ट ‘जितनी जल्दी हो सके और ज़्यादा से ज़्यादा तीन महीने के अंदर’ जमा करे.


आंदोलनकारी छात्रों ने क्या कहा

द प्रिंट के अनुसार, छात्रों ने 01 जनवरी की देर रात जारी एक बयान में कहा कि 103 दिनों के शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के बाद मंत्रालय का उच्च-स्तरीय जांच समिति बनाने का फैसला तेजपुर विश्वविद्यालय में संकट को सुलझाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.

उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि कुलपति सिंह के खिलाफ आरोपों की जांच निष्पक्ष, पारदर्शी होगी और उसमें कोई बाहरी दखल नहीं होगा.

समिति को पूरा सहयोग देने का आश्वासन देते हुए छात्रों ने कहा कि जब तक न्याय नहीं मिल जाता और लंबित मांगें पूरी नहीं हो जातीं, तब तक विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा.

बयान में कहा गया है, यह समाधान एक महत्वपूर्ण पड़ाव है, लेकिन जब तक जांच में न्याय की पुष्टि नहीं हो जाती, तब तक आंदोलन वापस नहीं लिया जाएगा.’


प्रधानमंत्री से हस्तक्षेप की मांग

मालूम हो कि दिसंबर 2025 में विश्वविद्यालय का मुद्दा नेताओं के ध्यान में आया. असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री से उप-कुलपति नियुक्त करने का आग्रह किया था. वहीं, कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने 4 दिसंबर 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर विश्वविद्यालय में चल रही अशांति में हस्तक्षेप करने की मांग की थी.

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