केरल फिल्म फेस्टिवल में 19 फिल्मों की स्क्रीनिंग पर रोक, रूसी क्लासिक और फिलिस्तीनी निर्देशकों की 3 फिल्में शामिल

‘बमाको’, ‘बैटलशिप पोटेमकिन’ और ‘फिलिस्तीन 36’ फिल्मों के पोस्टर. (फोटो साभार: फेसबुक)

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केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने केरल इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (IFFK) में दिखाई जाने वाली 19 फिल्मों को प्रसारित करने की अनुमति देने से मना कर दिया है. यह फिल्म समारोह वर्तमान में चल रहा है.

यह सालाना कार्यक्रम, जो अब अपने 30वें साल में है, केरल चलचित्र अकादमी द्वारा राज्य के सांस्कृतिक मामलों के विभाग के तहत आयोजित किया जा रहा है. बीते 12 दिसंबर को शुरू हुए इस फिल्म फेस्टिवल में 82 देशों की 206 फिल्मों को स्क्रीनिंग के लिए चुना गया है. खास बात यह है कि फेस्टिवल में दिखाई जाने वाली फिल्मों को प्रसारित करने के लिए मंत्रालय से अनुमति लेने की ज़रूरत होती है.

मंत्रालय ने कोई कारण नहीं बताया

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, केरल चलचित्र अकादमी की उपाध्यक्ष कुक्कू परमेश्वरन ने कहा कि 19 फिल्मों को सेंसर छूट देने से मना कर दिया गया है. उन्होंने कहा, ‘हम सूचना और प्रसारण मंत्रालय के अधिकारियों के संपर्क में हैं और उन्होंने हमसे इन फिल्मों के बारे में जो भी ब्योरा मांगा, उन्हें मुहैया करा दिया गया है. हमें उम्मीद है कि इन फिल्मों को प्रसारित करने की छूट मिल जाएगी.’

अकादमी के एक अधिकारी ने कहा कि सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने 19 फिल्मों को सेंसर छूट न देने का कोई कारण नहीं बताया है. उन्होंने कहा, ‘ये फिल्में किसी खास कैटेगरी में नहीं आती हैं. मंत्रालय ने इस फैसले का कोई कारण नहीं बताया है. अगर छूट नहीं मिली, तो इन फिल्मों की स्क्रीनिंग रद्द करनी पड़ेगी.’

इजरायली फिल्म को मिली छूट

अधिकारी ने बताया कि जिन 19 फिल्मों को सेंसर छूट नहीं मिली है, उनमें से तीन फिलिस्तीनी फिल्मकारों की हैं, जबकि एक इजरायली फिल्मकार की फिल्म को स्क्रीनिंग के लिए छूट मिल गई है.

उनके अनुसार, रूसी फिल्म Battleship Potemkin, 1925 की एक साइलेंट फिल्म है, जो सोवियत क्रांति से जुड़ी है. एक और फिल्म The Hour of the Furnaces, अर्जेंटीना की एक पॉलिटिकल फिल्म है, जिसे बड़े पैमाने पर दिखाया गया है. एक और फिल्म स्पेनिश टाइटल Beef है.

उन्होंने कहा, ‘इन 19 फिल्मों में कोई कॉमन फैक्टर नहीं है, न ही वे किसी ऐसी कैटेगरी में आती हैं, जिसकी वजह से उन्हें प्रसारित किए जाने से मना किया जाए.’

इन फिल्मों को नहीं मिली अनुमति

जिन फिल्मों पर रोक लगाई गई है, उनमें ‘अ पोएट: अनकंसील्ड पोएट्री’, ‘ऑल दैट्स लेफ्ट ऑफ यू’, ‘बमाको’, ‘बैटलशिप पोटेमकिन’, ‘बीफ’, ‘क्लैश’, ‘ईगल्स ऑफ द रिपब्लिक’, ‘हार्ट ऑफ द वुल्फ’, ‘वन्स अपॉन अ टाइम इन गाजा’, ‘पैलेस्टाइन 36’, ‘रेड रेन’, ‘रिवरस्टोन’, ‘द आर ऑफ द फर्नेसेस’, ‘टनल्स: सन इन द डार्क’, ‘यस’, ‘फ्लेम्स’, ‘टिम्बकटू’, ‘वाजिब’ और संतोष शामिल है.

इनमें से ‘बैटलशिप पोटेमकिन’ सहित सात फिल्मों की स्क्रीनिंग सूचना और प्रसारण मंत्रालय से मंज़ूरी न मिलने के कारण अब तक रद्द कर दी गई है.

फिलिस्तीनी मुद्दों पर आधारित फिल्में

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, ‘फिलिस्तीन 36’, ‘यस’, ‘वन्स अपॉन अ टाइम इन गाज़ा’, और ‘ऑल दैट्स लेफ्ट ऑफ यू’, फिलिस्तीनी मुद्दों पर आधारित हैं. खास बात यह है कि ‘फिलिस्तीन 36’ को इस फिल्म फेस्टिवल की पहली फिल्म के तौर पर चुना गया था और इसे पहले ही दिखाया जा चुका था.

केरल के संस्कृति मामलों के मंत्री साजी चेरियन ने फेस्टिवल के उद्घाटन में फिलिस्तीनी मुद्दे के लिए समर्थन जताया, जहां भारत में फिलिस्तीनी राजदूत अब्दुल्ला एम. अबू शावेश मेहमान के तौर पर मौजूद थे.

कई फिल्में दूसरे समारोहों में दिखाई गईं

इनमें से कई फिल्में पहले भी अन्य भारतीय फिल्म समारोहों में दिखाई जा चुकी हैं. उदाहरण के लिए ‘बैटलशिप पोटेमकिन’ और डायरेक्टर अब्देर्रहमान सिसाको की 2006 की डॉक्यूड्रामा ‘बमाको’, दोनों पहले भी दिखाई जा चुकी हैं, और सिसाको को इस साल IFFK में लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड मिला है.

स्क्रॉल डॉट इन के अनुसार, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) के महासचिव मैरियन अलेक्जेंडर बेबी ने कहा कि स्पैनिश फिल्म बीफ उन फिल्मों में से है, जिन पर रोक लगाई गई है, यह कथित तौर पर ‘सिर्फ इसके नाम की वजह से है, जबकि इसका खाने की पसंद से कोई लेना-देना नहीं है’.

नासमझी की वजह से रोक

दिग्गज फिल्ममेकर अडूर गोपालकृष्णन ने मीडिया से कहा कि इन फिल्मों को स्क्रीनिंग में छूट न देना कुछ लोगों की नासमझी की वजह से हो सकता है.

उन्होंने कहा, ‘हो सकता है कि उन्हें इन फिल्मों के बारे में कोई जानकारी न हो. इनमें से कई फिल्में वर्ल्ड क्लासिक हैं और कई फिल्म समारोह में दिखाई जा चुकी हैं. इस फैसले पर दोबारा विचार किया जाना चाहिए. किसी फिल्म को उसके नाम से जज नहीं करना चाहिए.’

मंत्रालय की नीति

इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, फिल्म समारोहों के लिए फिल्मों के सर्टिफिकेशन की मंत्रालय की नीति के अनुसार, उन फिल्मों को सेंसर से छूट दी जाती है, जिन्हें डेलीगेट्स और फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े लोगों के सामने दिखाया जाना होता है.

साथ ही मंत्रालय के पास सेंसर से छूट को रद्द करने का अधिकार है, अगर इससे देश की सुरक्षा और अखंडता, कानून-व्यवस्था, या दूसरे देशों के साथ संबंधों पर असर पड़ता है.

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