बिहार की राजधानी पटना के ज़िला प्रशासन ने फतुहा ब्लाक के अलावलपुर गांव स्थित एक सरकारी स्कूल में छात्रों द्वारा जाति के आधार पर लगाए गए भेदभाव के आरोपों की जांच के आदेश दे दिए हैं.
सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो में छात्र विभिन्न शिक्षकों का नाम लेते हुए आरोप लगा रहे हैं कि उन्हें अलग बिठाया जाता है, ‘ऊंची जाति’ के छात्रों के साथ घुलने-मिलने से रोका जाता है और कभी-कभी खाना भी नहीं दिया जाता है.
द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, वीडियो में एक छात्र दावा कर रहा है, ‘‘वे दूसरे छात्रों से पूछते हैं, ‘तुम उनके साथ क्यों बैठते हो?’ वे हमें अलग बिठाते हैं,’’. छात्र ने कहा कि अगर ऊंची जाति के छात्र ‘नीची जाति के छात्रों’ के बगल में बैठे पाए जाते हैं, तो भी उन्हें हटा दिया जाता है.
This video is from a school in Alawalpur village of the Patna Sahib Lok Sabha constituency in Bihar, The students claim that the teachers are adopting a caste-discriminatory attitude towards students, isolating them and keeping them separate from other students. Interestingly,… pic.twitter.com/5lHfiXbLml
— Mohammed Zubair (@zoo_bear) December 23, 2025
डीएम ने क्या कहा
दूसरी शिकायतों में स्कूल में प्रशासनिक गड़बड़ियां शामिल हैं, जैसे टीचरों का कम आना, कक्षाएं रेगुलर न होना, खराब क्वालिटी का खाना और छात्रों से मज़दूरी करवाने के आरोप.
संपर्क करने पर पटना के जिला मजिस्ट्रेट थियागराजन एसएम ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि जांच के आदेश दिए गए हैं. जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) को घटना की जांच करने और रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है.’
जिला शिक्षा अधिकारी ने इस मामले पर सवालों का जवाब नहीं दिया.
ये आरोप भी लगे
द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, छात्रों ने यह भी आरोप लगाया कि उनसे ऐसे काम करवाए जाते हैं जो उन्हें नहीं करने चाहिए, जैसे कक्षा में झाड़ू लगाना, गेट खोलना, मिड-डे मील के बाद अपनी प्लेट और गिलास धोना और क्लास खत्म होने के बाद दरवाज़े और खिड़कियां बंद करना.
कुछ छात्रों ने यह भी कहा कि मिड-डे मील की गुणवत्ता घटिया है और कई बार उन्हें उसमें कांच के टुकड़े, मकड़ी और चींटियां मिली हैं. उन्होंने यह भी बताया कि टॉयलेट भी मुश्किल से साफ होते हैं और शिक्षकों की पूरी संख्या कभी स्कूल नहीं आती. रोज़ाना सिर्फ 4 से 5 शिक्षक ही स्कूल आते हैं और उनमें से कुछ अटेंडेंस लगाने के बाद अपने घर चले जाते हैं.
आरोप है कि मामला सामने आने के बाद शिक्षक छात्रों को धमकी दे रहे हैं कि उन्हें ट्रांसफर सर्टिफिकेट (TC) नहीं मिलेगा, जो हाईस्कूल की पढ़ाई के लिए ज़रूरी है. माता-पिता ने भी इस मुद्दे पर चिंता जताई है कि ऐसी हरकतें शिक्षा व्यवस्था की बुनियाद को खराब कर देंगी और उन्होंने शिक्षकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है.
प्रिंसिपल ने क्या कहा
छात्रों के आरोपों के बारे में स्कूल के प्रिंसिपल रंजन कुमार से पूछा गया तो उन्होंने कहा, ‘सभी आरोप बेबुनियाद हैं. हमारा स्कूल किसी भी तरह का जातिगत भेदभाव नहीं करता है. हम सिर्फ लड़कियों और लड़कों को अलग-अलग बैठने के लिए कहते हैं.’
द हिंदू के अनुसार, अलावलपुर की प्रधान नीतन देवी ने कहा कि उन्हें भी इस घटना के बारे में पता चला है और उन्होंने स्कूल प्रिंसिपल से कहा है कि वे पंचायत में शिक्षा व्यवस्था को खराब न करें. उन्होंने यह भी कहा कि दिशानिर्देशों का उल्लंघन करने वाले किसी भी शिक्षक को सज़ा मिलनी चाहिए.
सांसद रविशंकर प्रसाद से कनेक्शन
अलावलपुर गांव को सांसद रविशंकर प्रसाद ने गोद लिया है, जो संसद आदर्श ग्राम योजना (SAGY) के तहत उनके पटना साहिब लोकसभा क्षेत्र में आता है. लगभग 5,000 वोटरों वाला अलावलपुर गांव ऊंची जाति के राजपूतों का गांव है. यह गांव राजधानी पटना से लगभग 20 किमी दूर है.




