Farmers Protest: मध्य प्रदेश किसानों एक अनोखे तरीके से विरोध प्रदर्शन किया है. उन्होंने अपने शरीर को केले और सागौन के पत्तों से ढककर विरोध जताया. मामला राज्य के बुरहानपुर जिले का है और यह सभी किसान पांगरी मध्यम सिंचाई परियोजना से प्रभावित हैं.
बीते गुरुवार (8 जनवरी) को हुए विरोध के दौरान किसान अपनी अधिग्रहित ज़मीन (Acquired Land) के लिए दोगुना मुआवज़े की मांग कर रहे थे, जैसा कि भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 2013 के तहत अनिवार्य है. किसानों के अनुसार, उनके कानूनी दावों के प्रति तीन साल से सरकारी उदासीनता को उजागर करने के लिए यह गांधीवादी तरीके से किया गया शांतिपूर्ण प्रदर्शन था.
3 साल से मांगें लंबित
एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, प्रभावित किसान तीन साल से ज़्यादा समय से लगातार धरने दे रहे हैं, ज्ञापन सौंप रहे हैं और शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे हैं. वे बाज़ार दर से दोगुनी कीमत पर मुआवज़े की मांग कर रहे हैं, जो उनके अनुसार ग्रामीण इलाकों में अधिग्रहित ज़मीन पर लागू होता है.
उन्होंने तर्क दिया कि प्रशासन को बार-बार गुहार लगाने के बावजूद उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया है.
किसानों ने अपनी मांग राइट टू फेयर कंपनसेशन एंड ट्रांसपेरेंसी इन लैंड एक्विजिशन, रिहैबिलिटेशन एंड रिसेटलमेंट एक्ट, 2013 के आधार पर रखी है, जो ग्रामीण इलाकों में अधिग्रहित ज़मीन के लिए ज़्यादा मुआवज़े और पुनर्वास का प्रावधान करता है.
उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 21, यानी गरिमा के साथ जीने का अधिकार, और अनुच्छेद 300A, यानी संपत्ति के संवैधानिक अधिकार का भी हवाला दिया. उन्होंने कहा कि पारदर्शिता, सहमति और उचित मुआवज़े के बिना ज़मीन नहीं ली जा सकती.
और तेज़ होगा आंदोलन
इस आंदोलन की अगुवाई कर रहे डॉ. रवि कुमार पटेल ने सरकार पर ज़िम्मेदारियों से पीछे हटने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा, ‘सरकार चाहती है कि किसान स्वास्थ्य, शिक्षा, सुविधाओं या भोजन, कपड़े और आश्रय जैसी बुनियादी ज़रूरतों के बिना आदिवासियों की तरह रहें, इसीलिए वे कम से कम मुआवज़े के साथ इस मुद्दे को सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं.’
उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सरकार उनकी मांगों को नज़रअंदाज़ करती रही, तो आंदोलन और तेज़ किया जाएगा तथा किसी भी तरह की स्थिति बिगड़ने की ज़िम्मेदारी अधिकारियों की होगी.
आश्वासन काफी नहीं
रिपोर्ट के अनुसार, यह विरोध प्रदर्शन उस समय हुआ, जब जिले के प्रभारी मंत्री और जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट बुरहानपुर के दौरे पर थे. आंदोलन पर प्रतिक्रिया देते हुए सिलावट ने कहा कि सरकार किसानों की मांगों पर ‘गंभीरता से विचार’ कर रही है.
हालांकि, किसानों ने कहा कि अब सिर्फ आश्वासन काफी नहीं हैं. एक प्रदर्शनकारी ने कहा, ‘हमें फैसले चाहिए, बयान नहीं. जब मुआवजा मिलेगा, तभी हमारा संघर्ष खत्म होगा.’




