2025 में मध्य प्रदेश में 55 बाघों की मौत, 1973 में Project Tiger शुरू होने के बाद सबसे अधिक मौतें

(प्रतीकात्मक फोटो साभार: Pixabay)

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‘Tiger State’ नाम से मशहूर मध्य प्रदेश से एक और बाघ की मौत की खबर आई है. इस बार यह घटना बुंदेलखंड इलाके के सागर जिले में हुई. बाघ की इस मौत के साथ 2025 में अब तक मध्य प्रदेश में बाघों की मौत का आंकड़ा 55 तक पहुंच गया है, जो 1973 में ‘Project Tiger’ अभियान शुरू होने के बाद से किसी भी साल में सबसे ज़्यादा है.

पिछले साल 46 बाघों की मौत हुई, जबकि उससे पिछले तीन सालों में क्रमश: 45, 43 और 34 बाघों की मौत हुई थी.

8 बाघों की मौत बिजली के झटके से

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, अधिकारियों का अनुमान है कि इस साल 55 बाघों की मौत में से 11 मौतें अप्राकृतिक कारणों से हुई हैं. इनमें से अनुमान है कि 8 बाघों की मौत बिजली के झटके से हुई, जो ज़्यादातर जंगली जानवरों से फसलों को बचाने के लिए ग्रामीणों द्वारा लगाए गए अवैध जालों के कारण हुआ. वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि ज़्यादातर मौतें प्राकृतिक कारणों से हुई हैं और यह बाघों की बढ़ती आबादी का नतीजा है.

रिपोर्ट के अनुसार, ‘भारत में बाघों, सह-शिकारियों और शिकार की स्थिति 2022’ के मुताबिक, उस समय राज्य में 785 बाघ थे.

8 से 10 साल है उम्र

ताज़ा घटना में एक नर बाघ, जिसकी उम्र 8 से 10 साल के बीच बताई जा रही है, का शव बुंदेलखंड के सागर इलाके में मिला. अधिकारियों के अनुसार, रविवार (28 दिसंबर) को दक्षिण वन प्रभाग के धना रेंज के हिलगन गांव के पास शव देखा गया.

निवासियों ने वन विभाग को सूचना दी, जिसके बाद अधिकारियों ने सुरक्षा घेरा बनाया और पशु चिकित्सकों को मौके पर बुलाया. वरिष्ठ वन अधिकारियों ने कहा कि ‘शुरुआती जांच में शरीर पर कोई बाहरी चोट के निशान नहीं मिले, हालांकि मौत का कारण जानने के लिए पोस्टमॉर्टम किया जा रहा है’.

विभाग बाघ के मूवमेंट पैटर्न की जांच कर रहा है और यह भी पता लगा रहा है कि क्या वह पहले धना रेंज में आया था. अधिकारियों का मानना ​​है कि जानवर पास के नौरादेही टाइगर रिज़र्व से आया होगा.

मौत के कारण

संभागीय वन अधिकारी वरुण यादव ने कहा, ‘शव एक ऐसे जंगल वाले इलाके में मिला है, जहां पहले बाघों के होने का कोई रिकॉर्ड नहीं है. जानवर पूरी तरह से बड़ा नर लग रहा था, जिसकी उम्र लगभग 8 साल थी. शरीर के सभी अंग सही-सलामत थे और कोई बाहरी चोट नहीं दिख रही थी. शव पर या उसके आस-पास खून के कोई धब्बे नहीं दिखे.’

वन्यजीव सूत्रों ने बताया कि जांच इस बात पर फोकस है कि क्या यह बाघ भी बिजली की बाड़ के संपर्क में आने से मरा और बाद में उसके शव को उस जगह फेंक दिया गया.

बिजली के करंट वाली बाड़

बिजली के करंट वाली बाड़ बाघों के लिए सबसे जोखिम भरे खतरों में से एक है. जंगली सूअर, नीलगाय और दूसरे शाकाहारी जानवरों से फसलों के नुकसान का सामना कर रहे किसान, खेतों के चारों ओर बिजली के तार लगा देते हैं, ये अक्सर कम-वोल्टेज सोलर चार्जर के बजाय डायरेक्ट करंट का इस्तेमाल करते हैं. इन कच्चे सिस्टम में सेफ्टी कटऑफ नहीं होते हैं और ये किसी भी जानवर को छूने पर जानलेवा झटका दे सकते हैं.

न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, ग्रामीण बिजली के जाल खासकर इस वजह से भी लगा रहे हैं, क्योंकि जंगली जानवरों से खराब हुई फसलों के लिए राजस्व विभाग द्वारा दिए जाने वाले मुआवजे की गति और प्रक्रिया बहुत धीमी और जटिल है.

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