महाराष्ट्र में 2025 के पहले नौ महीनों में लोन, फसल खराब होने और ज़्यादा बारिश की वजह से 781 किसानों की आत्महत्या का मामला सामने आया है. यह जानकारी राज्य के राहत और पुनर्वास विभाग के मंत्री मकरंद जाधव (पाटिल) ने गुरुवार को विधान परिषद में एक सवाल के जवाब में दी.
विदर्भ के नागपुर डिवीज़न में 296 किसानों ने आत्महत्या की है और मराठवाड़ा में 212 किसानों ने आत्महत्या की है.
जाधव ने नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) 2023 के आंकड़ों के अनुसार बताया, देश में औसतन हर दो में से एक किसान आत्महत्या महाराष्ट्र में होती है. उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में अब तक दर्ज 6,669 किसान आत्महत्याओं में से 4,150 किसान और 2,519 खेतिहर मज़दूर थे.
क्या कर रही है सरकार
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने राज्य में आत्महत्याओं की बढ़ती संख्या पर एमएलसी सुधाकर अडबल्ले, अशोक जगताप, अभिजीत वंजारी, राजेश राठौड़ और धीरज लिंगाड़े जैसे कई लोगों के सवालों का जवाब दिया.
उन्होंने कहा, ‘किसानों की आत्महत्या रोकने के लिए, उनको को उनकी उपज का सही दाम दिलाने, सिंचाई की सुविधाएं बढ़ाने, फसल/खेती की ज़मीन/पशुधन के नुकसान के लिए किसानों को तुरंत मुआवज़ा देने और ज़िला स्तर पर आपदा राहत केंद्र चलाने जैसे कदम उठाए जा रहे हैं.’
इतने किसान परिवारों को मुआवजा
बीते जुलाई महीने में जाधव ने विधानसभा को बताया था कि अकेले मार्च में मराठवाड़ा और विदर्भ में 250 किसानों की आत्महत्या के मामले सामने आए थे. उन्होंने कहा था कि इनमें से 102 मामले सरकारी मुआवज़े के लिए योग्य पाए गए, 62 मामले अयोग्य पाए गए और 86 मामलों की जांच लंबित है. 102 योग्य मामलों में से 77 परिवारों को 1 लाख रुपये की आर्थिक मदद दी गई थी.
जाधव ने आगे कहा था कि अप्रैल में किसान आत्महत्या के 229 मामले सामने आए थे, जिनमें से 74 मामले मुआवजे के योग्य पाए गए, जबकि 31 को मुआवज़ा देने से मना कर दिया गया. उन्होंने कहा कि बाकी मामलों में मदद देने का प्रक्रिया चल रही है.
सबसे अधिक मामले महाराष्ट्र में
रिपोर्ट के अनुसार, नई दिल्ली में एनसीपी (शरद पवार) की सांसद फौजिया खान ने गुरुवार को राज्यसभा में बताया कि पिछले तीन महीनों में महाराष्ट्र में 766 किसानों ने आत्महत्या की है. खान ने कहा कि किसानों की आत्महत्या के मामले में महाराष्ट्र देश में सबसे आगे है, राज्य सरकार ने विधानसभा को तीन महीनों में 766 मौतों के बारे में बताया है. उन्होंने कहा, ‘इनमें से 676 परिवारों को सरकारी मदद मिली, जबकि 200 को मदद देने से मना कर दिया गया.’
जमीनी हकीकत कुछ और
फौजिया खान ने कहा कि इस साल भारी बारिश और बड़े पैमाने पर बाढ़ के बाद 31,628 करोड़ रुपये के राहत पैकेज की घोषणा की गई थी. इसके बावजूद ज़मीनी हकीकत कुछ और ही है.
उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि यह कोई आम मौसमी झटका नहीं था, बल्कि लाखों किसानों पर असर डालने वाली खेती की एक बड़ी आपदा थी. उन्होंने तर्क दिया कि मौजूदा फसल बीमा योजना के तहत कवरेज अभी भी काफ़ी नहीं है.




