Meitei Man Murder in Manipur: मणिपुर के चुराचांदपुर जिले में कथित सशस्त्र कुकी उग्रवादियों द्वारा मार दिए गए मेईतेई समुदाय (Meitei Community) के व्यक्ति मयंगलम्बम ऋषिकांत के परिवार ने उनका शव लेने से इनकार कर दिया है. उनका कहना है कि जब तक अपराधियों की गिरफ्तारी सहित उनकी सभी मांगें पूरी नहीं हो जातीं, वे उनका शव स्वीकार नहीं करेंगे.
गुरुवार (22 जनवरी) की देर रात मयंगलम्बम ऋषिकांत (Mayanglambam Rishikanta Murder) का शव काकचिंग पुलिस को सौंप दिया गया. इसे फिलहाल इंफाल के जवाहरलाल नेहरू इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के शवगृह में रखा गया है.
38 वर्षीय ऋषिकांत को उनकी मंगेतर के घर से अपहरण कर लिया गया था, जहां वह पिछले एक महीने से रह रहे थे. इसके बाद उनकी हत्या कर दी गई थी. इस घटना से जातीय हिंसा प्रभावित इस राज्य में फिर से सनसनी फैल गई है.
NIA से जांच कराने की मांग
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, ऋषिकांत की हत्या के खिलाफ बीते 22 जनवरी को गठित संयुक्त कार्रवाई समिति (JAC) के संयोजक खुमुकचम प्रदीप ने कहा कि मृतक के परिवार ने उनका शव नहीं लेने का फैसला किया है. जब तक राज्य सरकार उनकी सभी मांगों को पूरा करने का ठोस आश्वासन नहीं देती, वे शव स्वीकार नहीं करेंगे.
परिवार की कुछ प्रमुख मांगों में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को मामले की जांच सौंपना, अपराधियों को पकड़ने और परिवार को मुआवजा देना आदि शामिल है. JAC ने ये मांगें पूरी करने के लिए सरकार को 72 घंटे का अल्टीमेटम दिया है, ऐसा न करने पर उन्होंने नागरिक निकायों के समर्थन से आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी है.
10 लाख रुपये का मुआवज़ा
JAC संयोजक ने शुक्रवार को कहा, ‘हालांकि दो मांगें, जिनमें ऋषिकांत का शव सौंपना और मामले को NIA को ट्रांसफर करना शामिल है, पूरी हो चुकी हैं, लेकिन हमें राज्य से ठोस आश्वासन की जरूरत है कि हमारी सभी मांगें पूरी की जाएंगी और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी.’
रिपोर्ट के अनुसार, इसके बाद शुक्रवार शाम को सरकार ने एक प्रेस बयान में मृतक के परिवार के लिए 10 लाख रुपये के मुआवजे की घोषणा की.
इधर, ऋषिकांत के चचेरे भाई सनायई ने कहा, ‘हम इस बारे में सोच-विचार करने के लिए समय-समय पर JAC के साथ बैठेंगे और उसके अनुसार अपने अगले कदम की योजना बनाएंगे.’
हत्यारों की तलाश जारी
वहीं, ऋषिकांत की हत्या में शामिल उग्रवादियों की तलाश दूसरे दिन भी जारी रही. पुलिस ने कहा कि घटना सामने आने के तुरंत बाद राज्य और केंद्रीय सैनिकों सहित एक संयुक्त बल ने नटजंग क्षेत्र में एक गहन अभियान चलाया. पुलिस ने शुक्रवार (23 जनवरी) को कहा कि चुराचांदपुर के खोइरेंटक इलाके में आगे की कार्रवाई जारी है.
ऋषिकांत को हथियारबंद कुकी उग्रवादियों ने तुईबुओंग मुख्यालय क्षेत्र में उनकी मंगेतर चिंगनू हाओकिप के घर से अपहरण कर लिया था. बाद में उनका शव नटजंग इलाके से बरामद किया गया.
ऋषिकांत मूल रूप से मेईतेई-बहुल घाटी के काकचिंग खुनोउ का रहने वाले थे. वह पिछले एक महीने से अपनी मंगेतर, जो कुकी-ज़ो समुदाय (Kuki-Zo Community) से है, के साथ रह रहे थे.
ये भी पढ़ें: Manipur Ethnic Violence: विस्थापित मेईतेई समुदाय का दिल्ली में धरना, कहा- सरकार ने पर्याप्त कदम नहीं उठाए
हत्या करने का वीडियो वायरल
इंडियन एक्सप्रेस की एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार, बीते 21 जनवरी की देर रात सामने आए एक वीडियो में ऋषिकांत को अंधेरे में जमीन पर बैठे देखा जा सकता है. 1 मिनट 12 सेकंड के वीडियो में ‘कोई शांति नहीं, कोई लोकप्रिय सरकार नहीं’ लिखा हुआ है, जो राज्य में एक लोकप्रिय सरकार को बहाल करने के प्रयासों का संदर्भ है.
हालांकि इसमें कोई आवाज़ नहीं है, लेकिन उस व्यक्ति को कुछ लोगों से हाथ जोड़कर विनती करते हुए देखा जा सकता है, जो वीडियो में दिखाई नहीं दे रहे हैं, जब तक कि उस पर दो गोलियां नहीं चलाई जातीं. फिर ऋषिकांत का शरीर जमीन पर निश्चल पड़ा देखा जा सकता है.
राष्ट्रपति शासन के एक साल
यह हत्या मणिपुर (Manipur Violence) में अपेक्षाकृत शांति के समय हुई है. राज्य में राष्ट्रपति शासन को 14 फरवरी को एक साल पूरा हो जाएगा और राज्य में सरकार बनाने पर सहमति बनाने के लिए बातचीत और प्रयास जारी हैं.
पिछले हफ्ते हुई एक बैठक में कुकी-ज़ो विद्रोही समूहों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया, जो सस्पेंशन ऑफ़ ऑपरेशन (SoO) समझौतों पर हस्ताक्षर करने वाले हैं, साथ ही समुदाय के विधायकों और कुकी-ज़ो काउंसिल नाम के एक सिविल सोसाइटी संगठन ने भी हिस्सा लिया.
राजनीतिक प्रतिबद्धता
राज्य में नई सरकार बनाने के लिए शर्तें तय करते हुए एक प्रस्ताव पारित किया गया. इसमें राज्य और केंद्र सरकारों द्वारा राज्य के कुकी-ज़ो-बहुल क्षेत्रों के लिए एक अलग केंद्र शासित प्रदेश पर लिखित ‘राजनीतिक प्रतिबद्धता’ और मौजूदा विधानसभा के नियमित कार्यकाल की समाप्ति से पहले एक समझौते को अंतिम रूप देना शामिल था, जो 2027 में खत्म होगा.
प्रमुख SoO समूहों में से एक कुकी नेशनल ऑर्गनाइजेशन ने बीते 22 जनवरी को एक बयान जारी कर कहा कि वे इस घटना में शामिल नहीं थे. संगठन ने कहा कि ‘किसी भी परिस्थिति में हमारे लोगों के किसी भी समुदाय के जीवनसाथी को ऐसी गतिविधि का शिकार नहीं बनाया जाता है’.
मालूम हो कि मेईतेई और कुकी समुदाय के बीच मई 2023 में जातीय हिंसा ज़मीन के अधिकार और राजनीतिक प्रतिनिधित्व जैसे कई मुद्दों पर शुरू हुई थी. इस हिंसा में कम से कम 260 से ज़्यादा लोग मारे गए हैं और लगभग 50,000 लोग विस्थापित हुए हैं.




