मध्य प्रदेश के शहडोल जिले में बीते सोमवार (2 फरवरी) को बिजली का झटका लगने से एक बाघ और एक बाघिन की मौत हो गई, जिससे इस साल राज्य में बाघों की मौत का आंकड़ा 9 हो गया है.
प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) सुभरंजन सेन ने बताया कि दोनों शव जिला मुख्यालय से लगभग 75 किलोमीटर दूर उत्तरी शहडोल वन प्रभाग में खेती की ज़मीन पर 100 मीटर से भी कम दूरी पर मिले.
सेन ने कहा, ‘बाघों की मौत बिजली का करंट लगने से हुई. इस घटना में इस्तेमाल किए गए तार बरामद कर लिए गए हैं. इन दो मौतों के साथ इस साल 1 जनवरी से अब तक मध्य प्रदेश में 9 बाघों की मौत हो चुकी है. इनमें से 7 मौतें जनवरी में हुई थीं.’
54 बाघों की मौत
एक और अधिकारी ने बताया कि किसान फसलों को शाकाहारी जानवरों से बचाने के लिए ऐसे बिजली के जाल बिछाते हैं, लेकिन अक्सर इनमें बाघ फंसकर करंट लगने से मर जाते हैं.
ये मौतें मध्य प्रदेश हाईकोर्ट द्वारा 20 जनवरी को वन्यजीव कार्यकर्ता अजय दुबे की याचिका पर केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस जारी करने के कुछ ही दिनों बाद हुई हैं.
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अपनी याचिका में दुबे ने दावा किया कि साल 2025 में राज्य में 54 बाघों की मौत हुई, जो प्रोजेक्ट टाइगर की शुरुआत के बाद से दर्ज की गई सबसे ज़्यादा सालाना मौतें हैं और इनमें से आधे से ज़्यादा मौतें अप्राकृतिक कारणों से हुई हैं.
प्रशासनिक लापरवाही का आरोप
दुबे ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया कि हाईकोर्ट 11 फरवरी को इस मामले की सुनवाई फिर से करेगा. उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) और राज्य के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर शहडोल घटना में प्रशासनिक लापरवाही का आरोप लगाया है.
दुबे ने कहा कि उन्होंने वन्यजीव प्रशासन में बड़े बदलाव की मांग की है.
अपनी शिकायत में दुबे ने आरोप लगाया कि ये मौतें सिस्टम की नाकामी को दिखाती हैं और उन्होंने वरिष्ठ वन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की.
मध्य प्रदेश में देश में सबसे ज़्यादा बाघ हैं. NTCA की वेबसाइट के अनुसार, इस साल 1 जनवरी से 26 जनवरी के बीच देश में कुल 19 बाघों की मौत हुई है. वेबसाइट के अनुसार, 26 जनवरी को आखिरी मामला मध्य प्रदेश के पेंच टाइगर रिजर्व के बफर जोन में सामने आया था.




