ऑस्ट्रेलिया ने भारत में नकली रेबीज़ वैक्सीन Abhayrab के बारे में चेतावनी दी, कंपनी ने कहा- सिर्फ एक बैच में थी गड़बड़ी

(प्रतीकात्मक फोटो साभार: Pixabay)

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ऑस्ट्रेलिया ने एक हेल्थ एडवाइज़री जारी कर चेतावनी दी है कि नवंबर 2023 से भारत में रेबीज़ वैक्सीन के नकली इंजेक्शन सर्कुलेट हो रहे हैं. ऑस्ट्रेलियन टेक्निकल एडवाइज़री ग्रुप ऑन इम्यूनाइज़ेशन (ATAGI) द्वारा जारी अलर्ट में चेतावनी दी गई है कि Abhayrab ब्रांड की वैक्सीन लगवाने वाले लोगों को रेबीज़ से पूरी तरह सुरक्षा नहीं मिल सकती है.

बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, इस चेतावनी ने भारत में रेबीज़ की रोकथाम पर फिर से ध्यान दिलाया है, जो दुनिया में सबसे ज़्यादा रेबीज़ वाले देशों में से एक है और जहां कुत्तों के काटने के मामले लगातार बढ़ रहे हैं.


लोग सुरक्षित नहीं

ATAGI के अनुसार, चिंता की बात यह है कि नकली वैक्सीन में सही मात्रा में या बिल्कुल भी, एक्टिव इंग्रीडिएंट नहीं हो सकता है. इसका मतलब है कि जिन लोगों को ये डोज़ लगी हैं, उन्हें लग सकता है कि वे सुरक्षित हैं, जबकि वे नहीं हैं, भले ही उन्होंने बताए गए प्रोटोकॉल का पालन किया हो, जिसमें हाई-रिस्क मामलों में रेबीज इम्यूनोग्लोबुलिन (RIG) देना भी शामिल है.

ऑस्ट्रेलिया में Abhayrab का इस्तेमाल नहीं होता है, इसलिए यह एडवाइज़री मुख्य रूप से उन यात्रियों के लिए है, जिन्हें नवंबर 2023 के बाद भारत में वैक्सीन लगी थी. ऑस्ट्रेलियाई अधिकारियों ने ऐसे लोगों को सलाह दी है कि वे उन डोज़ को संभावित रूप से अवैध मानें और उनकी जगह Rabipur या Verorab जैसी रजिस्टर्ड वैक्सीन लगवाएं.


30 मिनट में एक मौत

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, भारत में हर साल अनुमानित 18,000-20,000 रेबीज़ से मौतें होती हैं, जिनमें से ज़्यादातर कुत्तों के काटने से होती हैं. इसका मतलब है कि हर 30 मिनट में लगभग एक मौत होती है.

रेबीज़ एक ऐसी बीमारी है, जिसके लक्षण दिखने के बाद यह लगभग हमेशा जानलेवा होती है और इसका कोई भरोसेमंद इलाज नहीं है. जान बचाने के लिए लगभग पूरी तरह से तुरंत और सही पोस्ट-एक्सपोज़र केयर पर निर्भर रहना पड़ता है, जिसमें घाव को अच्छी तरह धोना, समय पर वैक्सीनेशन, सही शेड्यूल का पालन करना और गंभीर मामलों में रेबीज़ इम्यूनोग्लोबुलिन (rabies immunoglobulin) का इस्तेमाल शामिल है.

रेबीज़ की रोकथाम में कमजोरियां

रिपोर्ट के अनुसार, महाराष्ट्र में ठाणे की एक छह साल की बच्ची का हालिया मामला, जिसकी कथित तौर पर वैक्सीन की चार डोज़ लगने के बावजूद रेबीज़ से मौत हो गई, ने रेबीज़ की रोकथाम में कमज़ोरियों को और उजागर किया है.

हालांकि जांच जारी है और अभी कोई नतीजा निकालना जल्दबाजी होगी, लेकिन इसमें शामिल डॉक्टरों ने अलग-अलग बातें बताई हैं. एक विशेषज्ञ ने सुझाव दिया कि रेबीज़ इम्यूनोग्लोबुलिन शायद नहीं दिया गया था, जबकि नगर निगम के स्वास्थ्य अधिकारियों ने कहा कि यह दिया गया था.

यह मामला बताता है कि रेबीज़ से बचाव सिर्फ ‘वैक्सीन लगवाने’ तक ही सीमित नहीं है, बल्कि सही समय पर, सही वैक्सीन लगवाना और साथ में सही इलाज करवाना भी ज़रूरी है. इस प्रक्रिया में कोई भी रुकावट, जैसे कि देरी, डोज़ छूट जाना, गलत तरीके से स्टोर करना, घाव की ठीक से देखभाल न करना या नकली प्रोडक्ट का इस्तेमाल, सुरक्षा को खत्म कर सकता है.


रिप्लेसमेंट डोज़ लेने की सलाह

ऑस्ट्रेलियाई एडवाइज़री रेबीज़ वैक्सीनेशन के रिकॉर्ड रखने की अहमियत पर ज़ोर देती है. अगर किसी व्यक्ति को नवंबर 2023 के बाद Abhayrab वैक्सीन लगी है, या अगर लगाई गई वैक्सीन का ब्रांड पता नहीं है, तो ATAGI हेल्थकेयर प्रोवाइडर से सलाह लेने की सलाह देता है. डॉक्टर वेरिफाइड रेबीज़ वैक्सीन का इस्तेमाल करके रिप्लेसमेंट डोज़ लेने की सलाह दे सकते हैं.

जिन लोगों को भारत के बाहर वैक्सीन लगी है, या जिनके पास दूसरे मान्यता प्राप्त रेबीज़ वैक्सीन के इस्तेमाल के स्पष्ट दस्तावेज हैं, उन पर इस एडवाइज़री का कोई असर नहीं होगा.


कंपनी ने क्या कहा

Abhayrab को हैदराबाद स्थित इंडियन इम्यूनोलॉजिकल्स लिमिटेड (IIL) के एक डिवीज़न, ह्यूमन बायोलॉजिकल्स इंस्टिट्यूट द्वारा बनाया जाता है. हाल ही में जारी एक बयान में बनाने वालों ने कहा कि जनवरी 2025 में IIL ने खुद ही एक खास बैच (बैच # KA 24014) में पैकेजिंग में एक गड़बड़ी का पता लगाया.

कंपनी ने तुरंत भारतीय नियामकों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों को सूचित किया, एक औपचारिक शिकायत दर्ज की और जल्द कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए अधिकारियों के साथ मिलकर काम किया.

40% बाजार हिस्सेदारी

कंपनी ने कहा, ‘हम इस बैच से जुड़ी समस्या को जल्द से जल्द खत्म करने के लिए नियामक प्राधिकरण और कानून लागू करने वाली एजेंसियों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं और जांच में मदद के लिए एक औपचारिक शिकायत दर्ज की गई है.’

कंपनी ने यह भी कहा, ‘अभयरैब का निर्माण IIL साल 2000 से कर रही है, जिसके 21 करोड़ से ज़्यादा डोज़ पूरे भारत और 40 देशों में सप्लाई किए गए हैं और भारत में इसकी 40% बाजार हिस्सेदारी बनी हुई है.’

स्टैंडर्ड क्वालिटी

IIL ने इस बात पर ज़ोर दिया कि भारत में बनने वाले वैक्सीन के हर बैच को बिक्री या इस्तेमाल के लिए उपलब्ध कराने से पहले सेंट्रल ड्रग्स लेबोरेटरी (भारत सरकार) द्वारा टेस्ट किया जाता है और मंज़ूरी दी जाती है. सरकारी संस्थानों और अधिकृत डिस्ट्रीब्यूटरों के ज़रिये की गई सप्लाई सुरक्षित और स्टैंडर्ड क्वालिटी की होती है.

IIL के वाइस प्रेसिडेंट और क्वालिटी मैनेजमेंट के हेड सुनील तिवारी ने कहा, ‘IIL का मकसद स्टेकहोल्डर्स को यह भरोसा दिलाना है कि कंपनी के फार्माकोविजिलेंस और क्वालिटी सिस्टम मज़बूत हैं और लोग IIL और उसके अधिकृत चैनलों द्वारा सीधे सप्लाई की जाने वाली वैक्सीन पर भरोसा करना जारी रख सकते हैं.’

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