राजस्थान: 7 सालों में अवैध खनन को लेकर 7,000 से अधिक केस दर्ज, अकेले अरावली ज़िलों में 4,000 से ज़्यादा एफआईआर

(प्रतीकात्मक फोटो साभार: Pixabay)

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पिछले सात सालों में राजस्थान में अवैध खनन, ट्रांसपोर्टेशन, स्टॉक वगैरह के सिलसिले में 7,173 एफआईआर दर्ज की गई हैं, जिनमें से 4,181 मामले अकेले अरावली से जुड़े जिलों में दर्ज की गई हैं.

पिछले सात सालों में राज्य में अवैध खनन के 71,322 मामले सामने आए हैं – इनमें बड़े और छोटे दोनों तरह के उल्लंघन शामिल हैं, जिनमें से कई मामलों में पुलिस केस के बजाय चालान से निपटा जाता है. इनमें से 40,175 मामले अकेले अरावली जिलों से सामने आए हैं.

माफिया के खिलाफ कार्रवाई

कांग्रेस के पांच साल के शासन और बीजेपी सरकार के दो साल के आंकड़ों की तुलना करते हुए, भाजपा प्रवक्ता और तीन बार विधायक रहे रामलाल शर्मा ने कहा, ‘राजस्थान सरकार और मुख्यमंत्री का यह साफ इरादा है कि अरावली में एक भी पत्थर को नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा.’ उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने पिछले दो सालों में ‘अवैध खनन और खनन माफिया के खिलाफ’ निर्णायक कार्रवाई की है.


इतनी एफआईआर दर्ज

द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने बताया कि कांग्रेस शासन के दौरान अरावली ज़िलों में अवैध खनन गतिविधियों के लिए 3,179 एफआईआर दर्ज की गईं, जबकि BJP सरकार के दो सालों में 1,002 एफआईआर दर्ज की गई हैं.

रिपोर्ट किए गए मामलों और दर्ज की गई एफआईआर के बीच अंतर पर खान और पेट्रोलियम विभाग के प्रधान सचिव टी. रविकांत ने कहा, ‘रिपोर्ट किए गए मामलों का मतलब है, ऐसे सभी मामले जिनमें खनन विभाग ने खुद कार्रवाई की, जैसे नोटिस देना, जुर्माना लगाना वगैरह – जो एक तरह की सज़ा भी है, जबकि एफआईआर सिर्फ वे मामले हैं जो पुलिस स्टेशन में दर्ज किए गए हैं.’


अरावली बेल्ट में 20 जिले

शर्मा द्वारा साझा किए गए आधिकारिक आंकड़ों से पता चलता है कि 15 दिसंबर, 2018 से 14 दिसंबर, 2023 के बीच अरावली जिलों में अवैध खनन के 29,209 मामले सामने आए, जबकि भजनलाल शर्मा सरकार के पहले दो सालों में 15 दिसंबर 2023 से 15 दिसंबर 2025 तक यह आंकड़ा 10,966 था. राजस्थान के अरावली बेल्ट में 20 जिले हैं.

उन्होंने कहा कि रिपोर्ट किए गए मामलों में अवैध खनन, ट्रांसपोर्टेशन और स्टोरेज शामिल हैं और अगर हमला, चोरी वगैरह होती है तो एफआईआर दर्ज हो सकती है. उन्होंने कहा, ‘इसलिए एफआईआर कम हैं.’

इस साल की शुरुआत में विपक्ष के नेता टीकाराम जूली के विधानसभा सवाल के जवाब में सरकार ने कहा था कि 2024 में ‘खनन माफिया’ द्वारा 311 अधिकारियों और कर्मचारियों पर 93 हमले हुए थे.


जुर्माना और गिरफ्तारी

कुल मिलाकर पिछले सात सालों में राज्य में 637.16 करोड़ रुपये का जुर्माना वसूला गया है. इसमें से 231.75 करोड़ रुपये कांग्रेस शासन के दौरान अरावली जिलों से वसूले गए थे और 136.78 करोड़ रुपये मौजूदा बीजेपी सरकार के तहत वसूले गए हैं.

पिछले सात सालों में पूरे राज्य में अवैध खनन के लिए 3,736 लोगों को गिरफ्तार किया गया है; इनमें से 1,415 लोगों को अशोक गहलोत सरकार के दौरान अरावली जिलों से और 300 लोगों को शर्मा सरकार के दौरान गिरफ्तार किया गया था.


गाड़ियां और मशीनें जब्त

इसके अलावा पिछले सात सालों में पूरे राज्य से 70,399 गाड़ियां, मशीनें वगैरह जब्त की गई हैं. इनमें से 29,138 गाड़ियां कांग्रेस शासन के दौरान अरावली जिलों से और 10,616 गाड़ियां बीजेपी सरकार के दौरान जब्त की गईं.

रिपोर्ट के अनुसार, पिछले कुछ दशकों से खनन, चाहे वह कानूनी हो या अवैध और दूसरी विकास गतिविधियों की वजह से पहाड़ियों पर पहले से ही बहुत ज़्यादा दबाव है, ऐसे में नई परिभाषा ने राजस्थान और उसके बाहर भी बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए हैं.

अरावली की नई परिभाषा

नई परिभाषा के अनुसार, कोई भी ज़मीन का हिस्सा जो स्थानीय इलाके से 100 मीटर या उससे ज़्यादा ऊंचाई पर है, उसे अरावली पहाड़ियों का हिस्सा माना जाएगा, साथ ही उसकी ढलानों और आसपास की ज़मीन को भी. इस परिभाषा को पर्यावरण सचिव के तहत बनी एक समिति ने प्रस्तावित किया था और 20 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने इसे मंज़ूरी दी थी.

इस मंजूरी से यह डर पैदा हो गया है कि इससे अरावली पहाड़ियों में खनन शुरू हो जाएगा, हालांकि पर्यावरण मंत्रालय ने कहा है कि 20 नवंबर के आदेश के अनुसार, जब तक कोई वि​स्तृत अध्ययन नहीं हो जाता, तब तक कोई नया खनन पट्टे की अनुमति नहीं दी जाएगी.

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