मध्य प्रदेश: इंदौर में कथित तौर पर दूषित पानी पीने से कम से कम 7 लोगों की मौत, 100 से अधिक अस्पताल में भर्ती

(प्रतीकात्मक फोटो साभार: Pixabay)

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देश में सबसे स्वच्छ शहर का तमगा हासिल करने वाले मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में पिछले कुछ दिनों में कथित तौर पर दूषित पानी पीने के कारण कम से कम सात लोगों की मौत हो गई है और 100 से ज़्यादा लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है.

इंदौर शहर के मेयर पुष्यमित्र भार्गव ने ज़िम्मेदारी लेते हुए कहा, ‘तीन मौतों की आधिकारिक पुष्टि हो गई है, लेकिन हमें चार और लोगों के बारे में भी जानकारी मिली है.’ उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी.

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, स्वास्थ्य अधिकारियों ने मृतकों में नंदलाल पाल (70 वर्ष), उर्मिला यादव (60 वर्ष) और तारा कोरी (65 वर्ष) की पहचान की है, जिनकी कथित तौर पर डायरिया से मौत हुई है.

घरों का सर्वे किया गया

स्वास्थ्य विभाग ने 2,703 घरों का सर्वे किया, लगभग 12,000 लोगों की जांच की और हल्के लक्षणों वाले 1,146 मरीजों को शुरुआती इलाज दिया. कुल 111 गंभीर मरीजों को अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जिनमें से 18 को इलाज के बाद डिस्चार्ज कर दिया गया है.

मुख्य चिकित्सा और स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. माधव प्रसाद हसानी ने कहा, ‘मरीजों ने बताया कि दूषित पानी पीने के बाद उन्हें उल्टी, दस्त और डिहाइड्रेशन हुआ.’

भागीरथपुरा में कई मेडिकल टीमें और एम्बुलेंस तैनात की गई हैं. अधिकारियों ने लैब टेस्टिंग के लिए पानी के सैंपल लिए हैं, जबकि शुरुआती जांच से पता चलता है कि पीने के पानी की सप्लाई में नाले का पानी मिल गया होगा.

मामले की जांच जारी

नगर आयुक्त दिलीप कुमार यादव ने बताया कि भागीरथपुरा में मेन पानी की सप्लाई पाइपलाइन में लीकेज का पता चला है, जहां पाइप के ऊपर एक टॉयलेट बनाया गया था. इस मामले की जांच की जा रही है कि कहीं यही प्रदूषण का कारण तो नहीं है. वहीं, मेयर भार्गव ने कहा कि पानी के इंफ्रास्ट्रक्चर के रखरखाव में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.

स्थानीय पार्षद कमल बघेला ने निवासियों की शिकायतों पर ध्यान दिलाया कि 25 दिसंबर को सप्लाई किए गए पानी में अजीब गंध आ रही थी. उन्होंने कहा, ‘यह पानी पीने के बाद लोग बीमार पड़ सकते हैं. पानी कैसे दूषित हुआ, यह सिर्फ लैब रिपोर्ट से ही पता चलेगा.’

नगर निगम ने कार्रवाई नहीं की

स्थानीय निवासियों का आरोप है कि बदबूदार और अजीब स्वाद वाले पानी के बारे में बार-बार शिकायतें करने के बावजूद नगर निगम अधिकारियों ने कोई कार्रवाई नहीं की. मृतक नंदलाल पाल के बेटे सिद्धार्थ ने कहा, ‘मेरे पिता की मंगलवार (30 दिसंबर) सुबह मौत हो गई.’

उन्होंने बताया कि उनके पिता को 28 दिसंबर को उल्टी और दस्त होने के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था, आरोप है कि उन्होंने दूषित पानी पिया था. इलाके के दूसरे लोगों ने भी ऐसी ही बातें बताईं.

संभालने का मौका नहीं मिला

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, जितेंद्र प्रजापत ने अपनी बहन सीमा प्रजापत (50 वर्ष) की मौत के बारे में बताया, ‘मेरी बहन को अचानक उल्टी और दस्त होने लगे और हमें हालात संभालने का मौका भी नहीं मिला. अस्पताल ले जाते समय रास्ते में ही उनकी मौत हो गई.’ कई प्रभावित लोगों ने बताया कि बीमारी फैलने से कुछ दिन पहले उनके घरों में आने वाले पानी के स्वाद और गंध में बदलाव आया था.

जितेंद्र प्रजापत ने यह भी बताया कि हाल के दिनों में पानी का स्वाद ‘कड़वा’ लग रहा था, जिससे यह शक हुआ कि शायद पानी में ज़्यादा प्यूरिफिकेशन केमिकल मिलाए गए थे. चंद्रकला यादव ने बताया कि उनकी सास उर्मिला यादव (70 वर्ष) को 27 दिसंबर को पानी पीने के बाद दस्त हो गए और अगले दिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई.

दो अन्य निवासी, मंजुला दिगंबर वधे (74 वर्ष) और उमा कोरी (29 वर्ष) की भी कथित तौर पर दूषित पानी से दस्त होने के बाद मौत हो गई. उमा कोरी के पति, बिहारी कोरी ने भविष्य में ऐसी त्रासदियों को रोकने के लिए एक गहन जांच की ज़रूरत पर ज़ोर दिया.

मुख्यमंत्री ने दुख जताया

घटना को लेकर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने दुख जताया और हर पीड़ित परिवार को 2 लाख रुपये की आर्थिक मदद देने की घोषणा की. राज्य सरकार प्रभावित लोगों के इलाज का खर्च उठाएगी. शहर प्रशासन ने मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए भागीरथपुरा के निवासियों के लिए अरबिंदो अस्पताल में 100 अतिरिक्त बेड का इंतज़ाम किया है.

मुख्यमंत्री ने लापरवाही के लिए ज़िम्मेदार संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश भी दिए. इसके बाद दो अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है, जबकि एक को नौकरी से निकाल दिया गया है.

2 अधिकारी निलंबित, एक की नौकरी गई

समाचार एजेंसी ANI के अनुसार, इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा ने बताया कि ज़ोनल ऑफिसर शालिग्राम सितोले और असिस्टेंट इंजीनियर योगेश जोशी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है, जबकि इंचार्ज सब-इंजीनियर (PHE) शुभम श्रीवास्तव को नौकरी से निकाल दिया गया है.

इसके अलावा, पूरे मामले की जांच के लिए तीन सदस्यों की एक समिति भी बनाई गई है. यह समिति IAS नवजीवन पंवार के निर्देश पर जांच करेगी. समिति में सुपरिटेंडेंट इंजीनियर प्रदीप निगम और मेडिकल कॉलेज के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. शैलेश राय को शामिल किया गया है.

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