भले ही राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका के सैन्य बजट में 50 प्रतिशत से ज़्यादा की बढ़ोतरी की मांग की हो, लेकिन संयुक्त राष्ट्र (United Nations) के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने चेतावनी दी है कि दुनिया भर की सरकारों द्वारा हथियारों और गोला-बारूद पर खर्च बढ़ाने से समाज कल्याण के कार्यों में खर्च होने वाला पैसा कम हो रहा है, जिससे वैश्विक वृद्धि/विकास ‘कमज़ोर’ बनी हुई है, जो कोरोना महामारी से पहले के स्तर से बहुत कम है.
गुटेरेस ने बीते गुरुवार (8 जनवरी) को जारी संयुक्त राष्ट्र की वर्ल्ड इकोनॉमिक सिचुएशन एंड प्रॉस्पेक्ट्स रिपोर्ट 2026 में लिखा, ‘रणनीतिक प्रतिद्वंद्विता बहुपक्षवाद को कम कर रही है और बाजारों को बांट रही है, जिससे वैश्विक व्यापार और निवेश में रुकावटें आ रही हैं.’
हथियारों पर ज़्यादा खर्च
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, यह रिपोर्ट संयुक्त राष्ट्र के डिपार्टमेंट ऑफ इकोनॉमिक एंड सोशल अफेयर्स (DESA) ने इस संगठन की दूसरी संस्थाओं के साथ मिलकर तैयार की है.
गुटेरेस ने आगे कहा, ‘ज़रूरी खनिजों के लिए कड़ी प्रतिद्वंद्विता कमज़ोर शासन और सामाजिक सामंजस्य का फ़ायदा उठा रही है, जिससे प्रभावित समुदायों में अनिश्चितता और बंटवारा बढ़ रहा है. और बढ़ता सैन्य खर्च समाज कल्याण के मद में होने वाले खर्च को कम कर रहा है, क्योंकि देश शांति में निवेश करने के बजाय युद्ध के हथियारों पर ज़्यादा खर्च कर रहे हैं.’
अमेरिकी सैन्य बजट
संयुक्त राष्ट्र महासचिव António Guterres की यह चेतावनी तब आई है, जब डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर पोस्ट किया था कि उन्होंने अमेरिकी सांसदों के साथ बातचीत की है और ‘यह तय किया है कि साल 2027 के लिए उनका सैन्य बजट 1 ट्रिलियन डॉलर नहीं, बल्कि 1.5 ट्रिलियन डॉलर होना चाहिए’.
अमेरिकी राष्ट्रपति ने आगे कहा था कि अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ से होने वाली कमाई से ऐसे सैन्य बजट (Military Budget) को मंज़ूरी मिल सकती है. अमेरिकी कांग्रेस ने 2026 के लिए 901 अरब डॉलर के बजट को मंज़ूरी दी है.
सबसे बड़ी सालाना बढ़ोतरी
संयुक्त राष्ट्र की इस रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में वैश्विक सैन्य खर्च में 2.7 ट्रिलियन डॉलर की बढ़ोतरी ‘कम से कम 1988 के बाद से सबसे बड़ी सालाना बढ़ोतरी’ को दिखाती है. संयुक्त राष्ट्र ने कहा कि यह बढ़ोतरी दुनिया के 10 सबसे बड़े खर्च करने वाले देशों की वजह से हुई है, जो कुल खर्च का लगभग 75 प्रतिशत हैं.
संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी कि रक्षा खर्च में यह बढ़ोतरी कमजोर अर्थव्यवस्थाओं में मानव पूंजी, बुनियादी ढांचा और विकास सहयोग में लंबे समय के निवेश से पैसा हटाने का खतरा पैदा करती है.
भारत का विकास अनुमान
विकास के मामले में संयुक्त राष्ट्र ने बीते 8 जनवरी को कैलेंडर वर्ष 2026 के लिए भारत के विकास अनुमान को 20 बेसिस पॉइंट्स (bps) बढ़ाकर 6.6 प्रतिशत कर दिया है और 2027 में विकास में थोड़ी और तेज़ी आने का अनुमान है, जो 6.7 प्रतिशत हो जाएगी.
कैलेंडर वर्ष 2025 के लिए संयुक्त राष्ट्र ने भारत की विकास दर 7.4 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है, जो मार्च 2026 में खत्म होने वाले वित्त वर्ष के लिए भारत सरकार के पहले एडवांस अनुमान के बराबर है.
भारतीय सांख्यिकी मंत्रालय के 2025-26 के GDP के पहले एडवांस अनुमान के मुताबिक, वित्त वर्ष के पहले छह महीनों में 8 प्रतिशत की तुलना में दूसरे छह महीनों में विकास दर धीमी होकर 6.9 प्रतिशत हो जाएगी.




