NSA evoked against Assam activist Pranab Doley: असम में जमीन के अधिकारों के लिए लड़ने वाले कार्यकर्ता प्रणब डोले पर राज्य सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) लगा दिया है. सरकार का कहना है कि उनकी गतिविधियां ‘जन-व्यवस्था बनाए रखने और राज्य की सुरक्षा के लिए हानिकारक’ हैं. बता दें कि एक स्थानीय अदालत से ज़मानत मिलने के एक दिन बाद 30 जुलाई को उनके ख़िलाफ़ ये क़दम उठाया गया है.
विरोध-प्रदर्शनों की अगुवाई
आदिवासी समुदाय से आने वाले 40 वर्षीय प्रणब डोले एक जाने-माने ज़मीन के अधिकारों के लिए लड़ने वाले कार्यकर्ता हैं. उन्हें असम की गोलाघाट पुलिस (Golaghat Police) ने बीते 12 जुलाई को गिरफ़्तार किया था. यह गिरफ़्तारी काज़ीरंगा नेशनल पार्क (Kaziranga National Park) से सटे इंग्ले पाथर (Inglay Pathar) में एक प्रस्तावित लग्ज़री होटल परियोजना (Luxury Hotel Project) के ख़िलाफ़ कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों की ओर से बीते 28 जून को हुए विरोध-प्रदर्शन के सिलसिले में हुई थी.
इस मामले में चार और अधिकार कार्यकर्ताओं को भी गिरफ़्तार किया गया था. प्रणब पिछले कई सालों से इस परियोजना के ख़िलाफ़ विरोध-प्रदर्शनों की अगुवाई कर रहे हैं. वे इस परियोजना से पर्यावरण पर पड़ने वाले संभावित असर और आदिवासी ग्रामीणों के विस्थापन को लेकर चिंता ज़ाहिर करते रहे हैं.
FIR में आरोप
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने अपनी FIR में आरोप लगाया है कि प्रणब और ‘करीब 50 अन्य लोग’ योजना बनाकर ‘घातक हथियारों जैसे कि बड़ा चाकू (Machete), कील लगी लाठियों वगैरह से लैस होकर’ परियोजना वाली जगह के अंदर ‘बिना अनुमति घुस गए’. उन्होंने वहां मौजूद सीमेंट मिक्सर में ‘आग लगाने की कोशिश की’ और ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों पर हमला किया. साथ ही प्रणब और अन्य लोगों ने ‘भीड़ को उकसाया’ और आगे भी आंदोलन करने की ‘धमकी दी’.
ज़मानत आदेश में क्या कहा गया
29 जुलाई को प्रणब डोले को ज़मानत देते हुए गोलाघाट के एक अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने कहा कि इन आरोपों को साबित करने वाला कोई वीडियो फ़ुटेज शुरुआती तौर पर नहीं मिला है और जांच के दौरान जांच अधिकारी ने कोई ‘जानलेवा हथियार’ भी ज़ब्त नहीं किया है.
दिलचस्प बात यह है कि प्रणब को जांच में सहयोग करने की शर्त पर ज़मानत देने का आदेश देते हुए जज ने अपने आदेश में कहा था, ‘ऐसे मामलों में जहां पर्यावरण संरक्षण और मूल निवासियों (Indigenous People) के अस्तित्व का सवाल एक-दूसरे से जुड़े हों, वहां स्थानीय लोगों की चिंताओं को दबाने के लिए आपराधिक कानून के सामान्य तरीकों का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता. असली जन-व्यवस्था प्रभावित लोगों की आवाज़ दबाने से नहीं, बल्कि उनकी बात सुनने से कायम होती है.’
बातचीत के ज़रिये समाधान
अदालत ने आदेश में आगे कहा, इसलिए, आरोपी की व्यक्तिगत स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए उसे ज़मानत देते हुए यह अदालत उम्मीद करती है कि मूल समस्या का समाधान टकराव के बजाय सभी संबंधित पक्षों को शामिल करके एक व्यवस्थित और शांतिपूर्ण सामुदायिक बातचीत के ज़रिये किया जाए.
आदेश के अनुसार, ‘यह बताना भी ज़रूरी है कि चाय बागानों में काम करने वाले समुदायों (Tea Tribes) जैसे हाशिये पर रहने वाले समूहों के मामलों में, अक्सर संरचनात्मक असमानताओं के कारण स्थानीय समुदाय, कॉरपोरेट या सरकारी संस्थाओं के साथ बराबरी के स्तर पर बातचीत नहीं कर पाते हैं. ऐसी स्थिति में कार्यकर्ताओं या सामुदायिक नेताओं को ‘बाहरी विघटनकारी तत्व’ मानने से कोई सार्थक परिणाम नहीं निकलेगा; इसलिए, बातचीत की प्रक्रिया में सामाजिक कार्यकर्ताओं और सामुदाय के नेताओं को शामिल करने से एक स्थायी समाधान के लिए शक्ति संतुलन में निष्पक्षता और समानता सुनिश्चित होगी.’
NSA के तहत एहतियाती हिरासत
हालांकि, जब प्रणब डोले गोलाघाट ज़िला जेल में बंद थे, तब असम सरकार (Assam Govt) ने गोलाघाट के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) की रिपोर्ट के आधार पर NSA के तहत उन्हें एहतियाती हिरासत (Preventive Detention) में रखने का आदेश जारी कर दिया.
आदेश में कहा गया है कि सरकार ने हिरासत में लिए गए व्यक्ति की गतिविधियों की प्रकृति, गंभीरता और उनके संभावित नतीजों पर विचार किया है. सरकार इस बात से संतुष्ट है कि अगर उन्हें ऐसा करने से नहीं रोका गया, तो उनके सार्वजनिक व्यवस्था और राज्य की सुरक्षा के लिए नुकसानदेह गतिविधियों में शामिल रहने की वास्तविक और आसन्न संभावना है.
13 केस दर्ज
प्रणब डोले को हिरासत में लेने के आधार में बताया गया है कि गोलाघाट ज़िले में उनके ख़िलाफ़ 13 मामले दर्ज हैं. इन मामलों में उन पर गैरकानूनी तरीके से इकट्ठा होने, दंगा करने और आपराधिक धमकी देने जैसे आरोप हैं. साथ ही यह भी रिपोर्ट मिली है कि वे ‘अपने निजी और निहित स्वार्थों के लिए कानून-व्यवस्था बिगाड़ने के मकसद से सड़क जाम करने से लेकर सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसी कई गतिविधियों में शामिल पाए गए हैं.’
इसमें यह भी कहा गया है कि केस के रिकॉर्ड से पता चलता है कि उन्होंने विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (FCRA) का उल्लंघन करते हुए ‘संदिग्ध स्रोतों से संदिग्ध विदेशी लेन-देन’ किए हैं.
ग्रेटर काज़ीरंगा भूमि और मानवाधिकार समिति के संयोजक प्रणब डोले ने इस साल की शुरुआत में बोकाखाट निर्वाचन क्षेत्र से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर विधानसभा चुनाव लड़ा था.




