पत्र सूचना कार्यालय (PIB) ने एक सोशल मीडिया पोस्ट के बाद एक फैक्ट-चेक रिपोर्ट जारी की है. इस पोस्ट में दावा किया गया है कि आयकर विभाग (Income Tax Department) 1 अप्रैल 2026 से लोगों के सोशल मीडिया अकाउंट, ईमेल और अन्य सोशल मीडिया अकाउंट को एक्सेस कर पाने में सक्षम हो जाएगा.
एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, PIB ने कहा, ‘जब तक कोई करदाता महत्वपूर्ण कर चोरी के साक्ष्य के कारण औपचारिक जांच और तलाशी अभियान से नहीं गुजर रहा है, विभाग के पास उनके निजी डिजिटल अकाउंट को एक्सेस करने की कोई शक्ति नहीं है.’ PIB ने इस बात पर प्रकाश डाला गया कि एक X हैंडल @IndianTechGuide ने इनकम टैक्स अधिकारियों द्वारा बड़े पैमाने पर डिजिटल निगरानी का दावा करते हुए भ्रामक पोस्ट साझा की थी.
PIB ने इस पोस्ट को भ्रामक बताते हुए कहा कि आयकर अधिनियम 2025 के प्रावधानों के तहत ऐसे उपाय ‘जांच और सर्वे’ कार्यों तक सीमित होंगे, जिसका अर्थ है कि ईमानदार करदाता अप्रभावित रहेंगे.
A post by @IndianTechGuide claims that from April 1, 2026, the Income Tax Department will have the ‘authority’ to access your social media, emails, and other digital platforms to curb tax evasion.#PIBFactCheck
❌The claim being made in this post is #misleading! Here’s the real… pic.twitter.com/hIyPPcvALF
— PIB Fact Check (@PIBFactCheck) December 22, 2025
कानून का पालन करने वाले नागरिक
PIB के मुताबिक, आयकर विभाग नियमित आकलन, डेटा प्रोसेसिंग या जांच के मामलों के लिए लोगों के निजी सोशल मीडिया अकाउंट तक नहीं पहुंच सकता है. कानून का पालन करने वाले करदाता इन प्रावधानों से प्रभावित नहीं होते हैं.
PIB के अनुसार, ‘ये उपाय कानून का पालन करने वाले नागरिकों के लिए नहीं, बल्कि विशेष रूप से जांच और सर्वे के दौरान काले धन और बड़े पैमाने पर चोरी को निशाना बनाने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं.’
PIB की फैक्ट-चेक इकाई (Fact Check Unit) ने कहा कि जांच और सर्वे के दौरान दस्तावेजों और सबूतों को जब्त करने की शक्ति 1961 के अधिनियम के बाद से हमेशा मौजूद रही है.
नया कर कानून
1 अप्रैल 2026 से 1961 के पुराने आयकर अधिनियम को सरल, आधुनिक आयकर अधिनियम, 2025 द्वारा प्रतिस्थापित किया जाएगा. नया कर कानून, 1961 अधिनियम के 819 जटिल वर्गों को कम, स्पष्ट प्रावधानों में कम करके अनुपालन को सरल बनाता है.
पिछले कानून की धारा 132 अधिकारियों को संपत्ति में प्रवेश करने, दस्तावेज़ या उपकरण जब्त करने और डिजिटल डेटा तक पहुंचने की अनुमति देती थी. नई धारा 247 बताती है कि एक अधिकृत अधिकारी कंप्यूटर सिस्टम या ‘वर्चुअल डिजिटल स्पेस’ के एक्सेस कोड को ‘ओवर-राइडिंग’ करके एक्सेस प्राप्त कर सकता है.




