गिग और सेवाकर्मियों ने सुरक्षा, निष्पक्षता और कार्य परिस्थितियों को लेकर Urban Company को सौंपा ज्ञापन

गुरुग्राम स्थित अर्बन कंपनी के दफ्तर के बाहर शुक्रवार को जमा कर्मचारियों ने अपनी समस्याओं को लेकर एक ज्ञापन अधिकारियों को सौंपा.

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Urban Company से जुड़े गिग और प्लेटफॉर्म सेवा कर्मचारियों ने विभिन्न समस्याओं को लेकर एक मांग पत्र शुक्रवार को कंपनी के गुरुग्राम स्थित दफ्तर में अधिकारियों को दिया है.

गुरुग्राम के उद्योग विहार स्थित कंपनी के कार्यालय में सौंपे गए इस मांग-पत्र (Memorandum of Demands) में असुरक्षित कार्य परिस्थितियों, मनमाना आईडी ब्लॉकिंग, अनुचित कटौतियां, कम आय, शिकायत निवारण प्रणाली की कमी और महिला कर्मचारियों की विशेष जरूरतों और सुरक्षा चिंताओं को पर्याप्त रूप से नहीं माना जाना शामिल है.

कार्यस्थल की सुरक्षा

इसमें न्यायपूर्ण वेतन, पारदर्शिता, कार्यस्थल की सुरक्षा और कर्मचारियों के अधिकारों के सम्मान को सुनिश्चित करने के लिए तत्काल कदम उठाने की जरूरत पर बल दिया गया है. कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में प्रति माह न्यूनतम आय की गारंटी 40,000 रुपये, मनमाने आईडी ब्लॉकिंग की समाप्ति, पीक ऑवर्स और स्लॉट सिस्टम जैसी दंडात्मक नीतियों का उन्मूलन, उचित ह्यूमन कस्टमर सपोर्ट और कर्मचारियों को “साझेदार (Partners)” के बजाय श्रमिक (Workers) के रूप में मान्यता देना शामिल है.

गिग और प्लेटफॉर्म सर्विस वर्कर्स यूनियन (GIPSWU) की अध्यक्ष सीमा सिंह ने कहा, ‘महिला कर्मचारियों को कार्यस्थल पर सुरक्षित महसूस नहीं होता. मासिक धर्म के दौरान वे अक्सर अवकाश नहीं ले पातीं और जब वे अपनी समस्याएं उठाती हैं तो उनकी बातों की अनदेखी की जाती है. कुछ मामलों में पीड़ितों को ही दोषी माना जाता है. यह स्थिति उनकी सुरक्षा, भलाई और मनोबल पर गंभीर प्रभाव डालती है.’


सेवाकर्मियों की प्रमुख मांगें

1. कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए.

2. महिला सेवाकर्मियों को आपातकालीन अवकाश प्रदान किया जाए.

3. मनमाने आईडी ब्लॉकिंग की प्रणाली समाप्त की जाए.

4. प्रति माह न्यूनतम आय 40,000 रुपये की गारंटी दी जाए.

5. पीक ऑवर्स, स्लॉट सिस्टम और सप्ताहांत घंटे की सीमाएं पूरी तरह समाप्त की जाएं.

6. कंपनी हब्स को पुनर्स्थापित किया जाए और महिला सेवा पार्टनर्स को उनके घर से सात किलोमीटर से अधिक दूरी पर कार्य न दिया जाए.

7. दुर्घटना बीमा नीतियों में पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए, जिसमें कवरेज, दावे और निपटान प्रक्रियाएं शामिल हों.

8. श्रमिकों को ‘साझेदार’के रूप में न मानकर ‘वर्कर्स’ के रूप में मान्यता दी जाए.


गंभीरता से विचार

नेशनल कैंपेन कमेटी फॉर इरेडिकेशन ऑफ बॉन्डेड लेबर (NCCEBL) के संयोजक निर्मल गोराना ने कहा, ‘आज श्रमिक जबरन मजदूर के रूप में काम कर रहे हैं. सरकार द्वारा निर्धारित सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स (SDG) लक्ष्य 8.7 का उद्देश्य 2030 तक भारत में बंधुआ श्रम को समाप्त करना है. जब तक सरकार सेवा कर्मचारियों की कार्य परिस्थितियों को नहीं समझती और सुधारात्मक कदम नहीं उठाती, यह लक्ष्य हासिल नहीं किया जा सकता. इन श्रमिकों के सामने आने वाली चुनौतियों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए.’

गुंजन नाम की सेवाकर्मी ने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा, ‘मेरी आईडी मनमाने तरीके से ब्लॉक कर दी गई और मुझे प्रभावी रूप से काम से हटा दिया गया. यह मेरे मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है. हजारों श्रमिकों के साथ यही समस्याएं हो रही हैं, लेकिन किसी भी कार्रवाई को अंजाम नहीं दिया जा रहा.’

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