2025 में अभिव्यक्ति की आज़ादी के उल्लंघन के 14,800 से ज़्यादा मामले आए, 8 पत्रकारों और एक इंफ्लूएंसर की मौत: Free Speech Collective

(प्रतीकात्मक फोटो साभार: Pixabay)

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Free Speech Collective द्वारा बीते 23 दिसंबर को जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में साल 2025 में अभिव्यक्ति की आज़ादी के उल्लंघन के 14,875 मामले सामने आए, जिसमें 8 पत्रकारों और एक सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर की हत्या भी शामिल है.

यह संगठन भारत में अभिव्यक्ति की आज़ादी (Free Speech) के उल्लंघन पर नज़र रखता है. संगठन ने इस साल सेंसरशिप, कोर्ट के गैग ऑर्डर, शैक्षणिक स्वायत्तता को प्रभावित करने वाले प्रतिबंध, फिल्म सेंसरशिप, नियामक नीतियों और अभिव्यक्ति की आज़ादी को नियंत्रित करने के लिए कॉरपोरेट हस्तक्षेप के मामलों को दर्ज किया.

33 में पत्रकारों पर हमला

रिपोर्ट में कहा गया है कि इस साल अभिव्यक्ति की आज़ादी के उल्लंघन से जुड़े 117 गिरफ्तारियां हुईं, जिसमें 8 पत्रकारों की गिरफ्तारी भी शामिल है.

समाचार वेबसाइट स्क्रोल डॉट इन में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, फ्री स्पीच कलेक्टिव ने यह भी कहा कि अभिव्यक्ति की आज़ादी से जुड़े 40 हमलों में से 33 में पत्रकारों को निशाना बनाया गया. उत्पीड़न के 19 मामलों में से 14 में पत्रकार शामिल थे. रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि पत्रकारों को उनके काम के दौरान धमकियां मिलने के 12 मामले भी दर्ज किए गए.

Free Speech Collective की ओर से जारी किया गया डेटा.

8 पत्रकारों की हत्या

इस साल 8 पत्रकारों की हत्या हुई. इसमें उत्तर प्रदेश में 2 और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, छत्तीसगढ़, हरियाणा, कर्नाटक, ओडिशा और उत्तराखंड में 1-1 पत्रकार शामिल है. पंजाब में एक सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर की हत्या कर दी गई.

रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि कश्मीर के इरफान मेहराज और झारखंड के रूपेश कुमार, दो पत्रकार इस साल गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (UAPA) के तहत हिरासत में रहे. मेहराज मार्च 2023 से जेल में हैं और रूपेश कुमार जुलाई 2022 से.

गुजरात में बोलने की आज़ादी के उल्लंघन के सबसे ज़्यादा 108 मामले दर्ज किए गए, उसके बाद उत्तर प्रदेश में 83 और केरल में 78 मामले दर्ज किए गए.

सेंसरशिप के मामले

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सेंसरशिप के 11,385 मामले और “lawfare” के 208 मामले सामने आए हैं, जिसका मतलब है कि विरोधी को परेशान करने के लिए कानूनी कार्रवाई का इस्तेमाल करना.

Free Speech Collective की ओर से जारी किया गया डेटा.

सेंसरशिप के आंकड़ों में केंद्र सरकार द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X को जारी किए गए बड़े पैमाने पर कंटेंट हटाने के अनुरोध भी शामिल हैं. बीते मई महीने में सरकार ने भारत में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर 8,000 से ज़्यादा अकाउंट की एक्सेस रोकने की कोशिश की, जो किसी भी महीने में रिकॉर्ड की गई सबसे ज़्यादा संख्या है.

इंटरनेट कंट्रोल के मामले

रिपोर्ट में 2025 में इंटरनेट कंट्रोल के 3,070 मामले भी दर्ज किए गए, जैसे इंटरनेट बंद करना और मोबाइल ऐप को ब्लॉक करना. फ्री स्पीच कलेक्टिव ने कहा कि अकादमिक क्षेत्र में सेंसरशिप के कम से कम 16 ‘गंभीर मामले’ सामने आए हैं.

रिपोर्ट में ‘सेंसरशिप के टूल के तौर पर फिल्म सर्टिफिकेशन के बेरोक इस्तेमाल’ पर भी ज़ोर दिया गया. इसमें बताया गया कि इस महीने सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने केरल इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल को 19 फिल्में दिखाने की इजाज़त नहीं दी.

रिपोर्ट में 2023 के डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट के बारे में भी चिंता जताई गई, जिसके नियम नवंबर में नोटिफाई किए गए थे. इसमें कहा गया कि ये नियम पत्रकारिता के लिए खतरा पैदा कर सकते हैं और सूचना का अधिकार कानून को कमज़ोर करके भारत के पारदर्शिता तंत्र को कमज़ोर कर सकते हैं.

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