एक अध्ययन में पता चला है कि ग्रेटर नोएडा के कुछ गांवों का भूजल अब पीने योग्य नहीं रह गया है. इसे लगातार पीने से कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी का खतरा बढ़ सकता है. यह अध्ययन गलगोटिया यूनिवर्सिटी और डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम टेक्निकल यूनिवर्सिटी (एकेटीयू) की ओर से किया गया है.
नवभारत टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, शोध के दौरान पता चला कि मानसून बाद भूजल में क्रोमियम की मात्रा सुरक्षित सीमा से करीब 60 गुना ज्यादा पाई गई. इसके अलावा कैडमियम जैसी जहरीली धातु भी घातक स्तर पर मिली, जो लंबे समय में कैंसर जैसी खतरनाक बीमारियों की वाहक बन सकती है.
2 साल के शोध मिली जानकारी
भूजल के सैंपल ग्रेटर नोएडा के दुजाना, साधुपुर, बिसनौली समेत पांच गांवों से लिए गए थे. गलगोटिया यूनिवर्सिटी के बायो साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी विभाग के डीन प्रो. डॉ. अभिमन्यु कुमार झा के नेतृत्व में शोधकर्ताओं ने इन गांवों के 25 कैंसर मरीजों के खून के नमूनों की जांच की. इनमें 64% मरीजों में विशेष जीन परिवर्तन मिले, जो कैंसर का खतरा और बढ़ाते हैं.
यह शोध बीते अक्टूबर महीने में अंतरराष्ट्रीय जर्नल Clinical Epigenetics में प्रकाशित हुआ है. शोध के मुताबिक, ग्रेटर नोएडा के इन गांवों में 2 साल तक शोध के बाद ये निष्कर्ष निकाला गया है.
शोधकर्ताओं ने आगाह किया
प्रो. झा के अनुसार, कैडमियम और क्रोमियम जैसे भारी धातु इंसान के शरीर के कैंसररोधी तंत्र को निष्क्रिय कर डीएनए को नुकसान पहुंचाता है. शोधकर्ताओं ने आगाह किया कि लंबे समय तक इस दूषित भूजल का इस्तेमाल करने पर किडनी, लीवर और फेफड़े जैसे जरूरी अंगों को नुकसान पहुंच सकता है.
शोधकर्ताओं का मानना है कि समय पर सख्त कदम न उठाए गए तो आने वाले वर्षों में लोगों के स्वास्थ्य पर इसके गंभीर परिणाम नजर आने लगेंगे. इस बारे में ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण के महाप्रबंधक (परियोजना) एके सिंह ने कहा कि विभिन्न सेक्टरों की तरह क्षेत्र के गांवों में भी पीने का पानी उपलब्ध कराया जा रहा है. बचे हुए बाकी गांवों में पाइपलाइन डालने का कार्य जारी है. सभी को साफ पानी मिले, इसके लिए प्रयास चल रहे हैं.




