Stray Dogs Census: इन दिनों देश के विभिन्न शहरों से ये खबरें सामने आ रही हैं कि शिक्षकों को अब लावारिस कुत्तों की गिनती के काम में भी लगाया जाएगा. इस आदेश से शिक्षा जगत से जुड़े लोगों में खलबली मच गई है.
कुछ दिन पहले उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ से खबर आई कि जिले के शिक्षक को सड़कों पर आवारा कुत्तों की खोज और प्रभावित स्थलों की गिनती करने का काम सौंपा गया है.
दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, इसी कड़ी में बेसिक शिक्षा विभाग ने अलीगढ़ समेत सभी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को कार्यवाही शुरू करने के लिए दिशा-निर्देश दिए हैं, जिससे मतदाता सूची से जुड़े स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) की प्रक्रिया में उलझे शिक्षक भी हैरान हैं.
अलीगढ़ के BSA का आदेश
बीते 18 दिसंबर को प्रकाशित खबर के अनुसार, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) राकेश कुमार सिंह ने इस संबंध में समस्त खंड शिक्षा अधिकारियों को एक पत्र जारी किया है. इसके अनुसार, अपने-अपने विकास खंड के सभी प्राथमिक, उच्च प्राथमिक व अशासकीय सहायता प्राप्त, मान्यता प्राप्त स्कूलों और नगर निगम की सीमा में आने वाले क्षेत्रों में ऐसे संस्थानों को चिह्नित करें, जहां आवारा कुत्तों का आतंक है.
इसे लेकर जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष प्रशांत शर्मा ने कहा, ‘यह आदेश शिक्षक पद की मर्यादा के खिलाफ और सम्मान के साथ खिलवाड़ है. शिक्षक संघ इसे स्वीकार नहीं करेगा. SIR, राशन, ब्लाक लेवल अधिकारी (BLO), मिड-डे मील पकाने समेत तमाम काम शिक्षकों से कराए जा रहे हैं, क्या अब वे कुत्ते भी ढूंढने निकलेंगे. आदेश जल्द ही वापस नहीं लिया गया तो विरोध में आंदोलन किया जाएगा.
मालूम हो कि सुप्रीम कोर्ट ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए बीते 22 अगस्त और 7 नवंबर को अपने आदेश में संस्थागत क्षेत्रों में आवारा कुत्तों के प्रबंधन को लेकर राज्य सरकारों को आदेश जारी किया था, जिसके बाद ये खबरें सामने आ रही हैं.
उत्तराखंड से आई खबर
इसके बाद बीते 28 दिसंबर को इसी तरह की एक और खबर उत्तर प्रदेश के पड़ोसी राज्य उत्तराखंड से आई. दैनिक हिंदुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार, अब डिग्री कॉलजों के प्रिंसिपल पढ़ाने के साथ ही आसपास के क्षेत्र में घूम रहे लावारिस कुत्तों की गिनती का भी काम करेंगे. इस अभियान के लिए शासन ने हर डिग्री कॉलेज के प्रिंसिपल को नोडल अधिकारी नियुक्त कर दिया है.
विश्वविद्यालय स्तर पर यह जिम्मेदारी कुलसचिव को सौंपी गई है. कुत्तों की गिनती के बाद इसकी रिपोर्ट स्थानीय प्रशासन को देनी होगी.
आदेश में क्या कहा गया
रिपोर्ट के अनुसार, संयुक्त निदेशक उच्च शिक्षा की ओर से बीते 23 दिसंबर को जारी इस आदेश के अनुसार प्रदेश के शासकीय, सहायता प्राप्त अशासकीय और निजी डिग्री कॉलेज के प्रिंसिपलों को लावारिस कुत्तों की गिनती की जिम्मेदारी सौंपी गई है. आदेश में स्पष्ट लिखा गया है कि प्रिंसिपल को अपने संस्थान के आसपास के लावारिस कुत्तों की गिनती कर उनके पुनर्वास के लिए क्या कार्रवाई की गई है या नहीं की गई है, इसकी जानकारी स्थानीय प्रशासन को देनी होगी.
विरोध किया जाएगा
संयुक्त शिक्षा निदेशक की ओर से जारी इस आदेश पर शिक्षकों ने कड़ी आपत्ति दर्ज की है. अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के मंडल अध्यक्ष नरेंद्र तोमर ने कहा कि शिक्षक की ड्यूटी कुत्तों की गिनती करने में लगाना और प्रिंसिपल को इस प्रक्रिया का नोडल अधिकारी बनाना गरिमा के खिलाफ है. सरकार के इस निर्णय से पूरे शिक्षा जगत का अपमान हुआ है. इसका विरोध किया जाएगा.
बारांबकी में शिक्षकों को दी जिम्मेदारी
बीते 30 दिसंबर को नवभारत टाइम्स में भी ऐसी ही एक खबर उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले से आई. खबर में बताया गया कि आवारा कुत्तों की संख्या पर नियंत्रण के लिए बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) ने निजी और सरकारी स्कूलों के एक-एक शिक्षक को नोडल अधिकारी नामित किया है.
जिले की नगर पालिका परिषद बाराबंकी सहित 14 नगर निकायों में निजी और सरकारी विद्यालयों से एक-एक शिक्षक कुत्तों को गिनने के लिए लगाया गया है. यह शिक्षक नोडल अधिकारी के रूप में नामित हुए हैं.
सभी स्कूलों को निर्देश
बीएसए नवीन पाठक ने बताया कि शासनादेश के अनुसार, शहरी क्षेत्र के स्कूलों से आवारा कुत्तों की संख्या से संबंधित जानकारी एकत्र की जा रही है, ताकि स्थानीय निकाय द्वारा समयबद्ध कार्रवाई करते हुए नसबंदी, टीकाकरण एवं शेल्टर की व्यवस्था की जा सके, इसके लिए बीएसए ने सभी स्कूलों को निर्देश दिए हैं कि निर्धारित समयसीमा के भीतर नोडल अधिकारी संबंधित ब्योरा अपलोड कर स्कूल स्तर पर आदेश का शत-प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित करें. 31 दिसंबर को शासन स्तर पर इसकी समीक्षा की जाएगी.
पाठक ने बताया कि नगर के प्राथमिक, उच्च प्राथमिक, अशासकीय सहायता प्राप्त और मान्यता प्राप्त विद्यालयों के एक-एक शिक्षक को नोडल अधिकारी नामित किया गया है. नामित शिक्षक का नाम, मोबाइल नंबर के साथ स्कूल गेट पर चस्पा किया जाएगा. स्कूल परिसर में किसी बच्चे अथवा किसी को आवारा कुत्ता काटने पर शिक्षक पीड़ित को इंजेक्शन लगवाने के साथ उसका इलाज करवाएंगे.
दिल्ली से क्या खबर आई
इसी बीच दिल्ली से भी ये खबर उड़ गई कि सरकारी और निजी स्कूलों के शिक्षकों को आवारा कुत्तों को गिनने के काम में लगाया जाएगा. हालांकि ये अफवाह फैलने के बाद तुरंत बाद ही दिल्ली सरकार ने इस तरह की बातों को नकारते हुए इन्हें Fake News बताया.
दिल्ली सरकार ने बीते सोमवार (29 दिसंबर) को इस ‘गलत जानकारी’ को खारिज कर दिया कि उसने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद शहर भर के शिक्षकों को आवारा कुत्तों से जुड़े कुछ काम सौंपे हैं.
सुप्रीम कोर्ट का निर्देश
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, बीते नवंबर महीने में सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों को संभालने के लिए संवेदनशील सार्वजनिक जगहों पर नोडल अधिकारियों की नियुक्ति का निर्देश दिया था. सोमवार को शिक्षा निदेशालय (DoE) ने कहा कि उसने सभी स्कूलों के प्रमुखों और सभी संबंधित स्थानीय निकायों को इस संबंध में उठाए गए कदमों के बारे में निर्देश दिया था. यह भी साफ किया कि उसने शिक्षकों को कोई खास ज़िम्मेदारी नहीं सौंपी है.
शिक्षा निदेशालय के बयान में कहा गया है, ‘20 और 24 नवंबर, 5 और 10 दिसंबर को DoE द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार निदेशालय के तहत सभी ऑफिस, स्कूलों और स्टेडियम के प्रमुखों, साथ ही संबंधित अधिकारियों/स्थानीय निकायों को आवारा कुत्तों के रहने को रोकने के लिए निम्नलिखित उपाय करने की ज़िम्मेदारी सौंपी गई है, जिसमें सभी सरकारी और निजी शैक्षणिक संस्थानों और स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स की पूरी लिस्ट जमा करना, चारदीवारी को मज़बूत करना, नोडल अधिकारियों की नियुक्ति और जागरूकता कार्यक्रम शामिल हैं.’
7 नवंबर का आदेश
बीते 7 नवंबर को कुत्तों के काटने की घटनाओं में बढ़ोतरी को ‘इंसानों की सुरक्षा के लिए चिंता का विषय’ बताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया था कि वे शिक्षण संस्थानों, अस्पतालों, खेल परिसरों, बस डिपो और रेलवे स्टेशनों से आवारा कुत्तों को हटाना सुनिश्चित करें. साथ ही कहा था कि ऐसे कुत्तों को नसबंदी के बाद उसी जगह पर वापस नहीं छोड़ा जा सकता.
इस संबंध में शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि इन सार्वजनिक जगहों के प्रबंधन के लिए एक नोडल अधिकारी नियुक्त करें, ताकि परिसर की देखभाल और साफ-सफाई सुनिश्चित हो सके और आवारा कुत्ते कैंपस में प्रवेश न करें या वहां न रहें.
शिक्षक संगठनों में डर
रिपोर्ट के अनुसार, इसके बाद अलग-अलग शिक्षक संगठनों में यह डर फैल गया है कि स्कूलों और आसपास के इलाकों में आवारा कुत्तों की गिनती जैसे कामों के लिए उन्हें लगाया जा सकता है. यह डर तब फैला जब उत्तर-पश्चिम जिले के 118 शिक्षकों की एक आधिकारिक सूची, जिन्हें नोडल अधिकारी बनाया गया था WhatsApp पर सर्कुलेट हुई.
इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने कहा कि आवारा कुत्तों को गिनने के लिए शिक्षकों को ड्यूटी पर लगाने का कोई निर्देश जारी नहीं किया गया है. उन्होंने आरोप लगाया कि ये आरोप आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार लगा रही है, जो अपनी हार पचा नहीं पा रही है.




