देश में अखबार मालिकों के संगठन इंडियन न्यूजपेपर सोसाइटी (INS) ने बीते मंगलवार (3 फरवरी) को देश में घरेलू न्यूज़प्रिंट यानी अखबार की छपाई में इस्तेमाल होने वाले कागज की सप्लाई की मौजूदा कमी पर चिंता जताई.
INS ने बताया कि जहां न्यूज़प्रिंट की घरेलू खपत लगभग 12 लाख टन है, वहीं घरेलू उत्पादन 5 लाख टन को पार करने में संघर्ष कर रहा है, जो कुल मांग का सिर्फ 40 प्रतिशत है.
न्यूज़प्रिंट की भारी कमी
INS द्वारा जारी एक प्रेस रिलीज़ में इसके अध्यक्ष विवेक गुप्ता ने कहा कि न्यूज़प्रिंट की भारी कमी के कारण इस उद्योग में बहुत बड़ी ‘कमजोरी’ आ गई है.
INS ने कहा कि घरेलू न्यूज़प्रिंट बनाने वालों की क्षमता में कोई खास बढ़ोतरी न होने के कारण पब्लिशर्स पिछले दो दशकों से ज़्यादा समय से डिमांड पूरी करने के लिए न्यूज़प्रिंट इंपोर्ट करने पर मजबूर हैं.
संगठन ने कहा कि देश में ‘जानकारी वाली सार्वजनिक चर्चा’ को जारी रखने के लिए ‘बिना रुकावट सप्लाई और डिस्ट्रीब्यूशन’ सुनिश्चित करना ज़रूरी है. घरेलू न्यूज़प्रिंट बनाने वालों की मांग पूरी करने की क्षमता के दावों पर प्रतिक्रिया देते हुए INS ने कहा कि पिछले 15 सालों में भारतीय निर्माताओं द्वारा किए गए निर्यात का आंकड़ा ही दिखाता है कि हमारे यहां सरप्लस क्षमता नहीं है.
आयात करने की ज़रूरत
INS ने कहा, घरेलू न्यूज़प्रिंट उद्योग की अपनी संस्था के आंकड़ों से पता चलता है कि पिछले 15 सालों (2010-11 से 2024-25) में कुल मिलाकर सिर्फ़ 18,000 टन का मामूली निर्यात हुआ है. इतनी कम निर्यात मात्रा साफ तौर पर दिखाती है कि उनके पास कोई सरप्लस क्षमता नहीं है, जैसा कि उन्होंने अब तक दावा किया है.
INS ने घरेलू क्षमता की कमी और भारतीय अख़बार उद्योग को सुचारू रूप से चलाने के लिए न्यूज़प्रिंट के बिना रुकावट आयात करने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया.




