मध्य प्रदेश के इस गांव में मोबाइल नेटवर्क नहीं होने की वजह से लोग कर रहे पलायन

(प्रतीकात्मक फोटो साभार: Pixabay)

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पलायन की खबरें अक्सर देश के किसी न किसी हिस्से से सामने आती हैं. इसकी तमाम वजहें होती हैं और कुछ वजहें अक्सर विवाद और राजनीतिक टकराव का कारण भी बन जाती हैं, लेकिन इस खबर में हम आपको जिस पलायन की जानकारी देने जा रहे हैं, उसे जानकर आप हैरत में पड़ जाएंगे.

ये घटना मध्य प्रदेश के विदिशा जिले की है. यहां के एक गांव के लोग इस वजह से पलायन को मजबूर हो रहे हैं, क्योंकि Digital India के दौर में भी उनके मोबाइल में नेटवर्क नहीं रहता है. इस वजह से बीते 3 सालों में इस गांव से 50 से अधिक परिवार दूसरी जगहों पर शिफ्ट हो चुके हैं. उन्हें अपना गांव सिर्फ इस वजह से छोड़ना पड़ा, क्योंकि वे दुनिया से कट गए थे. इन लोगों के पास मोबाइल है, लेकिन गांव में जो टावर खड़ा किया गया है, उसमें नेटवर्क नहीं रहता है.

गांव में गायब रहता है सिग्नल

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, विदिशा जिला मुख्यालय से लगभग 80 किलोमीटर दूर बसे करीब 3 हजार की आबादी वाले मोहम्मदगढ़ गांव के अधिकांश लोगों के पास मोबाइल फोन हैं, लेकिन गांव में घुसते ही सिग्नल गायब हो जाता है.

कॉल करनी हो, जरूरी सूचना लेनी हो या किसी से इमरजेंसी में बात करनी हो, तो ग्रामीणों को 1.5 से 2 किलोमीटर तक दूर जाना पड़ता है. गांव में BSNL का मोबाइल टावर भी लगा है, लेकिन उसमें कभी-कभार ही सिग्नल आता है, फिर पूरा दिन गायब रहता है. इस अनिश्चितता ने लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को ठप कर दिया.

दैनिक भास्कर में 20 दिसंबर को प्रकाशित खबर.

लोगों ने क्या कहा

गांव की सरपंच सरिता बाई वाल्मीकि बताती हैं कि नेटवर्क न होने से बच्चों की पढ़ाई सबसे ज्यादा प्रभावित होती हैं. नौकरी की सूचनाएं समय पर नहीं मिलती थीं. बाहर गए परिजनों से संपर्क टूट जाता था. वे कहती हैं, ‘कई बार कोई बाहर गया सदस्य समय पर नहीं लौटा तो उससे बात नहीं हो पाती थी. घर वाले घबरा जाते थे.’

रिपोर्ट के अनुसार, गांव छोड़ चुके लोगों की पीड़ा और भी गहरी है. विदिशा में रह रहे गांव के कमलेश कुशवाह बताते हैं कि उनके नाना ससुर का निधन हो गया था, लेकिन उन्हें इसकी जानकारी एक महीने बाद मिली. उन्होंने कहा, ‘गांव में नेटवर्क नहीं था, किसी का फोन नहीं आया. जब पता चला, तब सब खत्म हो चुका था.’

नेटवर्क की जांच कराएंगे

इसी गांव के इमरान खान अब भोपाल में रहते हैं. उनका कहना है, ‘नेटवर्क न होने से उनका रोजगार खत्म हो गया था. काम से जुड़ी कॉल नहीं आती थी, विभागों से संपर्क नहीं हो पाता था. मजबूरी में शहर आना पड़ा.’

आशीष सेन का कहना है कि इमरजेंसी में किसी से बात न हो पाने का डर सबसे बड़ा था. गांव छोड़ते ही परेशानी खत्म हो गई. दैनिक भास्कर से बातचीत में BSNL के एजीएम राकेश रंजन का कहना है कि क्षेत्र में 2जी और 4जी नेटवर्क चल रहा है. नेटवर्क की जांच करवाएंगे.

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