महाराष्ट्र: गढ़चिरौली में प्रसव के लिए कथित तौर पर 6 किमी पैदल चलने के बाद गर्भवती महिला की मौत

(प्रतीकात्मक फोटो साभार: फेसबुक)

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डिलीवरी के लिए गांव और आसपास के इलाके में कोई मेडिकल सुविधा न होने के कारण एक गर्भवती महिला को 6 किलोमीटर तक पैदल चलना पड़ा. हालांकि कथित तौर पर इस वजह से उसकी मौत हो गई. एक अधिकारी ने यह जानकारी दी है.

उन्होंने बताया कि गढ़चिरौली जिले के एटापल्ली तालुका के अलादंडी टोला गांव की रहने वाली 24 वर्ष की आशा संतोष किरंगा नौ महीने की गर्भवती थीं. उनका पैतृक गांव अलादंडी टोला मुख्य सड़क से कटा हुआ है और वहां डिलीवरी की कोई सुविधा उपलब्ध नहीं है.

अधिकारी ने बताया, गर्भवती महिला समय पर मदद की उम्मीद में बीते 1 जनवरी को अपने पति के साथ जंगल के रास्तों से 6 किलोमीटर पैदल चलकर अपनी बहन के घर पेठा पहुंची. हालांकि, गर्भावस्था के आखिरी चरण में इतनी मुश्किल यात्रा का उसके शरीर पर बुरा असर पड़ा.

बच्चे की गर्भ में मौत

मीडिया में आईं खबरों के अनुसार, अधिकारी ने बताया, ‘बीते 2 जनवरी की सुबह उसे तेज़ प्रसव पीड़ा होने लगी, जिसके बाद उन्हें एम्बुलेंस से हेदरी के काली अम्माल हॉस्पिटल ले जाया गया. यहां डॉक्टरों ने सिजेरियन ऑपरेशन का फैसला किया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी. बच्चा गर्भ में पहले ही मर चुका था. ब्लड प्रेशर बढ़ने के कारण महिला की भी कुछ देर बाद मौत हो गई.’

इस घटना के बाद लोगों में रोष फैल गया. इस बीच प्रशासन ने एम्बुलेंस सेवाएं देने में किसी भी तरह की कमी की खबरों से इनकार किया है.

जांच की जाएगी

संपर्क करने पर गढ़चिरौली ज़िले के स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. प्रताप शिंदे ने बताया कि महिला का रजिस्ट्रेशन आशा वर्कर के ज़रिये किया गया था.

उन्होंने कहा, ‘अचानक प्रसव पीड़ा और दिक्कतें शायद चलने की वजह से हुईं. डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन वे सफल नहीं हो पाए. तालुका स्वास्थ्य अधिकारी से विस्तृत रिपोर्ट मंगवाई गई है. मामले की जांच की जाएगी.’

ग्रामीणों में रोष

समाचार वेबसाइट एबीपी लाइव की रिपोर्ट के अनुसार, गर्भवती महिला की मौत के बाद उनके शव को पोस्टमॉर्टम के लिए एटापल्ली ग्रामीण अस्पताल ले जाया गया, लेकिन स्त्री रोग विशेषज्ञ न होने के कारण उसे वापस भेज दिया गया. इसके बाद शव को लगभग 40 किलोमीटर दूर अहेरी ले जाया गया.

स्थानिय निवासियों ने इस घटना पर गहरा गुस्सा ज़ाहिर किया और कहा कि सड़कों और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी के कारण ज़िंदा रहते हुए महिला को लंबी दूरी पैदल चलने के लिए मजबूर होना पड़ा और मौत के बाद भी उसके शव को कई जगहों पर ले जाना पड़ा.

प्रशासन का इस बात से इनकार

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, जिला सूचना कार्यालय ने बताया कि जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुहास गाडे और जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. प्रताप शिंदे ने गांव का दौरा किया और रिश्तेदारों से विस्तार से बात की.

डॉ. शिंदे ने कहा कि यह खबर कि गर्भवती महिला इलाज के लिए अलादंडी टोला से पैदल चलकर आई थी या एम्बुलेंस न मिलने के कारण ऐसा हुआ, पूरी तरह गलत है.

उन्होंने कहा, ‘असल में महिला अलादंडी टोला से पेठा एक पुजारी से मिलने गई थी. वह रात भर वहीं रुकी. रात करीब 1 बजे से 2 बजे के बीच उसे अचानक दिक्कतें होने लगीं. हालात की गंभीरता को समझते हुए तुरंत स्थानीय आशा कार्यकर्ता से संपर्क किया गया. आशा कार्यकर्ता ने बिना किसी देरी के तुरंत एम्बुलेंस का इंतजाम किया.’

तथ्यों के विपरीत

डॉ. शिंदे ने कहा, ‘गर्भवती महिला को एम्बुलेंस से हेडरी के काली अम्माल अस्पताल में भर्ती कराया गया. इसलिए यह दावा कि ‘उसकी मौत 6 किमी पैदल चलने की वजह से हुई’ पूरी तरह से बेबुनियाद और तथ्यों के विपरीत है.’

उन्होंने यह भी बताया कि आशा कार्यकर्ता और स्वास्थ्य कर्मचारी नियमित रूप से महिला के घर जाते थे, ज़रूरी जांच करते थे, उसकी सेहत की हालत का जायजा लेते थे और ज़रूरी सलाह देते थे.

जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुहास गाडे प्रशासन ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में मां और बच्चे की मौत के मामलों को लेकर बहुत संवेदनशील है और ऐसी किसी भी घटना की पूरी जांच की जाती है.

मौत का कारण नहीं बताया

गाडे ने कहा, ‘इस खास मामले में स्वास्थ्य विभाग ने ज़रूरी इमरजेंसी सेवाएं दीं और प्रशासन की तरफ से कोई लापरवाही नहीं पाई गई.’

रिपोर्ट के अनुसार, एक बयान में प्रशासन ने कहा कि पूरी घटना, जिसमें पुजारी के पास जाना, रात भर वहीं रुकना, और उसके बाद अचानक तबीयत खराब होना, सब साबित हो गया है. हालांकि, प्रशासन ने महिला की मौत का असली कारण नहीं बताया.

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