Typhoid Outbreak in Gujarat’s Gandhinagar: मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में दूषित पानी पीने के कारण लोगों की मौत के मामले सामने आने के बाद गुजरात के गांधीनगर में पीने के पानी में गंदगी फैलने की वजह से 100 से अधिक लोगों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा. ये सभी लोग टायफाइड से पीड़ित हैं.
अधिकारियों ने बताया कि पिछले दो दिनों में 100 से अधिक मरीज़ जिनमें अधिकांश बच्चे शामिल हैं, को अस्पताल में भर्ती कराया गया है. मामला सामने आने के बाद निगरानी और इमरजेंसी के उपाय बढ़ा दिए गए हैं. अधिकारियों का कहना है कि यह बीमारी इलाके में चल रहे ड्रेनेज मरम्मत के काम के कारण पीने के पानी में गंदगी फैलने से हुई है.
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बीते शनिवार (03 जनवरी) को हालात का जायजा लिया, जबकि मेडिकल टीमों ने प्रभावित इलाकों में घर-घर जाकर निगरानी शुरू कर दी है.
ज़्यादातर बच्चे प्रभावित
गुजरात के परिवार कल्याण और स्वास्थ्य विभाग की अतिरिक्त निदेशक डॉ. नीलम पटेल ने कहा, ‘अब तक कुल 102 टायफाइड के मामले सामने आए हैं, जिनमें से 37 मरीज़ गांधीनगर सिविल अस्पताल में भर्ती हैं, जबकि बाकी का इलाज दूसरे अस्पतालों में चल रहा है. ज़्यादातर संक्रमित मरीज़ बच्चे हैं.’
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, अधिकारियों ने बताया कि यह बीमारी नगर निगम द्वारा किए जा रहे ड्रेनेज मरम्मत के काम के कारण पीने के पानी में गंदगी फैलने से जुड़ी है. सबसे ज़्यादा मामले गांधीनगर के सेक्टर 24 से सामने आए हैं, जबकि कुछ मामले सेक्टर 21 और आसपास के दूसरे इलाकों से भी आए हैं. उन्होंने बताया कि गंदगी फैलने की आशंका वाली छह जगहों की पहचान की गई है, और सुधार का काम चल रहा है.
पटेल ने कहा कि अब तक गांधीनगर में 63 सर्विलांस टीमें तैनात की गई हैं. घर-घर जाकर निगरानी और जागरूकता अभियान के तहत घरों का सर्वे किया गया है और करीब 38,000 लोगों से संपर्क किया गया है. मरीजों की निगरानी करने और बीमारी के फैलने का पता लगाने के लिए डॉक्टरों और माइक्रोबायोलॉजिस्ट की एक रैपिड रिस्पॉन्स टीम भी बनाई गई है.
खून के सैंपल टेस्ट
अधिकारियों ने बताया कि अब तक कोई कैज़ुअल्टी नहीं हुई है. मरीज़ों में बुखार, उल्टी और दस्त जैसे लक्षण दिखे हैं. टायफाइड की पुष्टि के लिए खून के सैंपल टेस्ट किए जा रहे हैं, जबकि संदिग्ध मामलों का एहतियात के तौर पर इलाज किया जा रहा है.
उन्होंने कहा, ‘लोगों को उबला हुआ पानी पीने और घर का बना खाना खाने की सलाह दी गई है. नगर निगम पानी की टंकियों की सफाई के लिए क्लोरीन की गोलियां भी बांट रहा है.’
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण के प्रधान सचिव राजीव टोपनो ने कहा कि स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए सभी ज़रूरी कदम उठाए जा रहे हैं. सरकार मरीज़ों के जल्दी ठीक होने और बीमारी को और फैलने से रोकने के लिए स्थिति पर करीब से नज़र रख रही है.
शिकायत पर कार्रवाई नहीं
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, स्थानीय लोगों ने बताया कि दूषित पानी के बारे में बार-बार शिकायतें करने के बावजूद समय पर कोई कार्रवाई नहीं की गई, जिससे कई परिवारों को बोतलबंद पानी पीना पड़ा. इसके बाद नगर निगम ने स्थानीय निवासियों को उबला हुआ पानी पीने, घर का बना खाना खाने और पानी के स्टोरेज टैंक को कीटाणुरहित करने के लिए क्लोरीन की गोलियों का इस्तेमाल करने की सलाह दी है.
उप-मुख्यमंत्री हर्ष सांघवी ने गांधीनगर सिविल अस्पताल का दौरा किया, इलाज की व्यवस्थाओं की समीक्षा की और कहा कि 22 डॉक्टरों की एक विशेष टीम तैनात की गई है. उन्होंने कहा कि डिप्टी कलेक्टर सहित वरिष्ठ अधिकारियों को स्थिति पर लगातार नज़र रखने का निर्देश दिया गया है. भर्ती मरीजों के परिवारों के लिए भोजन और रहने की व्यवस्था भी की गई है.
मरीजों की हालत स्थिर
गांधीनगर सिविल हॉस्पिटल की मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. मीता पारिख ने कहा कि भर्ती सभी मरीजों की हालत स्थिर है. उन्होंने बताया कि टायफाइड के मामले आमतौर पर 15 दिन के चक्र में सामने आते हैं और चेतावनी दी कि अगले दो हफ्तों तक नए मामले सामने आ सकते हैं, हालांकि सुधार के उपायों के बाद स्थिति स्थिर होने की उम्मीद है.
आज तक की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य सरकार की ओर से जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि टायफाइड के संदिग्ध मामलों को देखते हुए गांधीनगर शहर में 75 स्वास्थ्य टीमों द्वारा गहन स्वास्थ्य प्रबंधन और सर्वे का काम किया किया गया है. गांधीनगर नगर निगम की सर्वे टीमों ने अब तक 20,800 से ज़्यादा घरों का निरीक्षण किया है और 90,000 से ज़्यादा लोगों को कवर किया है. एहतियाती उपाय के तौर पर 30,000 क्लोरीन टैबलेट और 20,600 ORS पैकेट बांटे गए हैं.




