महाराष्ट्र में वर्धा के महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय (MGIHU) ने उन छात्रों का निष्कासन और निलंबन वापस ले लिया है, जिन्होंने संस्थान में भ्रष्टाचार और प्रशासनिक अनियमितताओं का आरोप लगाया था. यह फैसला बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर पीठ की चेतावनी के बाद आया है कि अगर यह कार्रवाई वापस नहीं ली गई तो वह विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ आदेश पारित करेगी.
विश्वविद्यालय पिछले कुछ सालों से कई विवादों का सामना कर रहा है. जनवरी 2024 में विश्वविद्यालय ने अपने पांच छात्रों को निकाल या निलंबित कर दिया था. इसमें रजनीश कुमार अंबेडकर (डिप्लोमा स्टूडेंट), रामचंद्र (रिसर्च स्कॉलर), राजेश कुमार यादव (रिसर्च स्कॉलर), निरंजन कुमार (रिसर्च स्कॉलर) और विवेक मिश्रा (अंडरग्रेजुएट स्टूडेंट) शामिल हैं.
क्या था आरोप
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, इन छात्रों पर आरोप था कि उन्होंने तत्कालीन कार्यवाहक कुलपति की नियुक्ति के खिलाफ सोशल मीडिया पर गलत टिप्पणियां की थीं. बाद में हाईकोर्ट ने कहा कि छात्रों के खिलाफ विश्वविद्यालय का कुछ ही घंटों में लिया गया फैसला, प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन करता है.
एक संबंधित मामले में हाईकोर्ट ने प्रोफेसर करुणाकर द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए कार्यवाहक कुलपति की नियुक्ति को रद्द कर दिया था. निरंजन कुमार और विवेक मिश्रा को तुरंत अदालत जाने के बाद राहत मिली. राजेश और रामचंद्र, जिन्हें शुरू में राहत नहीं मिली थी, उन्होंने नवंबर 2024 में वकील नीलेश सिंह गाढ़े के ज़रिये याचिकाएं दायर कीं.
हाईकोर्ट की चेतावनी
बीते 19 दिसंबर को हाईकोर्ट ने चेतावनी दी कि अगर निलंबन वापस नहीं लिए गए तो वह विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ आदेश जारी करेगा. इसके बाद प्रशासन ने एक एफिडेविट जमा किया, जिसमें कहा गया कि निष्कासन और निलंबन रद्द कर दिए गए हैं. एफिडेविट के आधार पर अदालत ने बीते 22 दिसंबर को अपना आदेश पारित किया.




