भारत में लाखों की संख्या में अभी ऐसे बच्चे हैं, जो स्कूल नहीं जा रहे हैं. वित्त वर्ष 2022 से 2026 (3 दिसंबर, 2025 तक) के बीच राज्यों ने प्री-स्कूल से लेकर कक्षा 12 तक औपचारिक शिक्षा तंत्र से बाहर 84.9 लाख बच्चों की रिपोर्ट दी है. इनमें से लगभग आधी संख्या लड़कियों की हैं.
यह ट्रेंड दिखाता है कि ड्रॉपआउट एक बार की समस्या नहीं है, यह साल-दर-साल बनी रहती है. उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड जैसे बड़े राज्य इस लिस्ट में सबसे ऊपर हैं, जो शिक्षा तक पहुंच में गहरी जड़ों वाली चुनौतियों को उजागर करता है.
उत्तर प्रदेश शीर्ष पर
समाचार वेबसाइट एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, बीते 3 दिसंबर को संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान कांग्रेस सांसद रेणुका चौधरी ने स्कूल से बाहर रहने वाली लड़कियों की कुल संख्या और ड्रॉपआउट के मुख्य कारणों के बारे में पूछा था. जवाब में, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय में राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर ने चौंकाने वाले आंकड़े साझा किए.
उत्तर प्रदेश इस लिस्ट में सबसे ऊपर है. वित्त वर्ष 2026 में अकेले इस राज्य में 9.9 लाख बच्चे स्कूल से बाहर थे. 5 सालों में इस राज्य का हिस्सा सबसे ज़्यादा रहा. बिहार, झारखंड और असम में भी बड़ी संख्या में ऐसे बच्चे पाए गए.
लड़कियों से संबंधित आंकड़ा
हालांकि, स्कूल से बाहर रहने वाले बच्चों में लड़कियों का हिस्सा कुल एनरोलमेंट पैटर्न के हिसाब से अलग-अलग होता है. जिन राज्यों में लड़कियों का एनरोलमेंट ज़्यादा है, वहां ड्रॉपआउट परसेंटेज कम है.
उदाहरण के लिए, केरल (33.2%), तेलंगाना (31.1%), और लद्दाख (33.3%) में स्कूल से बाहर रहने वाले बच्चों में लड़कियों का परसेंटेज कम है, क्योंकि वहां एनरोलमेंट रेट ज़्यादा हैं. इसके उलट, महाराष्ट्र (65.7%), हिमाचल प्रदेश (54.8%) और मिजोरम (53.8%) जैसे राज्यों में ड्रॉपआउट में लड़कियों का हिस्सा ज़्यादा है.
625 करोड़ रुपये खर्च
पिछले पांच सालों में राज्यों ने समग्र शिक्षा के तहत स्पेशल ट्रेनिंग के ज़रिये 26.46 लाख स्कूल से बाहर बच्चों का फिर से एडमिशन कराया और इन कोशिशों पर 626 करोड़ रुपये खर्च किए.
2021-22 में दोबारा एडमिशन की संख्या 8.6 लाख पर पहुंच गई थी, लेकिन 2023-24 में यह तेज़ी से गिरकर सिर्फ़ 2.17 लाख रह गई. 2024-25 में यह संख्या फिर बेहतर हुई और 7.67 लाख बच्चे स्कूल लौट आए.
दोबारा एडमिशन कराया गया
इस अभियान में उत्तर प्रदेश सबसे आगे रहा, उसके बाद असम और बिहार का नंबर था, जबकि गुजरात, दिल्ली, झारखंड, तमिलनाडु और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में भी अच्छी तरक्की देखने को मिली.
हालांकि राज्यों ने लाखों बच्चों का फिर से एडमिशन कराया है, लेकिन चुनौती अभी भी बनी हुई है. बड़े राज्यों में स्कूल छोड़ने वाले बच्चों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जो बच्चों, खासकर लड़कियों को स्कूल में बनाए रखने के लिए टारगेटेड दखल और लगातार कोशिशों की ज़रूरत को दिखाता है.




