5,000 से ज़्यादा सरकारी स्कूलों में एक भी छात्र नहीं, 70% स्कूल तेलंगाना और पश्चिम बंगाल में

(प्रतीकात्मक फोटो: India 151)

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पूरे भारत में 10.13 लाख सरकारी स्कूलों में से 5,149 स्कूलों में एक भी छात्र नहीं है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, शै​क्षणिक वर्ष 2024-25 में ज़ीरो एनरोलमेंट (जहां किसी भी छात्र ने एडमिशन नहीं लिया) वाले इन स्कूलों में से 70% से ज़्यादा स्कूल तेलंगाना और पश्चिम बंगाल में हैं.

शिक्षा मंत्रालय द्वारा हाल ही में संसद में साझा किए गए आंकड़ों से पता चलता है कि ‘10 से कम या ज़ीरो एनरोलमेंट’ वाले स्कूलों की संख्या में भी तेज़ी से बढ़ोतरी हुई है.

आंकड़ों ने क्या बताया

पिछले दो सालों में ऐसे सरकारी स्कूलों की संख्या में 24% की बढ़ोतरी हुई है, जो 2022-23 में 52,309 से बढ़कर 2024-25 में 65,054 हो गई है. सरकार ने लोकसभा सांसद कार्ति पी. चिदंबरम और अमरिंदर सिंह राजा वारिंग के सवालों के लिखित जवाब में कहा कि ये स्कूल अब देश के कुल सरकारी स्कूलों का 6.42% हैं.

तेलंगाना में लगभग 2,081 ज़ीरो एनरोलमेंट वाले स्कूल हैं, जबकि पश्चिम बंगाल में ऐसे 1,571 संस्थान हैं. तेलंगाना के नलगोंडा ज़िले में राज्य और देश में सबसे ज़्यादा 315 खाली स्कूल दर्ज किए गए हैं.

यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इनफॉरमेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन प्लस (UDISE+) से मिले आंकड़ों के अनुसार, नलगोंडा के बाद राज्य के महबूबाबाद में 167 और वारंगल में 135 स्कूल हैं, जहां एक भी एनरोलमेंट नहीं हुआ है.

बंगाल में क्या है स्थिति

पश्चिम बंगाल की बात करें तो राजधानी कोलकाता में 211 सरकारी स्कूल ऐसे हैं, जहां एक भी छात्र का एडमिशन नहीं हुआ है, यह देश में दूसरा सबसे ज़्यादा आंकड़ा है. 177 स्कूलों के साथ पूर्बा मेदिनीपुर और 147 स्कूलों के साथ दक्षिण दिनाजपुर जिले का नंबर आता है.

बिना छात्र ​शिक्षकों की तैनाती

रिपोर्ट के अनुसार, छात्रों की कमी के बावजूद, इन स्कूलों में बड़ी संख्या में कर्मचारी तैनात हैं. पूरे भारत में 1.44 लाख शिक्षक अभी ऐसे सरकारी स्कूलों में तैनात हैं, जहां 10 से कम छात्र हैं या कोई एडमिशन नहीं है, जो 2022-23 के 1.26 लाख से ज़्यादा है.

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पश्चिम बंगाल में कम एडमिशन वाली श्रेणी के 6,703 सरकारी स्कूलों में 27,348 टीचर तैनात हैं, जिससे हर स्कूल में लगभग चार टीचर का अनुपात बनता है.

इसी तरह बिहार ने ऐसे 730 स्कूलों में 3,600 टीचर तैनात हैं, यानी हर स्कूल में औसतन लगभग पांच टीचर – जो इस कैटेगरी में राष्ट्रीय औसत 2.2 से दोगुने से भी ज़्यादा है. मंत्रालय ने कहा कि शिक्षकों की भर्ती और सही जगह पर तैनाती संबंधित राज्य सरकारों के दायरे में आती है.

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