पिछले पांच सालों में 84,000 से ज़्यादा सरकारी स्कूल Mid-Day Meal योजना से हो गए बाहर

(फोटो साभार: फेसबुक वीडियोग्रैब/Kavita Singh)

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केंद्र सरकार की प्रमुख पीए पोषण (​पहले मिड-डे मील नाम था) योजना के तहत आने वाले स्कूलों की संख्या साल 2020-21 में 11.19 लाख से लगातार घटकर 2024-25 में 10.35 लाख हो गई है – यानी पांच सालों में कुल 84,453 स्कूलों की कमी आई है, जो लगभग 7.5% है. यह जानकारी बीते बुधवार (17 दिसंबर) को राज्यसभा में केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा साझा किए गए आंकड़ों पर आधारित है.

प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण (PM पोषण) योजना, एक केंद्र प्रायोजित कार्यक्रम है, जिसे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ मिलकर लागू किया जाता है. इस योजना के तहत देशभर के सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में बाल वाटिका (कक्षा 1 से पहले) और कक्षा 1 से 8 तक के बच्चों को गर्म पका हुआ भोजन प्रदान किया जाता है.

सबसे बड़ी गिरावट

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी द्वारा AAP सांसद संजय सिंह के सवाल के जवाब में पेश किए गए आंकड़ों से पता चलता है कि सबसे बड़ी गिरावट 2020-21 और 2021-22 के बीच हुई, जब संख्या 11.19 लाख से घटकर 10.84 लाख स्कूलों पर पहुंच गई. यानी एक साल में 35,574 स्कूलों की कमी, जो 3.18% की गिरावट है.

आंकड़ों की जुबानी

इसके बाद कमी की रफ्तार धीमी हो गई. 2022-23 में यह संख्या थोड़ी घटकर 10.76 लाख हो गई, यानी 7,604 स्कूलों की कमी (0.7%). 2023-24 में यह और घटकर 10.67 लाख हो गई – यानी 9,509 स्कूलों की गिरावट (0.88%) और फिर 2024-25 में इसमें फिर से कमी आई, जब स्कूलों की संख्या घटकर 10.35 लाख हो गई, जो एक साल में 31,766 स्कूलों की बड़ी गिरावट (2.98%) थी.

उत्तर प्रदेश में सबसे ज़्यादा गिरावट देखी गई, जहां योजना का लाभ उठाने वाले स्कूलों की संख्या 2020-21 में 1.67 लाख से घटकर 2024-25 में 1.41 लाख हो गई – यानी 25,361 स्कूल योजना से बाहर हो गए.

कारण नहीं बताया

इसके बाद मध्य प्रदेश का नंबर आया, जहां 1.12 लाख से घटकर 88,204 स्कूल हो गए, यानी 24,704 स्कूल बाहर हो गए. इसी तरह असम में भी काफी गिरावट देखी गई, 53,427 से घटकर 44,106 स्कूल हो गए – यानी 9,321 स्कूलों की कमी आई.

कुल मिलाकर इन तीनों राज्यों में उन 84,453 स्कूलों में से लगभग 59,400 स्कूल शामिल थे, जो बीते पांच सालों में पीएम पोषण योजना के तहत कवर होना बंद हो गए.

चौधरी ने गिरावट के कारणों के बारे में साफ तौर पर नहीं बताया, लेकिन कहा कि ‘योग्य बच्चों को गर्म पका हुआ और पौष्टिक खाना देने की पूरी ज़िम्मेदारी राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन की है.’

लगातार घट रही स्कूलों की संख्या

यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इनफॉरमेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन प्लस (UDISE+) के आंकड़ों के अनुसार, सरकारी स्कूलों की संख्या 2020-21 में 10.32 लाख से घटकर 2024-25 में 10.13 लाख हो गई है – यानी 18,727 स्कूलों की कमी या लगभग 1.8% की गिरावट. सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में और भी तेज़ी से गिरावट आई, जो 84,295 से घटकर 79,349 हो गए – इसी अवधि में 4,946 स्कूलों की कमी या लगभग 5.9% की गिरावट.

चौधरी ने कहा, ‘इस योजना के तहत बच्चों को साल में औसतन 220 दिन खाना दिया जाता है. इस योजना के तहत 11 करोड़ छात्रों के एनरोलमेंट के मुकाबले औसतन 8.5 करोड़ छात्र सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के 10.35 लाख से ज़्यादा स्कूलों में रोज़ाना गर्म पका हुआ खाना खा रहे हैं.’

सरकार का बजट

रिपोर्ट के अनुसार, बीते अप्रैल में केंद्र सरकार ने मिड-डे मील के लिए सामान की लागत किंडरगार्टन और प्राइमरी क्लास (1 से 5) के लिए 6.19 रुपये से बढ़ाकर 6.78 रुपये प्रति छात्र प्रति दिन कर दी और अपर प्राइमरी स्टूडेंट्स (क्लास 6 से 8) के लिए 9.29 रुपये से बढ़ाकर 10.17 रुपये कर दी है.

केंद्र ने वित्त वर्ष 2024-25 में पीएम पोषण योजना के लिए 12,467.39 करोड़ रुपये आवंटित किए, जिसे बाद में संशोधित करके 10,000 करोड़ रुपये कर दिया गया. हालांकि 18 फरवरी, 2025 तक सिर्फ 5,421.97 करोड़ ही खर्च हुए थे. वित्त वर्ष 2025-26 के केंद्रीय बजट में इस योजना के लिए 12,500 करोड़ आवंटित किए गए हैं.

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