Sanskrit Course in Pakistan University: बंटवारे के बाद पहली बार पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के दो विश्वविद्यालयों ने साझा विरासत का हवाला देते हुए संस्कृत में शॉर्ट टर्म कोर्स शुरू किए हैं. यहां भविष्य में गीता और महाभारत पढ़ाने की भी योजना है.
पंजाब यूनिवर्सिटी लाहौर (सरकारी) और लाहौर यूनिवर्सिटी ऑफ मैनेजमेंट साइंसेज (प्राइवेट) ने इस क्लासिकल भाषा में तीन महीने का कोर्स शुरू किया है. पिछले साल इस शॉर्ट टर्म कोर्स के लिए तैयारियां शुरू हो गई थीं, लेकिन 2025 में पहले कोर्स में एडमिशन हुए.
भाषा की बेसिक जानकारी
लाहौर यूनिवर्सिटी ऑफ मैनेजमेंट साइंसेज (LUMS) ने सबसे पहले बेसिक लेवल I और II शुरू किए, जिसके बाद पंजाब यूनिवर्सिटी लाहौर ने इसे शुरू किया. यह बात पंजाब यूनिवर्सिटी के हिंदी विभाग के प्रोफेसर डॉ. अशोक कुमार ने बीते शनिवार (13 दिसंबर) को समाचार एजेंसी पीटीआई से एक विशेष बातचीत में बताई.
कुमार ने कहा, ‘यह कोर्स क्लासिकल भाषा की बेसिक जानकारी देता है. संस्कृत पर अच्छी पकड़ बनाने के लिए एक छात्र को सात लेवल पूरे करने होंगे, जिसमें कम से कम तीन साल लगेंगे.’
गीता और महाभारत भी पढ़ सकेंगे
उन्होंने कहा कि अब देखते हैं कि क्या कभी विश्वविद्यालय इस क्लासिकल भाषा को समझने के लिए तीन साल का पूरा कोर्स शुरू कर पाती है. संस्कृत भाषा के तीन साल के कोर्स में छात्र गीता और महाभारत भी पढ़ पाएंगे.
जब पूछा गया कि पंजाब यूनिवर्सिटी या लाहौर यूनिवर्सिटी ऑफ मैनेजमेंट साइंसेज को संस्कृत कोर्स शुरू करने की ज़रूरत क्यों महसूस हुई, तो कुमार ने कहा, ‘1947 में बंटवारे के बाद पाकिस्तान में शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति था, जो इस क्लासिकल भाषा को पढ़ा सके, क्योंकि जो लोग इसे जानते थे, वे सब भारत चले गए थे. अब चूंकि पंजाब यूनिवर्सिटी के आर्काइव्स में संस्कृत का बहुत सारा साहित्य है, इसलिए हमारे नए डीन ने इसे शुरू करने का फैसला किया.’
छात्रों ने लिया एडमिशन
उन्होंने आगे कहा कि अब तक कोई भी स्थानीय व्यक्ति इसका इस्तेमाल नहीं कर रहा था और संस्कृत में पारंगत होने से हमें इस क्षेत्र के प्राचीन इतिहास के बारे में नई जानकारी मिल सकती है.
फिलहाल पंजाब यूनिवर्सिटी में तीन छात्रों ने एडमिशन लिया है, जबकि लाहौर यूनिवर्सिटी ऑफ मैनेजमेंट के संस्कृत कोर्स में अभी लगभग 8 छात्र हैं. कुमार ने कहा कि दोनों विश्वविद्यालयों में संस्कृत पढ़ रहे ज़्यादातर छात्र मुस्लिम हैं.
जोड़ने वाली भाषा है संस्कृत
लाहौर में फोरमैन क्रिश्चियन कॉलेज यूनिवर्सिटी में सोशियोलॉजी के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. शाहिद रशीद ने एक स्थानीय अखबार से बातचीत में कहा, ‘क्लासिकल भाषाओं में इंसानियत के लिए बहुत सारा ज्ञान है. मैंने अरबी और फ़ारसी सीखने से शुरुआत की, और फिर संस्कृत पढ़ी.’
रशीद ने कहा, ‘लोग अक्सर संस्कृत पढ़ने के उनके फैसले पर सवाल उठाते हैं, तब मैं उनसे कहता हूं, हमें इसे क्यों नहीं सीखना चाहिए? यह पूरे इलाके की जोड़ने वाली भाषा है. संस्कृत व्याकरण के विद्वान पाणिनी का गांव इसी इलाके में था.’
संस्कृत किसी धर्म से नहीं बंधी
उन्होंने आगे कहा, ‘सिंधु घाटी सभ्यता के दौरान यहां बहुत कुछ लिखा गया था. संस्कृत एक सांस्कृतिक स्मारक की तरह है, हमें इसे अपनाना चाहिए. यह हमारी भी है; यह किसी एक खास धर्म से बंधी नहीं है.’
रशीद ने कहा, ‘अगर लोग एक-दूसरे की क्लासिकल परंपराओं को सीखने की कोशिश करें, तो दक्षिण एशिया में ज़्यादा एकजुट माहौल देखने को मिलेगा. सोचिए, अगर भारत में अधिक से अधिक संख्या में हिंदू और सिख अरबी सीखना शुरू कर दें और पाकिस्तान में अधिक संख्या में मुसलमान संस्कृत सीखें, तो यह दक्षिण एशिया के लिए एक नई और उम्मीद भरी शुरुआत हो सकती है, जहां भाषाएं रुकावटों के बजाय पुल बन जाएंगी.’
हिंदी को लेकर क्या कहा
हिंदी भाषा के बारे में उन्होंने कहा कि यह उन 12 विदेशी भाषाओं में से एक है, जिसे पंजाब यूनिवर्सिटी 1947 से पढ़ा रही है.
‘आइए हिंदी सीखें; प्यार और सद्भाव की भाषा, उपमहाद्वीप के समुदायों की संस्कृति और इतिहास’, पंजाब यूनिवर्सिटी, इंस्टीट्यूट ऑफ लैंग्वेजेज में एक साइन बोर्ड पर यह लाइन लिखी हुई है. डॉ. अशोक कुमार ने कहा, ‘फिलहाल, हमारे पास हिंदी भाषा के एक साल के डिप्लोमा कोर्स में 10 छात्र हैं. पंजाब यूनिवर्सिटी ने 2010 के बाद ग्रीक, लैटिन और हिब्रू कोर्स भी शुरू किए हैं.’




