गोवा: भूमि उपयोग में बदलाव के विरोध में गांववालों ने मंत्री के घर का किया घेराव, ‘करो या मरो’ आंदोलन जारी

उत्तर गोवा के सेंट आंद्रे विधानसभा क्षेत्र में आने वाले पालेम-सिरीडाओ के गांव की भूमि के इस्तेमाल में बदलाव का विरोध किया जा रहा है. (फोटो साभार: फेसबुक/RevolutionaryGoans)

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गोवा की राजधानी पणजी के पास डोना पाउला में बीते सोमवार (23 फरवरी) को सैकड़ों की संख्या में प्रदर्शनकारियों ने राज्य के नगर और ग्राम नियोजन मंत्री विश्वजीत राणे के घर के बाहर भूमि-उपयोग परिवर्तन कानून के एक विवादित नियम को खत्म करने की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया.

गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने प्रदर्शनकारियों से ‘सही मंच पर मामले पर चर्चा करने’ की अपील की और मंत्री के घर तक मार्च करने को ‘गलत’ बताया. कुछ घंटों तक मंत्री के घर के बाहर डेरा डालने के बाद प्रदर्शनकारियों ने अपने आंदोलन को वापस आज़ाद मैदान में ले जाने का फैसला किया.

द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, यह विरोध तब हुआ जब उत्तर गोवा के सेंट आंद्रे विधानसभा क्षेत्र के पालेम-सिरीडाओ (Palem-Siridao Village) के गांववालों ने बीते शनिवार (21 फरवरी) को नगर और ग्राम नियोजन विभाग के ऑफिस में धरना दिया. गांववालों ने नगर और ग्राम नियोजन अधिनियम (TCP Act) के अनुच्छेद 39A (Section 39A) के तहत कई प्लॉट के भूमि उपयोग में बदलाव को रद्द करने की मांग की.

अनुच्छेद 39A

प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि विभाग अधिनियम के अनुच्छेद 39A के नियमों का गलत इस्तेमाल करके गांव की 84,000 वर्ग मीटर से ज़्यादा ज़मीन, जिसमें पहाड़ी ढलान, बाग और नो डेवलपमेंट ज़ोन शामिल हैं, को गैर-आवासीय क्षेत्र से आवासीय क्षेत्र में परिवर्तित करने की अनुमति देता है, जिससे निर्माण गतिविधियों का मार्ग प्रशस्त होता है.

शनिवार को हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान सेंट आंद्रे के विधायक और रिवोल्यूशनरी गोअन्स पार्टी (Revolutionary Goans Party) के नेता वीरेश बोरकर (Viresh Borkar) ने आरोप लगाया कि पुलिसवालों ने उन्हें ऑफिस ‘घसीटकर’ बाहर निकाला. प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि उन पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए, जिन्होंने कथित तौर पर विधायक के साथ ‘मारपीट’ की.

गांव बर्बाद हो जाएंगे

शनिवार को द इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में बोरकर ने कहा था, ‘इस अनुच्छेद के तहत बड़े पैमाने पर ज़मीन के इस्तेमाल में बदलाव की अनुमति दी जा रही है. इससे पूरे गोवा के गांव बर्बाद हो जाएंगे. हम मांग कर रहे हैं कि इस अनुच्छेद को खत्म किया जाए. जब ​​तक यह मांग पूरी नहीं हो जाती, मैं अपनी भूख हड़ताल जारी रखूंगा.’

समाचार एजेंसी भाषा के मुताबिक, इस बीच मंगलवार को आजाद मैदान में प्रदर्शन के दौरान विधायक बोरकर को स्वास्थ्य बिगड़ने के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया है. बोरकर नियमों में बदलाव को निरस्त करने की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं.


क्या है अनुच्छेद 39A

इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, गोवा नगर और ग्राम नियोजन अधिनियम का अनुच्छेद 39A, जिसे 2024 में अधिसूचित किया गया था, मुख्य नगर योजनाकार को भूमि क्षेत्रों को बदलने के लिए क्षेत्रीय योजना और रूपरेखा विकास योजनाओं में बदलाव या संशोधन करने का अधिकार देता ​है. यह असल में अनिवार्य रूप से व्यक्तिगत आवेदनों के आधार पर ‘स्पॉट ज़ोनिंग’ परिवर्तनों (ज़मीन के इस्तेमाल में बदलाव) की अनुमति देता है, जो 30 दिन की अवधि में राजपत्र में सार्वजनिक आपत्ति के अधीन है.

‘करो या मरो आंदोलन’

प्रदर्शनकारियों और विपक्षी पार्टियों के नेताओं ने सोमवार शाम को ‘करो या मरो आंदोलन’ का आह्वान किया था, जिसमें सरकार से विवादित कानून को रद्द करने की मांग की गई है. आजाद मैदान में इकट्ठा होने के बाद प्रदर्शनकारियों ने मंत्री राणे के घर तक मार्च किया, जबकि पुलिस ने ‘कानून और व्यवस्था’ का हवाला देते हुए मंत्री के घर की ओर जाने वाली सड़कों पर बैरिकेड लगा दिए थे.


गांववाले नगर और ग्राम नियोजन अधिनियम के अनुच्छेद 39A के तहत कई प्लॉट के भूमि उपयोग में बदलाव को रद्द करने की मांग कर रहे हैं. (फोटो साभार: फेसबुक/RevolutionaryGoans)

मुख्यमंत्री ने क्या कहा

इस बीच गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने सोमवार रात कहा कि प्रदर्शनकारियों को विरोध करने का अधिकार है, लेकिन यह ‘सीमा के अंदर’ होना चाहिए.

उन्होंने कहा, ‘वे आज़ाद मैदान में विरोध कर सकते हैं. कलेक्टर वहां हैं, वे उन्हें शिकायत पत्र दे सकते हैं, लेकिन किसी मंत्री के घर तक मार्च करना और कानून अपने हाथ में लेना गलत है और विधायकों को ऐसा करना शोभा नहीं देता. मुझे उम्मीद है कि वे कानून अपने हाथ में नहीं लेंगे और सही मंच पर इस मामले को लेकर बात करेंगे.

मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी मंत्री के घर जाना सही नहीं है, ‘क्योंकि उनकी अपनी निजता होती है.’

मर्यादा बनाए रखें

सावंत ने कहा, ‘विपक्ष के नेता (कांग्रेस के यूरी अलेमाओ) को कानून पता है और वह शांति से प्रदर्शन करना भी जानते हैं, मैं उनसे अपील करता हूं कि वे मर्यादा बनाए रखें, लेकिन उन्हें यह समझने की ज़रूरत है कि जिस मंत्री के खिलाफ वे प्रदर्शन कर रहे हैं, वह उनके सहकर्मी हैं. हमें उनकी और उनके घर के दूसरे सदस्यों की सुरक्षा की चिंता है.’

उन्होंने आगे कहा, ‘लोगों ने मुख्यमंत्री के आधिकारिक बंगले पर प्रदर्शन किया है, उन्होंने विधानसभा में प्रदर्शन किया है, ये सब ठीक है. इस पर चर्चा करने के लिए कई मंच हैं. हम उस मंच पर इसे लेकर चर्चा कर सकते हैं, यह [मामला] कोर्ट में भी है.’

अनुमति नहीं ली थी

बोरकर के साथ बदसलूकी के आरोपों पर सावंत ने कहा कि एक सरकारी ऑफिस में कई बातों का ध्यान रखना होता है. उन्होंने कहा, ‘कर्मचारियों की सुरक्षा, फाइलों की सुरक्षा. पुलिस ने उनसे ऑफिस खाली करने के लिए 12 घंटे मांगे थे. पुलिस आदि ने अनुरोध किया था. आंदोलन के आयोजकों ने कोई अनुमति नहीं ली थी, न ही कोई रूट प्लान किया था, फिर भी पुलिस ने उन्हें हर मोड़ पर रोकने की कोशिश की, पुलिस ने उनके खिलाफ कोई एक्शन नहीं लिया. अगर आंदोलन कोई अलग मोड़ लेता है, तो नेता जिम्मेदार होंगे. वे आजाद मैदान में प्रदर्शन कर सकते हैं.’

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