केंद्र सरकार की ओर से गुरुवार (18 दिसंबर) को संसद में बताया गया कि रूसी सेना में काम करते हुए 26 भारतीय नागरिक मारे गए और सात लापता हैं.
राज्यसभा में विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह द्वारा लिखित जवाब में दी गई मृतकों की संख्या, विदेश मंत्रालय द्वारा पहले बताई गई संख्या से कहीं ज़्यादा है. अधिकारियों ने पहले कहा था कि रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध में फ्रंटलाइन पर लड़ते हुए 12 भारतीय मारे गए थे.
तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद साकेत गोखले और कांग्रेस सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला के सवाल के जवाब में मंत्री का यह जवाब उस मीडिया रिपोर्टों के कुछ ही समय बाद आया, जिसमें कहा गया था कि रूसी सेना में काम करते हुए मारे गए दो भारतीयों के शव बुधवार (17 दिसंबर) को दिल्ली पहुंचे हैं. ये दोनों मृतक राजस्थान और उत्तराखंड के रहने वाले थे.
सरकार ने क्या कहा
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, सिंह ने अपने लिखित जवाब में कहा कि 202 भारतीय नागरिकों को ‘रूसी सेना में भर्ती किया गया माना जाता है’. सरकार की कोशिशों से 119 लोगों को जल्दी छुट्टी मिल गई, जबकि ‘रूसी पक्ष के अनुसार 26 लोगों की मौत हो गई है और सात लापता हैं’.
सिंह ने कहा, ‘50 लोगों को जल्दी छुट्टी दिलाने के लिए कोशिशें जारी हैं. विदेश मंत्रालय ने 10 मृत भारतीय नागरिकों के पार्थिव शरीर को भारत वापस लाने और दो मृत भारतीय नागरिकों का स्थानीय स्तर पर अंतिम संस्कार करने में मदद की है.’
पहचान के लिए DNA टेस्ट
उन्होंने कहा कि मृत या लापता बताए गए 18 भारतीयों के परिवार के सदस्यों के DNA सैंपल रूसी अधिकारियों के साथ साझा किए गए हैं, ताकि ‘कुछ मृत भारतीय नागरिकों की पहचान स्थापित करने में मदद मिल सके’.
उनके अनुसार, विदेश मंत्रालय और रूस में भारतीय मिशन और पोस्ट ने रूसी सेना से डिस्चार्ज हुए भारतीयों को भारत लौटने में मदद की है, जिसमें ट्रैवल डॉक्यूमेंट्स की सुविधा देना और हवाई टिकट देना शामिल है. मॉस्को में भारतीय दूतावास ने शवों को निकालने में भी मदद की.
भारतीय दूतावास करता है मदद
सिंह ने कहा, ‘एक बार जब पार्थिव शरीर को सुरक्षित जगह पर ले जाया जाता है, तो पहचान की प्रक्रिया में डीएनए सैंपल का मिलान परिजनों के साथ किया जाता है. जब पहचान पक्की हो जाती है, तो भारतीय दूतावास परिवार के साथ मिलकर स्थानीय अंतिम संस्कार या पार्थिव शरीर को भारत लाने के लिए ज़रूरी डॉक्यूमेंटेशन पूरा करने में मदद करता है.’
सिंह ने आगे कहा कि सरकार रूसी पक्ष के साथ लगातार संपर्क में है, ताकि रूसी सशस्त्र बलों में सभी भारतीयों की सुरक्षा, भलाई और जल्द डिस्चार्ज सुनिश्चित किया जा सके. उन्होंने कहा, ‘इस मामले पर अलग-अलग स्तरों पर चर्चा की जाती है, जिसमें दोनों पक्षों के नेताओं, मंत्रियों और अधिकारियों के बीच बातचीत भी शामिल है.’
भर्ती रोकने की बात
रूसी अधिकारियों के 2024 में भर्ती रोकने की बात कहने के बावजूद भारतीय नागरिकों के रूसी सेना में शामिल होने की समस्या जारी है. बीते नवंबर माह में हिंदुस्तान टाइम्स को दिए एक इंटरव्यू में रूसी राजदूत डेनिस अलीपोव ने इस मामले को ‘दोनों पक्षों के लिए एक गंभीर चिंता’ बताया था. उन्होंने कहा था कि रूसी सेना भारतीय नागरिकों की भर्ती नहीं करती है और ‘जिन्होंने मिलिट्री कॉन्ट्रैक्ट साइन किए हैं, उन्होंने यह अपनी मर्ज़ी से किया है’.




