Contaminated Drinking Water: मध्य प्रदेश के इंदौर ज़िले के महू (Mhow) इलाके में दूषित पानी पीने से बच्चों समेत दो दर्जन से ज़्यादा लोगों को पीलिया हो गया है. स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया कि गुरुवार (22 जनवरी) रात से पट्टी बाज़ार और चंदर मार्ग इलाकों से मामले सामने आने लगे.
स्थानीय लोगों ने गंदे और बदबूदार पानी की शिकायत की और कहा कि इसे पीने से स्कूल जाने वाले बच्चों समेत कई लोग बीमार पड़ गए, जिससे उन्हें क्लास छोड़नी पड़ी और कुछ मामलों में तो ज़रूरी परीक्षा भी छूट गई.
एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, 12वीं क्लास की छात्रा एलेना बीमार होने की वजह से अपने प्री-बोर्ड एग्जाम नहीं दे पाई, जबकि 12 साल का गीतांश और 9 साल की लक्षिता दोनों पीलिया से जूझ रहे हैं.
मोती महल इलाके में हालात और भी ज़्यादा चिंताजनक हैं.
शिकायत पर नहीं हुई कार्रवाई
एक अधिकारी ने बताया कि इंदौर के कलेक्टर शिवम वर्मा गुरुवार देर रात महू पहुंचे और एक अस्पताल में इलाज करा रहे कुछ मरीज़ों से मिले. उन्होंने प्रभावित इलाकों के लोगों से भी बात की.
उनमें से कई लोगों ने बताया कि उन्होंने दूषित पानी के बारे में कई बार शिकायत की थी – कुछ मामलों में पाइप सीवेज के गड्ढों या नालियों से गुज़र रहे थे – लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई.
अब लोगों के पीलिया (Jaundice) होने के मामले सामने आने के बाद मुख्य चिकित्सा और स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. माधव हसानी के आदेश पर हेल्थ अधिकारी शुक्रवार सुबह महू पहुंचे. इलाके की विधायक भारतीय जनता पार्टी की उषा ठाकुर ने भी बीमार लोगों से मुलाकात की.
फिलहाल महू में फैली बीमारी से किसी की मौत की खबर नहीं है.
इंदौर में 25 लोगों की मौत
Indore Contaminated Water Deaths: कुछ दिन पहले ही महू से 60 किलोमीटर दूर इंदौर शहर में दूषित पानी की सप्लाई की वजह से 25 लोगों की मौत हो गई है. बीते मंगलवार (20 जनवरी) को भी एक मौत हुई. मृतक की पहचान भागीरथपुरा इलाके (Bhagirathpura Area) के रहने वाले 51 साल के हेमानी गायकवाड़ की है.
रिपोर्ट के अनुसार, गायकवाड़ 22 दिसंबर 2025 को दूषित पानी पीने के बाद बीमार पड़ गए थे. डॉक्टरों ने बताया कि उन्हें सेल कार्सिनोमा (Carcinoma – स्किन कैंसर का एक प्रकार) और किडनी की बीमारी थी, लेकिन उन्हें उल्टी और दस्त की शिकायत के साथ भर्ती कराया गया था.
मंगलवार को राज्य सरकार ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (Madhya Pradesh High Court) को बताया कि पीने के पानी में बैक्टीरियल इन्फेक्शन की वजह से भागीरथपुरा इलाके में बड़े पैमाने पर संक्रमण फैला.
ई. कोलाई बैक्टीरिया
मुख्य सचिव अनुराग जैन ने जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की इंदौर पीठ को बताया कि भागीरथपुरा में 51 ट्यूबवेल में दूषित पानी मिला और एक टेस्ट रिपोर्ट में ई. कोलाई बैक्टीरिया (E. coli Bacteria) होने की बात सामने आई.
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, ई. कोलाई आमतौर पर सीवेज या मल के ज़रिये पानी में मिल जाता है और इस बैक्टीरिया से प्रदूषित पानी पीने से उल्टी, दस्त, पेट दर्द और बुखार होता है.
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने पूछा कि पीने का पानी कैसे दूषित हुआ, तो सरकार ने बताया कि एक पाइप में लीक होने की वजह से पीने का पानी और सीवेज आपस में मिल गए थे.




