Protest against Coal Mine Project: दो हफ्तों से ज़्यादा समय से छत्तीसगढ़ के रायगढ़ ज़िले के तमनार ब्लॉक के 14 गांवों के हज़ारों लोग एक कोयला खदान परियोजना के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. उनका कहना है कि वे अपनी खेती की ज़मीन नहीं छोड़ना चाहते, जो कई पीढ़ियों से उनके लिए रोज़ी-रोटी का एकमात्र ज़रिया रही है.
बीते शनिवार (27 दिसंबर) को यह विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गया, जिसमें गाड़ियां जला दी गईं और पुलिस के साथ झड़पें हुईं. एक दिन बाद ज़िला प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगों में से एक मान ली – परियोजना के लिए 8 दिसंबर को हुई जन सुनवाई के नतीजों को रद्द कर दिया गया.
बातचीत जारी रहेगी
द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने दावा किया कि जन सुनवाई (Public Hearing) – जो किसी परियोजना के लिए पर्यावरण मंजूरी (Environmental Clearance) देने की प्रक्रिया का एक ज़रूरी हिस्सा है, उसे गलत तरीके से किया गया. लेकिन ज़िला प्रशासन ने इस दावे को खारिज कर दिया और कहा कि सुनवाई निष्पक्ष तरीके से हुई और हर प्रभावित गांव वाले को उचित मुआवज़ा दिया जाएगा.
जिंदल समूह (Jindal Group), जिसे नीलामी के ज़रिये यह कोयला खदान परियोजना मिली है, उसने कहा कि वह समाधान खोजने के लिए स्थानीय लोगों के साथ बातचीत जारी रखेगा.
An ongoing protest against a coal mining project in the Tamnar block of Chhattisgarh’s Raigarh district turned violent Saturday, with incidents of stone-pelting, vandalism and arson.
According to police, tensions escalated at the Jindal Coal Handling Plant (CHP) chowk in Libra… pic.twitter.com/fkX3EfGSkF
— The Indian Express (@IndianExpress) December 28, 2025
इस वजह से हुई हिंसा
बीते 12 दिसंबर को शुरू हुआ धरना प्रदर्शन 27 दिसंबर को हिंसक हो गया, जब पुलिस ने करीब 50 महिलाओं को हटाने की कोशिश की. ये महिलाएं विरोध स्थल – लिब्रा गांव में कोल्ड हैंडलिंग प्लांट चौक – के पास सड़क पर बैठी थीं और खनन से जुड़े वाहनों को रोकने की कोशिश कर रही थीं.
पुलिस ने उन्हें एक-एक करके सड़क से हटाना शुरू किया, जिससे गांववाले गुस्सा हो गए. इसके तुरंत बाद 4,000 से ज़्यादा लोगों की भीड़ मौके पर जमा हो गई, जिनकी संख्या पुलिस से ज़्यादा थी. भीड़ ने हंगामा किया, तीन गाड़ियों में आग लगा दी और पुलिसकर्मियों से झड़प हुई. पुलिस ने बताया कि इस दौरान दो वरिष्ठ अधिकारी गंभीर रूप से घायल हो गए.
ये गांव होंगे प्रभावित
रिपोर्ट के अनुसार, जिस जन सुनवाई के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हुआ था, वह तमनार ब्लॉक (Tamnar Block) के 14 गांवों में 3,020 हेक्टेयर क्षेत्र में एक ओपन-कास्ट-कम-अंडरग्राउंड कोयला खदान बनाने के लिए थी, जिसकी उत्पादन क्षमता 1.5 करोड़ टन प्रति वर्ष होगी. इस परियोजना से प्रभावित होने वाले गांवों में बुधिया, रायपारा, अमगांव, खुरसलेंगा, धोराभाठा, लिब्रा, बिजना, मेहलोई, बागबारी, झिनकाबहल, तिलाईपारा, समकेरा, झरना और टंगारघाट शामिल हैं.
हिंसा की घटना की जांच
27 दिसंबर की हिंसा पर प्रतिक्रिया देते हुए छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय (Vishnu Deo Sai) ने कहा कि घटना की जांच की जाएगी. उन्होंने कहा, ‘तमनार की घटना की जांच की जाएगी और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.’ बीते 28 दिसंबर को डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी ने विरोध कर रहे गांववालों के प्रतिनिधियों के साथ एक बैठक की.

रद्द होगी जन सुनवाई
इसके बाद सब डिविजनल मजिस्ट्रेट (एसडीएम) दुर्गा प्रसाद अधिकारी ने कहा, ‘हमने सभी गांव के प्रतिनिधिमंडलों के साथ शुरुआती स्तर की बातचीत की है और अब हमने (जन सुनवाई के नतीजे को) रद्द करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. हमने रद्द करने की प्रक्रिया पर काम करना शुरू कर दिया है और मैं सभी गांववालों और विरोध स्थल पर मौजूद सभी लोगों से अनुरोध और अपील करता हूं कि कृपया शांति बनाए रखें और कानून को अपने हाथ में न लें.’
एसडीएम ने आगे कहा, ‘हम आपकी सभी मांगों का सम्मान करते हैं और इसके लिए हमने रद्दीकरण की प्रक्रिया के एक स्तर पर काम शुरू कर दिया है.’
ग्रामीण नहीं देना चाहते ज़मीन
इंडियन एक्सप्रेस ने विरोध प्रदर्शन वाली जगह का दौरा किया. विरोध कर रहे गांव वालों ने कहा कि वे नहीं चाहते कि इस परियोजना के लिए उनकी ज़मीन ली जाए.
विरोध करने वालों में से एक झिकाबहाल गांव की कमला पटेल ने कहा, ‘मैं एक आम महिला हूं. मुझे अपने बच्चों की चिंता है. अगर मैं विरोध करती रही, तो मुझे गिरफ्तार किया जा सकता है. हमारे पास कुछ एकड़ ज़मीन है और पानी की कमी के कारण हम साल में एक बार चावल की खेती करते हैं. हमारी मांग है कि जन सुनवाई रद्द की जाए. हम ज़मीन बिल्कुल नहीं बेचना चाहते.’
आमगांव के 42 साल के मुरलीधर नायक ने कहा, ‘हम पर्यावरण की चिंताओं की वजह से खदान बिल्कुल नहीं चाहते, क्योंकि हमारा घर अभी भी यहीं है. दूसरा, हम अपनी खेती की ज़मीन खो देंगे और 90% से ज़्यादा लोग कुशल किसान हैं, जो इस पर निर्भर हैं. हमारे पास रोज़ी-रोटी के ज़्यादा विकल्प नहीं हैं; हम दूसरा कोई और काम करना नहीं जानते.’
8 दिसंबर को हुई थी जन सुनवाई
27 दिसंबर को हिंसा से कुछ मिनट पहले कलेक्टर चतुर्वेदी ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया था, ‘8 दिसंबर को हुई जन सुनवाई के समय वहां 4,000 लोग मौजूद थे, लेकिन कई बार कहने के बावजूद वे इसमें हिस्सा नहीं लेना चाहते थे. सुनवाई करीब ढाई घंटे चली. इसमें लगभग 26 लोगों ने हिस्सा लिया और ज़्यादातर लोग पर्यावरण मंजूरी देने के पक्ष में थे. गांववालों को तीन चीज़ें मिलेंगी – उनकी ज़मीन के लिए आर्थिक मुआवज़ा, हर परिवार के एक सदस्य को नौकरी और रहने के लिए दूसरी जगह.’
जिंदल स्टील ने क्या कहा
इस मामले को लेकर जिंदल स्टील के अध्यक्ष प्रदीप टंडन ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया, ‘सरकार ने तय प्रक्रिया के अनुसार जन सुनवाई की और हमने अपने विचार और प्रतिबद्धता (वायदे) रिकॉर्ड पर रखे हैं. प्रभावित गांववालों को एक पूरा और सही मुआवज़ा पैकेज दिया जा रहा है, क्योंकि खनन का काम धीरे-धीरे किया जाएगा, इसलिए अगले 30-40 सालों में धीरे-धीरे ज़मीन ली जाएगी और हम स्थानीय लोगों की चिंताओं को दूर करने और आपसी सहमति से शांतिपूर्ण समाधान सुनिश्चित करने के लिए उनके साथ लगातार बातचीत करते रहेंगे.’




